Bettiah Assembly Seat: कांटे की लड़ाई में कांग्रेस ने 2015 में जीता था चुनाव, इस बार भी होगा कड़ा मुकाबला

Bettiah Assembly Seat: साल 2000 के बाद से हुए कई चुनावों में जीतती आ रही बीजेपी (BJP) से 2015 में कांग्रेस ने बेतिया विधानसभा (Bettiah Assembly Seat) की सीट छीन ली. 2020 के चुनाव (Bihar Assembly Election) में महागठबंधन और राजग में कड़े मुकाबले के हैं आसार.
Bettiah Assembly Seat: साल 2000 के बाद से हुए कई चुनावों में जीतती आ रही बीजेपी (BJP) से 2015 में कांग्रेस ने बेतिया विधानसभा (Bettiah Assembly Seat) की सीट छीन ली. 2020 के चुनाव (Bihar Assembly Election) में महागठबंधन और राजग में कड़े मुकाबले के हैं आसार.

Bettiah Assembly Seat: साल 2000 के बाद से हुए कई चुनावों में जीतती आ रही बीजेपी (BJP) से 2015 में कांग्रेस ने बेतिया विधानसभा (Bettiah Assembly Seat) की सीट छीन ली. 2020 के चुनाव (Bihar Assembly Election) में महागठबंधन और राजग में कड़े मुकाबले के हैं आसार.

  • News18 Bihar
  • Last Updated: September 21, 2020, 11:46 AM IST
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पश्चिमी चंपारण. बिहार का चंपारण इलाका (Champaran) दो जिलों में बंटा हुआ है. पूर्वी और पश्चिमी चंपारण. इसी पश्चिमी चंपारण जिले का मुख्यालय है बेतिया, जहां की विधानसभा सीट (Bettiah Assembly Seat) पर साल 2020 में होने जा रहे विधानसभा चुनाव का मुकाबला जोरदार होने के आसार जताए जा रहे हैं. दरअसल, वर्ष 2000 के बाद के दो दशकों में बेतिया विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी का दबदबा रहा है. लेकिन 2015 में यहां विधानसभा चुनाव में कड़ा मुकाबला देखने को मिला. उस चुनाव में कांग्रेस (Congress) उम्मीदवार ने बीजेपी (BJP) प्रत्याशी और यहां की सीटिंग एमएलए को कड़ी टक्कर दी और महज 2320 वोटों से परास्त कर दिया. 2015 के चुनाव में मिली सफलता कांग्रेस के लिए जितनी महत्वपूर्ण थी, 2020 में आकर यह उससे कहीं ज्यादा बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुकी है. यही वजह है कि राजनीति के जानकार इस बार चुनावी (Bihar Assembly Election) मुकाबला जोरदार होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं.

रेणु देवी ने लगातार जीते 4 चुनाव
कोरोनाकाल में बेतिया विधानसभा सीट के लिए होने वाले चुनाव में सबकी नजरें भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के प्रदर्शन पर जरूर टिकी रहेगी. क्योंकि 2015 से पहले के चार चुनावों में बीजेपी ने यहां से लगातार जीत हासिल की है. बीजेपी नेता रेणु देवी साल 2000, 2005 के दोनों चुनाव और 2010 में यहां से चुनाव जीतकर विधायक बनीं. 2015 में भी रेणु देवी का पलड़ा भारी ही नजर आ रहा था, लेकिन महागठबंधन और राजग की चुनावी जंग में कांग्रेस ने बाजी मार ली. 2015 के विधानसभा चुनाव के नतीजे चौंकाने वाले आए. कांग्रेस प्रत्याशी मदन मोहन तिवारी ने महज 2320 वोटों से कई बार चुनाव जीतने वाली रेणु देवी को शिकस्त दे दी.

कांग्रेस के गढ़ को बीजेपी ने अपना बनाया
ऐसा नहीं है कि बेतिया विधानसभा सीट पर हमेशा से बीजेपी ही चुनाव जीतती रही हो. चंपारण की कई अन्य विधानसभा सीटों की तरह बेतिया भी कभी कांग्रेस पार्टी का गढ़ हुआ करता था. लेकिन 1990 के बाद जब बिहार की राजनीति ने करवट ली तो कांग्रेस यहां से दूर होती चली गई. हालांकि बीजेपी को भी इस विधानसभा में अपने पैर जमाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी, लेकिन उसका सकारात्मक परिणाम भी पार्टी को मिलता रहा. अलबत्ता 2015 में जब लालू यादव और नीतीश कुमार ने नरेंद्र मोदी की 'लहर' के बीच महागठबंधन बनाया और कांग्रेस भी उसका हिस्सा बनी, तो बेतिया में एक बार फिर 'हाथ' को मजबूत करने की राह दिखाई. यही वजह है कि 2020 के चुनाव को लेकर बेतिया विधानसभा सीट पर सियासी रणनीतिकारों की निगाहें जमी हैं.
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