बिहार: मामा की सांस थामने तीन घंटे तक दौड़ता रहा युवक, मौत के बाद अस्पताल ने मुंह मोड़ा तो पीपीई किट पहन शव भी किया पैक

बगहा में कोविड इलाज कुव्यवस्था का शिकार

बगहा में कोविड इलाज कुव्यवस्था का शिकार

Champaran News: का आरोप है कि जब सांस लेने में ज्यादा परेशानी उनको होने लगी तो उन्होंने नर्स से शिकायत की जब उनका वहां भी सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने डाक्टर से भी गुहार लगाई, लेकिन उनकी आवाज नहीं सुनी गई.

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रिपोर्ट- मुन्ना राज

बगहा. कोरोना काल में जहां एक तरफ स्वास्थ्य सुविधाओं के लिहाज से सभी राज्य सरकारों को कसौटियों पर कसा जा रहा है तो वहीं केंद्र सरकार को भी कठघरे में खड़ा किया जा रहा है. इस संकट के समय में सामाजिक स्तर पर जहां मानवीय मूल्यों को पुष्ट करने के उदाहरण हमारे सामने हैं वहीं कुछ ऐसी भी बातें सामने हैं जो हमें झकझोर देती हैं. कहीं पुत्र अपने के पिता के शव को लेने से इंकार कर रहा है तो कहीं नदियों में शव बहाये जा रहे हैं. हालांकि इसी दौर में बगहा के युवक ने मिसाल पेश की है.


युवक अमित ने मौत से पहले अपने मामा को बचाने के लिए तीन घंटे तक युवक अमित कुमार दौडता रहा. अफसोस कि सरकारी सिस्टम की उदासीनता के कारण वह अपने मामा को बचा न सका. इसके बाद भी मानवीय मूल्यों को तार-तार करते सरकारी सिस्टम की संवेदना नहीं जगी. अस्पताल की ओर से एम्बुलेंस तो दिया गया लेकिन शव को पैक तक नहीं किया गया. इसके बाद अमित ने हिम्मत दिखाई और अपने मामा के शव को पीपीई किट पहनकर पैक किया और अंतिम संस्कार के लिए ले गए.  अमित ने कहा कि मैं यूं ही कैसे छोड देता.

दरअसल पिपरिया गांव के रहने वाले कृष्णा मिश्र का बगहा अनुमंडलीय अस्पताल स्थित कोविड केयर सेन्टर पर इलाज चल रहा था. अचानक हालात बदले और अमित के मामा गंभीर हो गये. सांस में कठिनाई के बाद अमित नर्सों और डॉक्टर के पास दौडता रहा, लेकिन उसकी किसी ने नहीं सुनी. अमित का आरोप है कि जब सांस लेने में ज्यादा परेशानी उनको होने लगी तो उन्होंने नर्स से शिकायत की जब उनका वहां भी सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने डाक्टर से भी गुहार लगाई, लेकिन उनकी आवाज नहीं सुनी गई.
बता दें कि सीमित साधनों के सहारे बगहा अनुमंडलीय अस्पताल में 100 बेड का कोविड सेन्टर तो है, लेकिन सुविधाएं बहुत कम हैं. हालांकि डीएम डॉ के बी एन सिंह ने किसी भी लापरवाही की बात से इंकार किया है. उन्होंने कहा कि जो सीमित साधन उपलब्ध है उसके सहारे बेहतर इलाज के लिए उनकी पूरी टीम कृत संकल्पित है. आखिर इस मामले में कहां कमी रही है इस बात का पता लगा रहे हैं.

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