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OMG! मटन से भी महंगा बिकता है 'देहाती मुर्गा', पटना से लेकर नेपाल तक डिमांड, जानें खासियत

West Champaran News:पश्चिम चंपारण में खास तरह का देसी मुर्गा मिलता है. इस मुर्गे की कीमत 700 से 800 रुपए प्रति किलोग्रा ...अधिक पढ़ें

रिपोर्ट: अशीष कुमार

पश्चिम चंपारण. मुर्गा का नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है, लेकिन बात हो देसी मुर्गे की तो क्या कहने? जगहों के अनुसार देसी मुर्गे के प्रकार और खासियत में अलग होते हैं. ऐसी ही खासियत वाला देसी मुर्गा चंपारण में मिलता है. चंपारण जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में खास प्रकार के देसी मुर्गे पाए जाते हैं जिनका रंग अन्य देसी मुर्गे या मुर्गियों से अलग बेहद चमकीला होता है. जबकि कीमत मटन से भी अधिक होती है. सबसे बड़ी बात ये है कि इसे देहाती मुर्गे के नाम से भी जाना जाता है जिसकी फार्मिंग सिर्फ पूर्वी और पश्चिमी चंपारण के ग्रामीण इलाकों में ही बड़े पैमाने पर होती है. इन खास देहाती मुर्गों का वजन अधिकतम पौने 2 किलो तक होता है. जबकि मुर्गियां सवा से डेढ़ किलोग्राम तक की होती हैं.

पश्चिम चंपारण के मझौलिया प्रखंड के अंतर्गत आने वाले बखरिया गांव के निवासी और देहाती मुर्गों की फार्मिंग करने वाले सुरेश पासवान बताते हैं कि आमतौर पर मुर्गों की साधारण प्रजाति की कीमत 100 से 160 रुपये प्रति किलोग्राम होती है, जो विशेष दिनों में बढ़कर 200 से 220 रुपये प्रति किलोग्राम हो जाती है. इसके विपरित बात जहां तक इस मुर्गों की है तो उसकी कीमत 350 से 400 रुपये प्रति किलोग्राम होती है. जबकि चंपारण के ग्रामीण क्षेत्रों में पाए जाने वाले इस खास देसी मुर्गे की कीमत मटन से भी अधिक है. जहां एक तरफ मटन की कीमत 550 रुपये प्रति किलोग्राम है, तो वहीं दूसरी तरफ चंपारण के इस खास देसी मुर्गे की कीमत 700 से 800 रुपए प्रति किलोग्राम है. खास बात ये है कि ऐसे विशेष प्रजाति के मुर्गे की बिक्री काट कर नहीं होती है, इन्हे जिंदा बेचा जाताहै.

पटना, रक्सौल और नेपाल में खास डिमांड
पोल्ट्री फार्म के मालिक सुरेश पासवान का कहना है कि वैसे तो देश के कई राज्यों में देसी मुर्गे पाए जाते हैं, लेकिन चंपारण के ग्रामीण इलाकों में पाए जाने वाले इन देहाती देसी मुर्गों की बात ही कुछ और है. दरअसल इन देसी मुर्गों में एक खास तरह हो चमक होती है. साथ ही साथ इनका स्वाद भी अन्य देसी मुर्गों से काफी अलग होता है, जिसके दीवाने चम्पारण सहित राजधानी पटना ,रक्सौल और नेपाल तक हैं. सुरेश का कहना है कि पटना के कंकड़बाग, नरकटियागंज, बगहा, रक्सौल और नेपाल से बड़े पैमाने पर लोग उनके यहां सिर्फ इस खास देहाती मुर्गे को ये कहते हुए खरीदने आते हैं कि देसी मुर्गे तो बहुत खाए हैं, लेकिन यहां मिलने वाले इस खास देहाती मुर्गे का स्वाद इतना लाजवाब है कि इसके सामने मटन भी फेल है.

Tags: Bihar News, Champaran news, Chicken

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