Bihar Election: भारत-नेपाल बॉर्डर पर सुरक्षाबल के जवान अलर्ट! चलाएंगे जॉइंट ऑपरेशन, झारखंड सीमा होगी सील

भारत-नेपाल बॉर्डर पर दोनों देशों के सुरक्षा अधिकारियों की मीटिंग.
भारत-नेपाल बॉर्डर पर दोनों देशों के सुरक्षा अधिकारियों की मीटिंग.

Bihar Assembly Election: विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भारत-नेपाल बॉर्डर (India-Nepal Border) पर अधिकारियों की बैठक हुई. सशस्त्र सीमा बल (SSB) 21वीं वाहिनी के सेनानायक राजेन्द्र भारद्वाज ने बताया कि चुनाव को लेकर सुरक्षा मुद्दों और शराब तस्करी रोकने पर चर्चा हुई.

  • News18 Bihar
  • Last Updated: September 30, 2020, 11:52 PM IST
  • Share this:
रिपोर्ट- मुन्ना राज
बगहा. बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) के मद्देनजर भारत-नेपाल बॉर्डर पर दोनों देशों के अधिकारियों की बैठक हुई है. चुनाव को लेकर बैठक में सुरक्षा रणनीति बनाई गई और सीमावर्ती इलाकों में संयुक्त ऑपरेशन चलाने का निर्णय लिया गया है. नेपाल की ओर से एसपी स्तर के अधिकारी के साथ कई अन्य शामिल हुए तो वहीं भारत की ओर से सशस्त्र सीमा बल (SSB) के साथ जिला पुलिस के अधिकारी भी  शामिल हुए और दोनों देशों के बीच समन्वय को लेकर भी चर्चा हुई.

चुनाव को लेकर शराब तस्करी पर विशेष नजर
नेपाल बॉर्डर पर सुरक्षा संभाल रही सशस्त्र सीमा बल 21वीं वाहिनी के सेनानायक राजेन्द्र भारद्वाज ने बताया कि चुनाव को लेकर अहम बैठक आयोजित हुई जिसमें सुरक्षा मुद्दों और शराब तस्करी रोकने पर चर्चा हुई. बैठक में नवल परासी एसपी महेश अधिकारी ,सुस्ता इंस्पेक्टर राजेश्वर बजाली. चितवन एसपी एपीएफ दीपक थापा,एएसपी अभियान धर्मेन्द्र झा, एसडीपीओ कैलाश प्रसाद आदि शामिल हुए.




बिहार-झारखंड सीमा होगी सील
बता दें कि इससे पहले सुरक्षा एवं अन्य मुद्दों को लेकर बिहार-झारखंड के अधिकारियों की हाई लेवल मीटिंग बोधगया (Bodhgaya) के एक निजी होटल में हुई. इसमें मतदान से 48 घंटे पहले बॉर्डर सीलिंग की कार्रवाई के साथ ही विभिन्न जिलों की सीमा पर चेकपोस्ट का निर्माण पर चर्चा की गयी. बैठक में अंतर्राज्यीय स्तर पर नगद राशि की आवाजाही की जांच पड़ताल करने और चोरी छिपे शराब एवं हथियार ले जा रहे लोगों पर कार्रवाई तेज करने पर रणनीति बनाई गयी.

चुनाव को लेकर बिहार-झारखंड के सीमावर्ती क्षेत्र में नक्सलियों के खिलाफ दोनों राज्यों की पुलिस और अर्धसैनिक बलों द्वारा संयुक्त अभियान की समीक्षा करते हुए इसे चुनाव तक लगातार जारी रखने की रणनीति बनायी गयी ताकि नक्सली संगठन चुनावी प्रक्रिया में किसी तरह का बाधा उत्पन्न नहीं कर सकें.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज