156 मासूमों की जान लेने वाले इंसेफेलाइटिस को इस वजह से कहते हैं 'चमकी बुखार'

बिहार के 16 जिले इस लाइलाज बीमारी के चपेट में आ चुके हैं. इससे पूरे राज्य में 156 मासूमों की जान जा चुकी है.

News18 Bihar
Updated: June 21, 2019, 2:33 PM IST
156 मासूमों की जान लेने वाले इंसेफेलाइटिस को इस वजह से कहते हैं 'चमकी बुखार'
एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम यानि AES से बिहार में करीब 160 बच्‍चों की जान जा चुकी है.
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Updated: June 21, 2019, 2:33 PM IST
बिहार में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) यानी चमकी बुखार से मरने वाले बच्‍चों की संख्‍या 156 तक पहुंच गई है. इसे लेकर हर तरफ हाहाकार मचा हुआ है. अब राज्‍य के 16 जिले इस लाइलाज बीमारी के चपेट में आ चुके हैं. वहीं, मुजफ्फरपुर जिले में सबसे अधिक अब तक 122 मौतें हुई हैं. इसके अलावा भागलपुर, पूर्वी चंपारण, वैशाली, सीतामढ़ी और समस्तीपुर समेत अन्य जिलों से भी इससे मौत के मामले सामने आए हैं.

बिहार में स्थानीय और आम बोलचाल की भाषा में इसे 'चमकी बुखार' कहा जाता है. हालांकि मेडिकल साइंस में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एसईएस) का कोई दूसरा टर्मिनोलॉजी नहीं है.

एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम को क्यों कहा जाता है चमकी बुखार?
बिहार में आम बातचीत एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम को चमकी बुखार कहा जाता है. ऐसा इसलिए भी संभव है कि एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एसईएस) बोलने में स्‍थानीय या फिर ग्रामीणों को काफी कठिनाई होती है. जब स्‍थानीय लोगों से इस संबंध में बात की गई तो उन्‍होंने कहा कि इस बीमारी में बेहोशी और शरीर में ऐंठन (Convulsion) के लक्षण होते हैं. इस संक्रमण से ग्रस्त रोगी का शरीर यकायक ही सख्त हो जाता है. मस्तिष्क और शरीर में ऐंठन शुरू हो जाती है. आम भाषा में इसी ऐंठन को 'चमकी' कहा जाता है. हालांकि ऐसा कई बार टिटेनस के मामलों में भी देख गया है, लेकिन पिछले काफी वर्षों से यह मूल रूप से इंसेफेलाइटिस के लिए इस्‍तेमाल किया जाता है.

चमकी बुखार के ये हैं लक्षण
इस बीमारी में शुरुआत में तेज बुखार आता है. इसके बाद बच्चों के शरीर में ऐंठन शुरू हो जाती है. इसके बाद तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) काम करना बंद कर देता है. शरीर में शुगर लेवल भी लो हो जाता है. बच्चे तेज बुखार की वजह से बेहोश हो जाते हैं और उन्हें दौरे पड़ने लगते हैं. उनके जबड़े और दांत कड़े हो जाते हैं. बुखार के साथ ही घबराहट शुरू होती है और कई बार कोमा में जाने की स्थिति भी बन जाती है. कई मौकों पर ऐसा भी होता है कि अगर बच्चों को चिकोटी काटेंगे तो उसे पता नहीं चलेगा. जबकि आम बुखार में ऐसा नहीं होता है. अगर बुखार के पीड़ित को सही वक्त पर इलाज नहीं मिलता है, तो मौत तय है.

इंसेफेलाइटिस है महामारी
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देश के 20 राज्यों के 178 जिले चमकी बुखार की चपेट में हैं. ये राज्य हैं- आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, दिल्ली, गोवा, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, नगालैंड, पंजाब, त्रिपुरा, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल. हालांकि इस बार मौतों की खबरें सिर्फ बिहार से ही आ रही है और अब तक यहां 156 बच्‍चे अपनी जान गंवा चुके हैं. आम तौर पर 15 साल तक के बच्चों को ये बीमारी होने की आशंका ज्‍यादा रहती है. इसका प्रकोप ज्यादातर उन जगहों पर होता है, जहां धान के खेत हैं या अधिकतर समय पानी भरा रहता है.

पहली बार इंसेफेलाइटिस के लक्षण भारत में 1995 में दिखे थे.


ऐसे लगाएं बीमारी का पता

सेरीब्रोस्पाइनल फ्लूइड की जांच से बीमारी का पता लगाया जाता है. इस बीमारी से संक्रमित व्यक्ति के सेरीब्रोस्पाइनल फ्लूइड में विषाणु के खिलाफ प्रतिजन पाये जाते हैं. संक्रमण के पश्चात बीमारी का कोई विशेष इलाज नहीं है फिर भी बीमारी का शुरू में पता चल जाने से उपचार जल्दी शुरू होने से पीड़ित बच्चे या व्यक्ति की जान बचायी जा सकती है.

अगर चमकी बुखार हो जाए तो क्या करें?

इस स्थिति में पीड़ित बच्चों को पानी पिलाते रहें, इससे उन्हें हाइड्रेटेड रहने और बीमारियों से बचने में मदद मिलेगी. इसके अलावा तेज बुखार होने पर पूरे शरीर को ताजे पानी से पोंछें, पंखे से हवा करें या माथे पर गीले कपड़े की पट्टी लगायें जिससे बुखार कम हो सके, बच्‍चे के शरीर से कपड़े हटा लें और उसकी गर्दन सीधी रखें. इसके अलावा बच्चों को पैरासिटामॉल की गोली और अन्‍य सीरप डॉक्‍टर की सलाह के बाद ही देना चाहिए.

अगर बच्चे के मुंह से लार या झाग निकल रहा है तो उसे साफ कपड़े से पोंछें, जिससे सांस लेने में उसे दिक्‍कत न हो, बच्‍चों को लगातार ओआरएस का घोल भी पिलाते रहें, तेज रोशनी से बचाने के लिए मरीज की आंख को पट्टी से ढंक दें, बेहोशी या दौरे आने की हालत में मरीज को हवादार जगह पर लिटाएं और चमकी बुखार की स्थिति में मरीज को बाएं या दाएं करवट लिटाकर डॉक्टर के पास जल्दी ले जाएं.

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First published: June 21, 2019, 1:27 PM IST
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