
बेतिया में पिता ने अपनी पुत्री को ही मार डाला.
West champaran News: आरोपी पिता जहांगीर आलम बेतिया जेल में सलाखों के पीछे पहुंच गया है. सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा होने के बाद पुलिस और निर्दोष साबित हुए लोगों ने राहत की सांस ली है.
बेतिया. बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में हॉरर किलिंग का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. एक पिता ने बाप-बेटी के रिश्ते को कलंकित करते हुए अपने विरोधियों को फंसाने के लिए अपनी ही बेटी की निर्मम हत्या कर दी. पुलिस अनुसंधान में जब इस हत्याकांड का चौंकाने वाला खुलासा हुआ तो पुलिस भी हैरान रह गई. मामला 2 जून 2021 को योगापट्टी थाना कांड संख्या 233/21 का है. इस संबंध में बेतिया पुलिस अधीक्षक उपेंद्रनाथ वर्मा ने बताया कि मामले का खुलासा करते हुए बच्ची के हत्यारोपी पिता जहांगीर आलम को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है. जहांगीर के घरवाले भी इस सनसनीखेज खुलासे के बाद से सन्न हैं. अब उन्हें भी कुछ समझ नहीं आ रहा है कि कोई कैसे दूसरों को फंसाने के लिए अपने ही जिगर के टुकड़े का खून कर सकता है.
दरअसल, पश्चिम चंपारण के योगापट्टी थाना क्षेत्र के बलुआ सरेह स्थित छवि लाल यादव के गन्ना लगे खेत से 1 जून को 6 वर्षीय बच्ची का शव बरामद किया गया था. इसकी पहचान योगापट्टी के रमपुरवा निवासी जहांगीर आलम की पुत्री के रूप में की गई थी. इसके बाद जहांगीर आलम ने अपने पाटीदारों पर पुत्री की हत्या का आरोप लगाते हुए 2 जून 2021 को योगापट्टी थाना कांड संख्या 233/21 दर्ज कराया. पुलिस ने मामले की गंभीरता से जांच शुरू की थी.
जांच के दौरान यह बात सामने आई कि घटना के एक दिन पहले शाम में जहांगीर आलम को अपनी पुत्री के साथ खेत की ओर जाते देखा गया था. इस पर हुए संदेह के आधार पर बेतिया पुलिस अधीक्षक उपेंद्र नाथ वर्मा द्वारा कांड के उद्भेदन के लिए बेतिया सदर एसडीपीओ मुकुल परिमल पांडेय के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन किया गया. टीम के द्वारा तकनीकी और मैनुअल तरीकों से जांच के बाद संदेह के आधार पर जहांगीर आलम को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ शुरू की गई. इसके बाद जो कहानी सामने आई उससे पुलिस पदाधिकारी भी हैरान रह गए.
जहांगीर आलम ने अपनी पुत्री की हत्या स्वयं करने की बात पुलिस के सामने स्वीकार करते हुए अपने स्वीकारोक्ति बयान में बताया है कि वह आर्थिक रूप से काफी परेशान चल रहा था. वह अपने पूर्वज की खतियानी जमीन बिक्री करने के लिए अपने गांव के रैफुल आलम से 8 लाख रुपया लिया था और 1 लाख रुपया रजिस्ट्री के बाद लेने का करार किया था. लेकिन, उसके बड़े भाई रुस्तम अली व अन्य पट्टीदारों ने उससे पहले ही उक्त जमीन को अपने लड़के निजाम मियां को रजिस्ट्री कर दिया, जिसके कारण अब जहांगीर जमीन रैफूल आलम को रजिस्ट्री नहीं कर सका और बाद में रुपया भी खर्च हो गया.
आरोपी जहांगीर ने बताया कि रुपये वापस करने के दबाव में वह मानसिक रूप से काफी परेशान रहने लगा और तरह-तरह की बातें मन में आने लगीं. एक समय उसे ऐसा लगा कि जहर खाकर आत्महत्या कर ले, लेकिन ऐसा नहीं कर सका. बाद में उसके मन में आया कि अपने पांच बच्चों में से छोटी पुत्री की हत्या कर मर्डर के केस में अपने बड़े भाइयों और उनके परिवार के लोगों को फंसा दे और फिर बाद में जमीन वापस लेकर केस को रफा-दफा कर दे.
यही सोचकर जहांगीर ने घटना वाले दिन अपनी छोटी पुत्री को बहला-फुसलाकर बलुआ सरेह ले गया और उसकी गला दबाकर हत्या कर वापस घर लौट आया. रात में खाना खाने के वक्त पत्नी रेहाना खातून बेटी की खोजबीन करने लगी. इसके बाद जहांगीर भी पत्नी और आसपास के ग्रामीणों के साथ उसे खोजते हुए बलुआ सरेह स्थित गन्ना की खेत तक पहुंचा. शव मिलने के बाद जहांगीर ने फोन कर योगापट्टी थाना पुलिस को पुत्री की हत्या होने की सूचना दी. इसके बाद अपने भाइयों और उनके परिवार के लोगों पर सोची समझी साजिश के तहत प्राथमिकी दर्ज करवा दी.