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पश्चिमी चंपारण लोकसभा सीट: BJP की दमदार सीट पर RLSP दे पाएगी चुनौती?

पश्चिमी चंपारण लोकसभा सीट: BJP की दमदार सीट पर RLSP दे पाएगी चुनौती?

चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी के प्रत्याशी संजय जायसवाल

चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी के प्रत्याशी संजय जायसवाल

इस बार बीजेपी की तरफ से डॉ संजय जायसवाल फिर से चुनावी मैदान में हैं. महागठबंधन के खाते से ये सीट रालोसपा को मिली है. यहां से डॉ ब्रजेश कुमार कुशवाहा रालोसपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं.

    पश्चिमी चंपारण बीजेपी के लिए जीत के लिहाज से सुरक्षित सीट रही है. पिछले दो बार से बीजेपी प्रत्याशी डॉ संजय जायसवाल जीतते रहे हैं. 2009 और 2014 के दोनों चुनाव में उन्होंने फिल्म निर्देशक प्रकाश झा को हराया है. 2009 में पहली बार प्रकाश झा के इस सीट से उम्मीदवार बनने पर पूरे देश की नजर इस सीट पर पड़ी थी. लेकिन बॉलीवुड की तमाम चकाचौंध के बावजूद प्रकाश झा इस सीट पर बीजेपी को शिकस्त नहीं दे पाए.

    2009 में वो एलजेपी के टिकट से चुनाव लड़कर डॉ संजय जायसवाल से हारे. उसके बाद 2014 के चुनाव में जेडीयू के टिकट से लड़ने के बावजूद उन्हें बड़े अंतर से हार मिली. तीसरी बार 2019 में उन्होंने चुनाव लड़ने से ही मना कर दिया. इस बार बीजेपी की तरफ से डॉ संजय जायसवाल फिर से चुनावी मैदान में हैं. महागठबंधन के खाते से ये सीट रालोसपा को मिली है. यहां से डॉ ब्रजेश कुमार कुशवाहा रालोसपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं.

    पश्चिमी चंपारण का राजनीतिक इतिहास

    पश्चिमी चंपारण नेपाल से सटा बिहार का इलाका है. तिरहुत प्रमंडल के अंतर्गत आने वाले ये इलाका अंग्रेजों के दौर में आंदोलन की धरती रहा है. महात्मा गांधी ने यहीं से सत्याग्रह आंदोलन की शुरुआत की थी. आजादी के बाद इमरजेंसी के काल तक ये कांग्रेस का गढ़ रहा. 1977 में पहली बार जनता पार्टी के फजलू रहमान ने कांग्रेस के प्रभुत्व को खंडित किया. उसके बाद यहां से 5 बार बीजेपी, दो बार जनता दल, एक-एक बार सीपीआई और आरजेडी का कब्जा रहा. 1962 से लेकर 71 के बीच तीन बार कांग्रेस के कमल नाथ तिवारी कांग्रेस से सांसद रहे. 77 में फजलू रहमान सांसद बने.



    1980 में कांग्रेस से केदार पांडेय जीतकर संसद पहुंचे. 1984 में केदार पांडेय के निधन के बाद हुए उपचुनाव में सीपीआई के पीतांबर सिंह ने जीत हासिल की. 84 के उपचुनाव में केदार पांडेय के बेटे मनोज पांडेय को हार का मुंह देखना पड़ा था. इसके एक साल बाद हुए चुनाव में पीतांबर सिंह को हराकर मनोज पांडेय सांसद बने. 1989 में जनता दल के धर्मेश प्रसाद वर्मा ने कांग्रेस के मनोज पांडेय को हराया. 1991 में जनता दल के फैयाजुल आलम ने बीजेपी के डॉ मदन मोहन जायसवाल को शिकस्त दी.

    हालांकि इसके बाद बीजेपी के डॉ मदन मोहन जायसवाल लगातार तीन बार 96, 98 और 99 में जीत हासिल की. 2004 के चुनाव में आरजेडी के रघुनाथ झा ने बीजेपी के डॉ मदन मोहन जायसवाल के जीत के सिलसिले को रोक दिया. इसके बाद मदन मोहन जायसवाल का निधन हो गया. इस सीट पर उनके बेटे डॉ संजय जायसवाल ने 2009 और 2014 के चुनाव में जीत हासिल की.



    क्या डॉ संजय जायसवाल जीत की हैट्रिक लगाएंगे?

    पश्चिमी चंपारण लोकसभा क्षेत्र में 6 विधानसभा सीटें आती हैं. इसमें 3 पश्चिमी चंपारण और 3 पूर्वी चंपारण की सीटें हैं. पश्चिमी चंपारण के चनपटिया, नौतन और बेतिया, वहीं पूर्वी चंपारण के सुगौली, रक्सौल और नरकटिया विधानसभा क्षेत्र इसमें शामिल हैं. 2014 के चुनाव में पूर्वी चंपारण के 3 विधानसभा क्षेत्रों से डॉ संजय जायसवाल को अच्छे खासे वोट मिले थे. जबकि पश्चिमी चंपारण के बेतिया और चनपटिया से उन्हें कम वोट हासिल हुए थे. इस लोकसभा क्षेत्र में वैश्य, यादव, ब्राह्मण, मुस्लिम और कोइरी-कुर्मी के वोट अधिक है.

    डॉ संजय जायसवाल को वैश्य वोटर्स के अलावा सवर्ण मतदाताओं पर भरोसा है. वहीं महागठबंधन की ओर से रालोसपा के उम्मीदवार डॉ ब्रजेश कुशवाहा कोइरी-कुर्मी के साथ यादव और पिछड़े वोट बैंक का आसरा है. इस सीट से महागठबंधन की ओर से टिकट नहीं मिलने पर बाहुबली राजन तिवारी ने निर्दलीय लड़ने का ऐलान किया था. लेकिन आखिर में वो बीजेपी में शामिल हो गए. यहां मुख्य मुकाबला डॉ संजय जायसवाल और डॉ ब्रजेश कुशवाहा के बीच है.

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    Tags: Bihar Lok Sabha Constituencies Profile, Bihar Lok Sabha Elections 2019, BJP, Central Bihar Lok Sabha Elections 2019, Paschim Champaran S04p02

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