Bagaha Seat: जेडीयू को हराकर 2015 में पहली बार BJP ने बगहा में बनाई जगह, रोचक होगा 2020 का चुनाव

बगहा सीट पर 2015 में बीजेपी प्रत्याशी को मिली थी जीत.
बगहा सीट पर 2015 में बीजेपी प्रत्याशी को मिली थी जीत.

Bagaha Assembly Seat: बगहा विधानसभा क्षेत्र (Bagaha Assembly Seat) साल 2008 तक सुरक्षित सीट रहा तो यहां राजद और जेडीयू (RJD-JDU) के बीच रस्साकशी होती रही. 2015 के चुनाव में पहली बार बीजेपी (BJP) ने इस सीट पर जदयू को हराकर जीत हासिल की.

  • News18 Bihar
  • Last Updated: September 21, 2020, 11:27 AM IST
  • Share this:
बगहा. पश्चिमी चंपारण जिले की बगहा विधानसभा सीट (Bagaha Assembly Seat) साल 2008 के पहले तक सुरक्षित विधानसभा सीटों में गिनी जाती थी. 2010 से यह सामान्य सीट के दर्जे में आई. वर्ष 2000 से लेकर 2010 तक यहां से पूर्णमासी राम विधायक रहे. 2000 में आरजेडी (RJD) से चुनाव लड़ने वाले पूर्णमासी राम ने 2005 में बगहा से जेडीयू (JDU) उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और जीते. 2010 में उनकी जगह जदयू ने प्रभात रंजन सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया, जिन्होंने पिछले 20 साल में अब तक की सबसे बड़ी चुनावी जीत बगहा से दर्ज की. लेकिन 2015 के विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) से पहले जब बिहार का राजनीतिक सूरते-हाल बदला, तब इस सीट पर पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपना दबदबा बनाया.

बीजेपी ने जदयू को दी मात
2015 के विधानसभा चुनाव के पहले जेडीयू और बीजेपी की एकता कुछ समय के लिए भंग हो गई थी. इसलिए जेडीयू नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उस समय राजद और कांग्रेस के साथ मिलकर महागठबंधन बनाया था. 2015 के चुनाव के नतीजे आए तो महागठबंधन ने बिहार में सर्वाधिक सीटों पर जीत हासिल की, लेकिन बगहा विधानसभा क्षेत्र का परिणाम अलग था. वर्ष 2000 के बाद से ही राजद और जदयू के कब्जे में रही यह सीट, उस साल बीजेपी ने हथिया ली थी. बीजेपी के उम्मीदवार राघव शरण पांडेय ने जेडीयू प्रत्याशी भीष्म साहनी को 8000 से अधिक मतों के अंतर से हरा दिया. इस तरह पहली बार बीजेपी ने बगहा विधानसभा क्षेत्र पर अपना अधिकार जमाया.

मगर इस बार जबकि जेडीयू और बीजेपी फिर से एक साथ मिलकर चुनाव लड़ने वाली है, तो ऐसे में राजनीतिक रणनीतिकार बगहा सीट पर टकटकी लगाए हैं. सियासी जानकारों के मुताबिक, इस सीट पर दोनों ही पार्टियों की दावेदारी को लेकर भी चर्चाएं जोरों पर हैं. साथ ही महागठबंधन के प्रमुख घटक दल आरजेडी के लिए भी यह सीट प्रतिष्ठा वाली हो सकती है. चूंकि इस सीट पर बिहार के सत्ताधारी गठबंधन के दोनों प्रमुख दल अपना-अपना कब्जा बरकरार रखने की कोशिश कर सकते हैं, ऐसे में बगहा में एक बार फिर 'लालटेन' की रोशनी फैलाने के लिए राजद भी पुरजोर कोशिश में लगा है.
जेडीयू उम्मीदवार की सबसे बड़ी जीत


बगहा सीट वर्तमान में भले ही बीजेपी के पास हो, लेकिन यहां से जेडीयू की दावेदारी को नजरअंदाज करना मुश्किल है. क्योंकि इस सीट पर वर्ष 2000 के बाद से अब तक हुए चुनावों में सबसे ज्यादा मतों के अंतर से जीत हासिल करने का रिकॉर्ड जेडीयू के पास ही है. दरअसल, वर्ष 2010 में बगहा विधानसभा सीट से जेडीयू प्रत्याशी प्रभात रंजन सिंह ने 49000 से ज्यादा मतों के अंतर से आरजेडी प्रत्याशी रामप्रसाद यादव को हराया था. उस चुनाव में राजद उम्मीदवार को 18455 वोट ही मिले थे, जबकि जेडीयू ने 67510 मत प्राप्त किए थे. वहीं, 2015 के चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार ने प्रतिद्वंद्वी जेडीयू प्रत्याशी को महज 8000 से कुछ ज्यादा वोटों से ही हराया था. ऐसे में बगहा से जेडीयू की दावेदारी बन सकती है. हालांकि सियासी ऊंट किस करवट बैठेगा, यह आने वाले समय में ही पता चलेगा.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज