Bihar Weather Alert: कई जिलों में वज्रपात का खतरा, सरकार की अपील- बारिश में घरों से बाहर न निकलें लोग
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Bihar Weather Alert: कई जिलों में वज्रपात का खतरा, सरकार की अपील- बारिश में घरों से बाहर न निकलें लोग
बिहार के कई जिलों में भारी बारिश के साथ आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी जारी.

दो दिनों में बिहार में 44 लोगों की वज्रपात (Thunderclap) के कारण मौत हो गई. यही वजह है कि मौसम विभाग ने लोगों से बेवजह घरों से बाहर न निकलने और सतर्क रहने की अपील की है.

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पटना. बिहार में आज भी कई जिलों के लिए बारिश व वज्रपात का अलर्ट (Thunderclap alert) है और मौसम विभाग (weather department) ने अपील की है कि जरूरत न हो तो घरों से न निकले. मौसम विज्ञान केंद्र पटना के निदेशक विवेक सिन्हा के अनुसार ये स्थिति अमूमन रविवार तक रहेगी. दरअसल राज्य में ऐसी परिस्थितियां बन रही हैं, जिसके अनुसार कई जिले वज्रपात से प्रभावित होंगे. मौसम विज्ञान केंद्र पटना (Meteorological Center Patna) ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में 48 घंटे तक मेघगर्जन के साथ बारिश और वज्रपात का अलर्ट जारी किया है. खास कर खगड़िया, बेगूसराय, भागलपुर, पूर्णिया, सहरसा, सुपौल, छपरा, भोजपुर, गोपालगंज, सीवान, चंपारण के क्षेत्र, मिथिलांचल के कुछ इलाके, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, शिवहर,सीतामढ़ी, भभुआ, रोहतास, औरंगाबाद, गया, जहानाबाद, अरवल, नवादा, शेखपुरा और वैशाली में भारी बारिश के साथ ही वज्रपात की आशंका जताई गई है. इसके साथ ही  कुछ खास चिन्हित क्षेत्र के लिए भी अलर्ट जारी  किया गया है जहां बिजली गिरने का अधिक खतरा है. इनमें पूर्वी चंपारण का आदापुर और घोड़ासहन शामिल है.

इसलिए होते हैं वज्रपात
दरअसल थंडरस्टोर्म (वज्रपात) के सेल एक जगह बनकर हवाओं की गति और तापमान की स्थिति के हिसाब से इधर-उधर मूवमेंट करते रहते हैं. मौसम विभाग के अनुसार मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार जिस तरीके से  बिहार से लेकर राजस्थान तक ट्रफ लाइन बना हुआ है वैसे में  राज्य में अभिसरण क्षेत्र यानि कंवर्जेंस जोन (convergence zone) बन गया है. इस जोन मे  गर्म और ठंडी हवाएं आपस में टकराती हैं. इन हवाओं के टकराने से ही बिजली कड़कती है, जिसे वज्रपात ठनका कहा जाता है.

कंवर्जेंस जोन बन जाने से बढ़ जाता है खतरा
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अंतः उष्ण कटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) भूमध्य रेखा के निकट लगभग 5 डिग्री उत्तर से 5 डिग्री दक्षिण तक निम्न दाब वाले क्षेत्र को संदर्भित करता है. इस क्षेत्र में उत्तर-पूर्वी सन्मार्गी पवनें और दक्षिण-पूर्वी सन्मार्गी पवनें अभिसरित होती हैं. इसे भूमध्यरेखीय अभिसरण क्षेत्र या मानसून गर्त के रूप में भी जाना जाता है. जब भी स्थितियां अनुकूल होती हैं, गर्म और आर्द्र हवाओं के संगम से काफी घने बादल बनते हैं. इससे वातावरण में गंभीर अस्थिरता बनती है, जिससे आंधी-तूफान और बिजली गिरने जैसी घटनाएं होती हैं.



दो दिनों में वज्रपात से 44 लोगों की मौत
मौसम विभाग रडार पर मिलने वाले संकेतों के आधार पर आपदा विभाग सहित विभिन्न माध्यमों से लोगों तक इसकी सूचना पहुंचाई जा रही है. बीते दो दिनों में बिहार में 44 लोगों की वज्रपात के कारण मौत हो गई. यही वजह है कि मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग के साथ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोगों से बेवजह घरों से बाहर न निकलने और सतर्क रहने की अपील की है.

 
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