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झोलाछाप डॉक्टर की वजह से गई जच्चा-बच्चा की जान, तीन गिरफ्तार

Munna Kumar | ETV Bihar/Jharkhand
Updated: November 4, 2017, 10:07 AM IST

बगहा में सरकारी सिस्टम की उदासीनता ने जच्चा-बच्चा दोनों की जान ले ली. रेफर मरीज को बड़े अस्पताल ले जाने के बजाय आशा कार्यकर्ता ने उसे झोलाछाप डॉक्टर के पास पहुंचा दिया.

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बगहा में सरकारी सिस्टम की उदासीनता ने जच्चा-बच्चा दोनों की जान ले ली. रेफर मरीज को बड़े अस्पताल ले जाने के बजाय आशा कार्यकर्ता ने उसे झोलाछाप डॉक्टर के पास पहुंचा दिया. सही इलाज नहीं होने की वजह से जच्चा और बच्चा दोनों की मौत हो गई.

मौत के कारण हुए बवाल के बाद पुलिस ने क्वैक डॉक्टर, कम्पाउंडर के साथ ही आशा कार्यकर्ता को भी गिरफ्तार कर लिया है.

सरकारी अस्पतालों की बदहाल सिस्टम ने बगहा में एक बार फिर दो जान एक साथ ले ली. अनुमंडलीय अस्पताल में प्रसुता को बेहतर इलाज के लिए बेतिया रेफर किया गया. मगर आशा कार्यकर्ता ने उसे शहर के झोलाछाप डॉक्टर के क्लिनिक पहुंचा दिया.

ऑपरेशन के दौरान जब महिला की स्थिति खराब हुई तो उसे फिर अनुमंडलीय अस्पताल में भर्ती करा दिया गया. सरकारी ऑक्सीजन महिला और नवजात को मिलता तबतक सिस्टम की खामी ने दोनों से जिन्दगी छीन ली. मौत की खबर के बाद प्राइवेट क्लिनिक के विरुद्ध लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और हंगामा शुरु हो गया.

हालांकि एसपी के निर्देश के बाद दोषी डॉक्टर राजीव कुमार, कम्पांडर के साथ ही दलाल का काम रही आशा कार्यकर्ता को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. आरोप है कि अस्पताल से रेफर मरीजों को झोलाछाप डाक्टरों के पास बिचौलियां बनकर आशा कार्यकर्ता पहुंचा रही है.

सुदुर गांवों से प्रसूता को सरकारी अस्पतालों तक पहुंचाकर सुरक्षित प्रसव कराने की जिम्मेवारी आशा कार्यकर्ताओं की है. मगर जब सरकारी सिस्टम ही धरातल पर कमीशनखोरी की भेंट चढ़ जाए जो मरीजों के सांस पर मौत का पहरा स्वाभाविक है. रेफर के नाम पर मौत के मुंह में धकेलने वाले सिस्टम में जरुरत है जान डालने की.

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First published: November 4, 2017, 10:07 AM IST
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