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VIDEO: बरगद के पेड़ में समाया है पूरा शिव मंदिर, निवास करते हैं देवाधिदेव महादेव!

ETV Bihar/Jharkhand
Updated: July 31, 2017, 11:47 AM IST

प्रकृति ने मानव को हर बार चौंकाया है ऐसे ऐसे रहस्य प्रकृति की गोद में है जिन्हें जानकर आप हैरान रह जाएंगे. इसकी तरह बगहा में प्रकृति का दिया एक विशाल मंदिर भी चर्चा में है. जो कि एक बरगद और पीपल के पेड़ में बना हुआ है.

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प्रकृति ने मानव को हर बार चौंकाया है ऐसे ऐसे रहस्य प्रकृति की गोद में है जिन्हें जानकर आप हैरान रह जाएंगे. इसकी तरह बगहा में प्रकृति का दिया एक विशाल मंदिर भी चर्चा में है. जो कि एक बरगद और पीपल के पेड़ में बना हुआ है.

वृक्ष में मंदिर भी है और भगवान का आकार भी. पुरी तरह प्राकृतिक इस मंदिर में दर्शन से सभी मनोकामनाएं पुरी होती है ऐसी मान्यता है. सदियों पुराने इस मंदिर में भगवान शिव की पूजा होती आ रही है.पेड़ के भीतर देवाधिदेव शिव विराजते हैं.



यह मंदिर वाल्मीकि की तपोभुमि पर स्थित है. सनानत धर्म में वृक्षों का महत्‍व किसी से छिपा नहीं है. पीपल, बरगद आदि वृक्ष लोकआस्‍था से तो जुड़े ही हैं साथ ही इनके लिए कई रहस्‍यों से भरी कथाएं भी जनमानस में प्रचलित हैं. आश्‍चर्यों से भरा वृक्ष पश्‍चिमी चंपारण के टडवलिया गांव में है.



बरगद और पीपल के दो विशाल वृक्षों की खासियत यह है कि इसके तनों के भीतर मौजूद भगवान शिव का मंदिर है. सिर्फ इतना ही नहीं इन दोनों प्राचीन वृक्षों की टहनियां आश्‍चर्यजनक रूप से शिव के धनुष, त्रिशूल, डमरू और गले का हार यानि सर्प का आभास दिलाती हैं.

लोकआस्‍था है कि इन दो वृक्षों के भीतर बने मंदिर में साक्षात देवाधिदेव शिव का निवास है. इस दोनों पेड़ों की टहनियां महादेव का डमरू हैं तो शाखाएं त्रिशूल, यही नहीं टहनियों से ही भगवान् गणेश और नाग देवता भी बने हुए हैं.किसी जमाने में यहां श्रीयोगी हरिनाथ बाबा तप किया करते थे और यहीं पर उन्‍होंने जिंदा समाधी ली थी.

समाधी के उपरांत जब श्रीयोगी के उत्तराधिकारी उमागिरि नाथ इस स्‍थान पर मंदिर का निर्माण कराने लगे तो कई आश्‍चर्यजनक घटनाएं घटने लगीं. इस गांव में आजतक भूकंप के झटके नहीं आए. यही नहीं 2015 में नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप से जब बिहार की धरती हिल गई थी तब भी इस गांव में झटके महसूस नहीं किए गए.



ग्रामीणों का दावा है बरसात ना होने की दशा में ग्रामीण पूजन-अर्चन कर थोड़ी सी जमीन खोदते हैं और देखते ही देखते झमाझम बारिश होने लगती है.

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First published: July 31, 2017, 10:44 AM IST
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