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'चनपटिया मॉडल' का कमाल, 100 लोगों के स्टार्टअप का टर्नओवर 10 करोड़ पहुंचा, 600 को मिला रोजगार

बिहार का चनपटिया स्टार्टअप का टर्नओवर 10 करोड़ पहुंच चुका है.

बिहार का चनपटिया स्टार्टअप का टर्नओवर 10 करोड़ पहुंच चुका है.

Chanpatia Startup Model: बिहार के बाहर बड़ी संख्या में कुशल श्रमिक विभिन्न छोटी-बड़ी फैक्ट्रियों में काम करते हैं. ये श ...अधिक पढ़ें

पटना. वर्ष 2020 में देश में जब पहली बार कोरोना ने दस्तक दी और देखते ही देखते सम्पूर्ण भारत में इसने तबाही मचा दी. इस महामारी में कई लोगों की जान चली गई थी. हजारों लाखों ने अपने रोजगार खोए थे. कई लोगों का बिजनेस बर्बाद हो गया और बड़ी संख्या में पलायन हुआ. इसका गहरा असर बिहार पर भी पड़ा था. लेकिन, कहते है न कि तबाही के बाद नये निर्माण भी होते हैं, इसी की बानगी बिहार का चनपटिया विकास मॉडल है. इस अनूठे चनपटिया मॉडल की चर्चा न केवल बिहार बल्कि देश में भर में हो रही है.

दरअसल बिहार के बाहर बड़ी संख्या में कुशल श्रमिक रहते हैं जो विभिन्न छोटी-बड़ी फैक्ट्रियों में काम करते हैं और अपने हुनर से इन फैक्ट्रियों के उत्पादन को विस्तार देते हैं. लेकिन जब मार्च 2020 में लॉकडाउन लगने की शुरुआत हुई और फैक्ट्रियों ने कर्मियों की छंटनी शुरू कर दी तो बिहार के भी कुशल श्रमिक बड़ी संख्या में निकाले गए. इनमें चंपारण के चनपटिया के लोग भी शामिल थे.

जब यहां के ट्रेंड श्रमिक अपने रोज़गार को गंवा कर पहुंचे थे तो उनके सामने कोई रास्ता नहीं था. लेकिन, बाहर से आए यहां के लोगों ने हिम्मत नहीं हारी और स्थानीय प्रशासन की मदद से चनपटिया में ही में स्टार्टअप जोन स्थापित किया. अब महज चंद महीनों में ही इस स्टार्टअप के विकास का सफर पर इतना आगे निकल चुका है कि आज चनपटिया मॉडल बिहार और देश में चर्चा का विषय बन लोगों के आकर्षण का केंद्र बन चुका है.

बिहार का चनपटिया मॉडल सफलता के नए मानदंड स्थापित करता जा रहा है. देखते ही देखते एक साल में ही लगभग 10 करोड़ से अधिक का टर्न ओवर छू चुका है और लगातार इसमें बढ़ोतरी हो रही है. 28 जून 2020 को शुरू हुए इस स्टार्टअप जोन में तब लगभग 100 प्रवासियों ने काम की शुरुआत की थी. आज इसमें न केवल 600 से ज्यादा श्रमिक काम करते हैं बल्कि कई और लोगों को रोजगार देने की तैयारी भी है.

अपनी हिम्मत और हुनर के साथ-साथ स्थानीय जिला प्रशासन की मदद से इन हुनरमंद कामगारों ने चनपटिया स्टार्टअप जोन में ट्रैक सूट, शर्ट, जींस, साड़ी, लहंगा, जैके, चुनरी, टी-शर्ट, शाल, जूता व सैनिटरी पैड आदि का निर्माण कर रहे हैं, जिसकी मांग न सिर्फ बिहार बल्कि देश और विदेशों में भी है. इस स्टार्टअप जोन में काम करने वाले कई श्रमिक अब मालिक बन गए हैं.

सूरत के एक कपड़ा मिल में नौकरी करने वाली अर्चना कुशवाहा लॉकडाउन में यहां लौटी थीं. आज वह यहां साड़ी व लहंगा बनाने की फैक्ट्री की मालिक हैं और कई लोगों को रोजगार भी दे रही हैं. अर्चना कुशवाहा कहती हैं कि अभी जब कोरोना का मामला फिर से बढ़ रहा है ऐसे में जो लोग भी लौटेंगे उनके हुनर के मुताबिक उन्हें भी काम मिलेगा.

News18 Hindi

चनपटिया स्टार्टअप की चर्चा सुनकर सीएम नीतीश कुमार भी जायजा लेने पहुंचे थे. (फाइल फोटो)

चनपटिया मॉडल की चर्चा सुन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी यहां का दौरा कर चुके हैं. वे भी यहां आकार इस मॉडल की चर्चा सुन हैरान रह गए थे और इस मॉडल जैसा बिहार के दूसरे जिले में भी शुरुआत हो इसके निर्देश अधिकारियों को दिए थे. साल 2020 के मध्य में जब कोरोना की मार सभी झेल रहे थे तब इस आपदा को अवसर में बदलने की लौ चनपटिया स्टार्टअप जोन के रूप में जलाई गई थी.

चनपटिया विकास मॉडल के विकास में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका जिलाधिकारी कुंदन कुमार की थी जिनकी मदद से चनपटिया मॉडल विस्तार पाता जा रहा है और आज चहुंओर इसकी चर्चा है. निश्चित रूप से रोजगार और उद्यम का यह मॉडल सफलता के नए शिखर छू रहा है और आनेवाले समय में चनपटिया रोजगार सृजन का बड़ा हब बनेगा. इस काम में जिला प्रशासन की ओर से उद्यमियों को हर संभव मदद की जा रही है.

Tags: Champaran news, Nitish Government, Startup Idea

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