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कानून के रक्षक ही उड़ा रहे हैं उसका मजाक

ETV Bihar/Jharkhand
Updated: August 1, 2017, 12:54 PM IST

कहते हैं न्यायालय न्याय का मंदिर होता है और यहां सभी को न्याय मिलता है लेकिन एक हकीकत यह भी है कि न्याय मिलने में पीड़ितों को लम्बे समय तक इन्तजार भी करना पड़ता है.लेकिन इसके लिए सिर्फ न्यायालय की व्यवस्था नहीं बल्कि वह लोग भी जिम्मेदार हैं जिन्हें कानून का रक्षक कहा जाता है.

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कहते हैं न्यायालय न्याय का मंदिर होता है और यहां सभी को न्याय मिलता है लेकिन एक हकीकत यह भी है कि न्याय मिलने में पीड़ितों को लम्बे समय तक इन्तजार भी करना पड़ता है.लेकिन इसके लिए सिर्फ न्यायालय की व्यवस्था नहीं बल्कि वह लोग भी जिम्मेदार हैं जिन्हें कानून का रक्षक कहा जाता है.

कानून की रक्षा करने वाले ही कानून का सम्मान नहीं कर रहे हैं. बेतिया व्यवहार न्यायालय में पिछले एक वर्ष मे लगभग सौ से अधिक ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमें कानून की रक्षा करने वाले पुलिस पदाधिकारी या फिर सरकारी गवाह न्यायालय में गवाही देने उपस्थित नहीं हुआ. जिसके कारण ना सिर्फ लोग संबंधित मामले में न्याय की बाट जोह रहे हैं बल्कि लोगों को न्याय के लिए लम्बा इंतजार करना पड़ रहा है.

सिर्फ पुलिस पदाधिकारी हीं नहीं बल्कि वह सारे लोग इसमे भागीदार हैं जो सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं. फिर चाहें वह पुलिस पदाधिकारी हो या फिर चिकित्सक. किसी को इसकी चिंता नहीं है और कोई भी न्यायालय का सम्मान नहीं कर रहा है. आलम यह है कि बार-बार कोर्ट द्वारा नोटिस देने व सम्मन देने के बाद भी पुलिस पदाधिकारी व चिकीत्सक गवाही देने के लिए कोर्ट मे नहीं पहुंच रहे हैं.

सबसे हैरत की बात तो यह है कि पिछले एक वर्ष मे सिर्फ बेतिया कोर्ट से हीं ऐसे सौ से अधिक मामले सामने आए जंहा कोर्ट ने गवाही के अनुपस्थि रहने वाले पुलिस पदाधिकारीयों व चिकीत्सकों का या तो वेतन रोका या फिर स्पष्टीकरण मांगा. पर पुलिस पदाधिकारी बगैर इसकी परवाह किये अपने में मगन हैं.

पिछले 26 जुलाई को भी पांच दरोगा के वेतन पर कोर्ट ने तबतक रोक लगाई जबतक वह गवाही के लिए उपस्थित नहीं हो जाते. ऐसा नहीं है कि ऐसे दरोगा यहां मौजुद नहीं है कई तो इसी जिले में और कई थाने मे बतौर थानाध्यक्ष तैनात है चिकित्सक भी यहीं पर पदस्थापित हैं. बाजवुद इसके कोर्ट व अपने केस को लेकर यह कभी गंभीर नहीं हुए हैं जिसका खामियाजा उन भोले भाले लोगों को उठानी पड़ रही है जो न्याय की आस लगाए बैठे हैं.

बहरहाल मामला चाहे कितना भी गंभीर क्यों ना हो पुलिस व चिकीत्सकों की लापरवाही का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ा रहा है. ऐसे मे जरूरी है कि पुलिस विभाग व स्वास्थ्य विभाग सहित तमाम वैसे विभाग अपने लापरवाह पदाधिकारीयों पर नकेल कसे ताकि वह न्यायपालिका का सम्मान कर सकें.लिहाजा पुलिस पदाधिकारीयों की इस लापरवाही का खामियाजा विभाग को ही उठाना पड़ता है ताकि लोग पुलिस के प्रति अपनी धारणा बदल सकें और उन्हे ससमय न्याय मिल सके.

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First published: August 1, 2017, 12:54 PM IST
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