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नहीं मिली मदद तो ठेले को ही बना लिया एम्बुलेंस, तय किया 5 किमी का सफर

ETV Bihar/Jharkhand
Updated: November 9, 2017, 10:33 AM IST

बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल है. सड़क पर सिस्टम शर्मसार होता रहा और सरकारी मुलाजिम तमाशा देखते रहे. ये घटना बगहा की है जहां गरीबी से मारा एक बीमार आदमी अस्पताल पहुंचता है और उसे इलाज किए बिना बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता.

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बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल है. सड़क पर सिस्टम शर्मसार होता रहा और सरकारी मुलाजिम तमाशा देखते रहे. ये घटना बगहा की है जहां गरीबी से मारा एक बीमार आदमी अस्पताल पहुंचता है और उसे इलाज किए बिना बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता.

न तो उसे प्राथमिक उपचार के बाद रेफर किया जाता है और न ही उसे अस्पताल की ओर से एम्बुलेंस दी जाती है. प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र से अनुमंडलीय अस्पताल तक पांच किलोमीटर का सफर मरीज अपने परिजनों के साथ ठेले पर करता है.

जिन्दगी और मौत के बीच झुल रहे इस गरीब के लिए शायद ठेला ही एम्बुलेंस है. गरीबी के कारण परिवार किसी साधन का बंदोबस्त नहीं कर पाया और सरकारी सिस्टम ने भी मुंह फेर लिया.

उम्मीदों के साथ ठेले की सवारी कर उसे आनन फानन में बगहा के पटखौली के रामवृक्ष गोड़ को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बगहा लाया गया. हारत की बात ये रही कि पांच किलोमीटर के सफर के दौरान किसी सरकारी मुलाजिम की नजर उसपर नहीं पड़ी. जिस पीएचसी में उसे इलाज किए बगैर बाहर का रास्ता दिखाया दिया गया उसके चिकित्सकों के चेहरे पर मायुसी की झलक भी नहीं थी.

मीडिया की नजरों में जब सिस्टम की हकीकत उजागर हुई तो जिला के सिविल सर्जन ने जांच कर कार्रवाई का आदेश जारी कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली. सवाल यह है कि आखिर कबतक यूं ही सूबे में सुशासन की हुकुमत में गरीब सड़कों पर ही जान गंवाने पर मजबुर होगें. जब सूबे का स्वास्थ्य महकमा खुद बीमार हो तो भला कैसे अस्पतालों में किसी का इलाज होगा.

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First published: November 9, 2017, 10:33 AM IST
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