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Navratra 2022: देवताओं ने अंशदान कर स्थापित की मां सर्वेश्वरी की प्रतिमा, विश्व में एकमात्र है यह मंदिर

पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया राज परिक्षेत्र में आज भी सर्वेश्वरी देवी की आराधना की जाती है. विश्व में यह इकलौता स्थान ह ...अधिक पढ़ें

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आशीष कुमार

बेतिया. बात सतयुग की है. देवासुर संग्राम में पराजित देवगण ऋषि वेश में वेत्रवती जंगल में तपस्या कर रहे थे. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां भगवती उन्हीं ऋषियों में से एक ऋषि अभ्भृण की पुत्री के रूप में मरकतमणि शंख, चक्र, धनुष व वाण लेकर मृडाल पर प्रकट हुई और दुर्गम नामक दानव सेनानायक समेत अन्य राक्षसों का संहार कर अंर्तध्यान हो गई. इसके बाद लोक कल्याण के लिए समस्त देवताओं ने अपने-अपने अंश से वहां एक वैसी ही देवी की प्रतिमा को स्थापित की, जिसका नाम सर्वेश्वरी देवी पड़ा.

बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया राज परिक्षेत्र में आज भी सर्वेश्वरी देवी की आराधना की जाती है. विश्व में यह इकलौता स्थान है जहां देवी के सर्वेश्वरी रूप की पूजा की जाती है. यह कोई दंतकथा नहीं, बल्कि पौराणिक ग्रंथों में भी इसका उल्लेख है.

चेरी, सुगाव और बेतिया राजवंश करता रहा मंदिर की देखभाल

यहां के पुजारी राकेश झा बताते हैं कि लगभग 50 एकड़ भूखंड के बीच स्थापित बेतिया का यह दुर्गा बाग मंदिर मुख्य रूप से इसलिए प्रसिद्ध है, क्योंकि यहां मांगी गई सभी मुरादें पूरी होती हैं. यहां आने वाले भक्तों का विश्वास है कि माता सुख, संपति और सौभाग्यदायिनी हैं. कालांतर में चेरी वंश, सुगाव वंश और बेतिया राजवंश के द्वारा माता के इस शक्तिपीठ की देखभाल की गई.

मंदिर परिक्षेत्र में तालाब, बाग, अतिथिशाला और कूप सहित अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित हैं. चेरी वंश के संरक्षक राजाओं की सूची का दो शिलालेख आज भी बेतिया राज में जमा है.

Tags: Bihar News in hindi, Champaran news, Durga Puja festival, Navratri festival

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