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बिहार के पश्चिमी चंपारण में पर्यटन प्रेमियों की पुकार! जल्दी शुरू कराएं सरैया मन में नौका विहार

बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बैरिया ब्लॉक स्थित सरैया मन एक ऐसी खूबसूरत जगह है, जो पूरी तरह से प्राकृतिक है. यहां जंग ...अधिक पढ़ें

    आशीष कुमार/बेतिया. यदि आप घूमने के शौकीन हैं, तो एक बार जरूर बिहार के पश्चिम चंपारण जिला आएं. यहांबैरिया ब्लॉक में स्थित सरैया मन एक ऐसी खूबसूरत जगह है, जो पूरी तरह से प्राकृतिक है. यहां जंगल के बीचों-बीच सरैया नामक एक खूबसूरत झील बहती है. यहां आप नौका विहार के साथ-साथ कैलिफोर्निया और साइबेरियन पक्षियों को अठखेलियां करते हुए अपनी आंखों से देख सकते हैं. झील, मन, पहाड़, खूबसूरत जंगल जैसी प्राकृतिक सुंदरता के मनमोहक दृश्य का आंनद उठा सकते हैं. हालांकि, कोरोना बंदी के दौरान इसे बंद कर दिया गया था. लेकिन पर्यटन प्रेमियों को उम्मीद है कि इसे दोबारा आम जनता के लिए जल्द ही खोल दिया जाएगा.

    कहा जाता है कि इस जंगल में मौजूद झील का निर्माण किसी नदी से नहीं, बल्कि भूकंप से हुआ है. दरअसल यहां के निवासियों की मान्यता है कि यहां आए एक विनाशकारी भूकंप से जंगल के बीचों-बीच एक झील का निर्माण हुआ. जिसे सरैया के नाम से जाना जाता है. लगभग 320 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस झील की गहराई औसतन 70 फीट है. जबकि जंगल हजारों एकड़ में फैला है. यहां एक से बढ़कर एक औषधीय गुण वाले पेड़-पौधे हैं. साथ ही यहां जानवरों और सरीसृपों की भी अनगिनत प्रजातियां पाई जाती हैं.

    सरैया मन को उदयपुर जंगल के नाम से भी जाना जाता है
    हजारों एकड़ में फैलेसरैया मन को उदयपुर जंगल के नाम से भी जाना जाता है. यह एक ऐसा पक्षी विहार है जहां सर्दियों में हजारों किलोमीटर लंबा सफर तय कर कैलिफोर्निया और साइबेरिया से पक्षियों की अनगिनत प्रजातियां प्रवास पर आती हैं. ये पक्षियां जब सरैया झील में विहार करते हैं, तो दृश्य भी खूबसूरत बन जाता है. ऐसे दृश्यों को कैमरे में कैद करने के लिए लोग लालायित रहते हैं.जंगल में चारों तरफ फैली शांति पक्षियों के कोलाहल से पूरी तरह जीवित हो उठता है.

    औषधीय गुणों वाले पेड़-पौधों से भरा है यह जंगल
    इस पर्यटन स्थल की सबसे खास बात यह है कि इस जंगल में औषधीय गुण वाले हजारों पेड़-पौधे पाए जाते हैं. जिनके छाल, पत्ते, फल और फूल से तरह-तरह की बीमारियों का प्राकृतिक तरीके से इलाज भी किया जाता है. साथ ही यहां पौधों की कुछ ऐसी भी प्रजातियां हैं, जिनका उपयोग पूजा-पाठ हेतु पवित्र चीजों को बनाने में किया जाता है. नोरोगी होने के कारण कभी यहां के पानी को बेचे जाने की भी बात आसपास के लोग बताते हैं.

    जंगल में बबुआजी के नाम से रहते थे भगत सिंह
    आसपास के लोगों का कहना है कि सन 1929 में अंग्रेजों से लोहा लेने के लिए जरूरी हथियारों की खरीद को पैसे इकट्ठा करने भगत सिंह चम्पारण आए थे.अंग्रेजों की नजर से बचने के लिए उन्होंने इसी जंगल में शरण लिया था. जहां जंगल से सटे भितहा गांव निवासी क्रांतिकारी केदार मणि शुक्ल के घर से उनके लिए खाना जाया करता था. इस जंगल में वे चम्पारण के क्रांतिकारियों के साथ तकरीबन 14 दिनों तक रहे, जहां उन्हें बबुआजी के नाम से पुकारा जाता था.

    झील का आनंद लेने को वोटिंग की भी सुविधा
    पर्यटन के लिए सरैया मन आदर्श प्राकृतिक जगह है. यहां तरह-तरह के मनमोहक प्राकृतिक छटा, जानवर और पक्षियों का झुंड घूमते रहता है. साथ ही दूर-दूर तक झील का आनंद लेने के लिए यहां वोटिंग की भी सुविधा उपलब्ध है. यही नहीं, अगर आप झील के किनारे से सूर्योदय और सूर्यास्त का आनंद लेना चाहते हैं, तो जंगल में प्रकृति की गोद में समय गुजार भी सकते हैं. इसके लिए यहां एक ईको हट को भी बनाया गया है. लेकिन वर्ष 2020 में कोरोना बंदी के बाद इसे दोबारा शुरू नहीं किया गया है. इससे प्रकृति प्रेमियों में निराशा है.

    Tags: Bihar News, Champaran news

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