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कलयुग की यशोदा: हरियाणा में लावारिस मिले बच्चे को महिला ने 14 साल पाला, याद्दाश्त आई तो घर लौटा

बिहार के बगहा से 14 साल बाद एक युवक अपने घर हरियाणा लौटा

बिहार के बगहा से 14 साल बाद एक युवक अपने घर हरियाणा लौटा

पेशे से ट्रक ड्राइवर राम स्नेही गोंड की शादी 18 वर्ष पहले कुंती से हुई थी. जिस समय शादी हुई थी उस समय रामसनेही गोंड हरि ...अधिक पढ़ें

बगहा. द्वापर युग की तरह कलयुग में भी एक ऐसी यशोदा मां है जिसने सड़क पर आश्रय ढूंढते एक बच्चे को बचपन से लेकर युवा अवस्था तक न केवल पाला और पोषण किया बल्कि सभी जरूरतों को पूरा करते हुए उसकी शादी भी कराई लेकिन 3 माह पहले इस मां को छोड़कर उनके जिगर का टुकड़ा सैकड़ों किलोमीटर दूर उस मां के पास आ गया जिस मां ने उसे पैदा किया था. 3 महीने बीत जाने के बाद भी इस मां के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं.

यह कहानी बिहार के पश्चिम चंपारण जिला के धनहा थाना स्थित दौनाहां गांव की है. इस गांव के रहने वाले रामसनेही गोंड की शादी लगभग 18 वर्ष पहले कुंती से हुई थी. जिस समय शादी हुई थी उस समय रामसनेही गोंड हरियाणा के सोनीपत में ट्रक चलाने का काम करते थे. शादी के कुछ दिन बाद रामसनेही अपने पत्नी कुंती को भी अपने साथ सोनीपत लेते गए. लगभग 14 वर्ष पहले सड़क पर एक बच्चा घूमते हुए दिखाई दिया जिसे रामसनेही अपने साथ लाए और कुंती के पास रख दिए.

पति चलाता था ट्रक

बच्चे ने अपना नाम सिर्फ अजय बताया. ना तो उसने अपना पता बताया और ना ही अपने घर वालों के नाम ही, जिसके बाद कुंती ने इस बच्चे को अपना लिया और लालन-पालन करने लगी. पति पूरे दिन ट्रक चलाते थे जिसकी वजह से कुंती को अकेलापन सता रहा था. अजय के आने के साथ ही कुंती के जीवन का अकेलापन दूर होने लगा तो वही अजय को ममता की छांव मिल गई.

अजय के घर आने के 2 साल बाद कुंती को हुए बच्चे

कुंती के पास अजय के आने के लगभग दो साल बाद कुंती के तीन बच्चे हुए. लोग बताते हैं कि कुंती के मां बनने के बाद भी अजय से थोड़ा भी प्रेम कम नहीं हुआ. कुंती अजय को पुत्र के समान ही प्यार और दुलार करती थी. आज भी अजय को वो अपने बच्चों से कम स्नेह नहीं देती है.

3 माह पूर्व 10 दिन के लिए गायब हो गया था अजय

कुंती बताती हैं कि तीन वहां पूर्व अजय अचानक अपने परिवार और बच्चों को छोड़कर कहीं चला गया. सबको अजय की चिंता सताने लगी लेकिन दो-तीन दिन बाद अजय का फोन आया. उसने बताया कि मैं ठीक हूं अपने मां बाप को ढूंढने के लिए आया हूं. अजय ने बताया था कि अचानक ही सोये-सोये उसकी याद्दाश्त लौट आई थी. उसके गांव का नाम थाना का नाम और मां पिता का नाम याद आने लगा. इस घटना के कुछ ही दिनों बाद अजय कुंती के पास लौटा और फिर अपनी पत्नी और बच्चे को लेकर नवादा चला गया.

पुत्र की अभी भी सताती है यादें

इधर कुंती को अजय की याद अभी सताती है. हालांकि रोज फोन पर एक बार बात हो जाती है. इसके बावजूद अजय को देखने के लिए आंखें बेचैन है. फिलहाल कुंती के यहां शादी है. उसमें अजय आने के लिए बोला है जिसका बेसब्री से कुंती को इंतजार है.

Tags: Bihar News

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