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पश्चिमी चंपारण: बापू की कर्मभूमि रही इस धरती को प्रकृति की सुंदरता के कारण कहा जाता है 'बिहार का स्वर्ग'

पश्चिमी चंपारण: बापू की कर्मभूमि रही इस धरती को प्रकृति की सुंदरता के कारण कहा जाता है 'बिहार का स्वर्ग'

बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले का मनोरम दृश्य

बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले का मनोरम दृश्य

बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले का जहां ऐतिहासिक महत्व है तो प्रकृति की खूबसूरती समेटे इस जिले को देखने हर साल हजारों की संख्या में सैलानी जाते हैं.

पश्चिमी चंपारण. पश्चिमी चंपारण बिहार के तिरहुत प्रमंडल अंतर्गत भोजपुरी भाषी जिला है. ये जिला जल एवं वनसंपदा से पूर्ण है. चंपारण का नाम चंपा+अरण्य से बना है जिसका अर्थ होता है- चम्‍पा के पेड़ों से आच्‍छादित जंगल. बेतिया जिले का मुख्यालय शहर है. बिहार का यह जिला अपनी भौगोलिक विशेषताओं और इतिहास के लिए विशिष्ट स्थान रखता है. महात्मा गांधी ने यहीं से अंग्रेजों के खिलाफ नील आंदोलन से सत्याग्रह की मशाल जलायी थी।

बापू की कर्मभूमि

ऐतिहासिक दृष्टिकोण से पश्चिमी चंपारण एवं पूर्वी चंपारण एक हैं. चंपारण का बाल्मिकीनगर देवी सीता की शरणस्थली होने से अति पवित्र है वहीं दूसरी ओर गांधीजी का प्रथम सत्याग्रह भारतीय स्वतंत्रता के इतिहास का अमूल्य पन्ना है. राजा जनक के समय यह मिथिला प्रदेश का अंग था जो बाद में छठी सदी ईसापूर्व में वज्जि के साम्राज्य का हिस्सा बन गया. उत्तर प्रदेश और नेपाल की सीमा से लगा यह क्षेत्र भारत के स्वाधीनता संग्राम के दौरान काफी सक्रिय रहा है. स्वतंत्रता आन्दोलन के समय चंपारण के ही एक रैयत राजकुमार शुक्ल के आमंत्रण पर महात्मा गांधी अप्रैल 1917 में मोतिहारी आए और नील की खेती से त्रस्त किसानों को उनका अधिकार दिलायाय.

1966 में हुआ विभाजन

अंग्रेजों के समय 1966में चंपारण को स्वतंत्र इकाई बनाया था. प्रशासनिक सुविधा के लिए 1972 में इसका विभाजन कर पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण बना दिए गया. पश्चिमी चम्‍पारण के उत्तर में नेपाल तथा दक्षिण में गोपालगंज जिला स्थित है. इसके पूर्व में पूर्वी चंपारण है जबकि पश्चिम में इसकी सीमा उत्तर प्रदेश के पडरौना तथा देवरिया जिला से लगती है.

पश्चिमी चंपारण जिला
पश्चिमी चंपारण जिला का एक मनोमर दृश्य


धरातलीय संरचना

हिमालय की तलहटी में बसे पश्चिमी चम्‍पारण की धरातलीय बनावट में कई अंतर स्पष्ट दिखाई देते हैं. यह सोमेश्वर श्रेणी से सटा तराई क्षेत्र है जो थारू जनजाति का निवास स्थल है. उत्तरी भाग में हिमालय से उतरने वाली कई छोटी नदियाँ सिकरहना में मिलती है. दक्षिणी भाग अपेक्षाकृत ऊँचा है लेकिन यहाँ बड़े-बड़े चौर भी मिलते है. सदावाही गंडक, सिकरहना एवं मसान के अलावे पंचानद, मनोर, भापसा, कपन आदि यहाँ की बरसाती नदियां हैं.

880 वर्ग किलोमीटर में फैला है बिहार का एकमात्र टाईगर रिजर्व

बिहार के कुल वन्य क्षेत्र का सबसे बड़ा हिस्सा पश्चिम चंपारण में है. बिहार का एकमात्र बाघ अभयारण्य 880 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैले बाल्मिकीनगर राष्ट्रीय उद्यान में स्थित है और नेपाल के चितवन नेशनल पार्क से सटा है. बेतिया से 80 किलोमीटर तथा पटना से 295 किलोमीटर दूर स्थित इस वन्य जीव अभयारण्य में संरक्षित बाघ के अलावे काला हिरण, साँभर, चीतल, भालू, भेड़िया, तेंदुआ, नीलगाय, लकड़बग्घा, जंगली बिल्ली, अजगर जैसे वन्य जीव पाए जाते हैं. राजकीय चितवन नेशनल पार्क से कभी कभी एकसिंगी गैंडा और जंगली भैंसा भी आ जाते हैं. इस वनक्षेत्र में साल, सीसम, सेमल, सागवान, जामुन, महुआ, तून, खैर, बेंत आदि महत्वपूर्ण लकड़ियाँ पाई जाती है.

पश्चिमी चंपारण जिला
पश्चिमी चंपारण जिला का बाल्मीकि टाइगर रिजर्व


बाल्मिकीनगर आश्रम और गंडक परियोजना

बाल्मिकीनगर राष्ट्रीय उद्यान के एक छोर पर महर्षि बाल्मिकी का वह आश्रम है जहां राम के त्यागे जाने के बाद देवी सीता ने आश्रय लिया था. सीता ने यहीं अपने 'लव' और 'कुश' दो पुत्रों को जन्म दिया था. महर्षि वाल्मिकी ने हिंदू महाकाव्य रामायण की रचना भी यहीं की थी. आश्रम के मनोरम परिवेश के पास ही गंडक नदी पर बनी बहुद्देशीय परियोजना है जहां १५ मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है और यहां से निकाली गयी नहरें चंपारण के अतिरिक्त उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्से में सिंचाई की जाती है.

भितहरवा आश्रम एवं रामपुरवा का अशोक स्तंभ

गौनहा प्रखंड के भितहरवा गांव के एक छोटे से घर में ठहरकर महात्मा गांधी ने चंपारण सत्याग्रह की शुरुआत की थी. उस घर को आज भितहरवा आश्रम कहा जाता है. स्वतंत्रता के मूल्यों का आदर करने वालों के लिए यह जगह तीर्थ समान है. आश्रम से कुछ ही दूरी पर रामपुरवा में सम्राट अशोक द्वारा बनवाए गए दो स्तंभ है जो शीर्षरहित हैं. इन स्तंभों के ऊपर बने सिंह वाले शीर्ष को कोलकाता संग्रहालय में तथा वृषभ (सांढ) शीर्ष को दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय में रखा गया है.

Tags: Bihar News

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