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देश के नाम जिन्होंने न्यौछावर किए प्राण, उनकी वीरांगनाओं का किया सम्मान

Sanjay Kumar | News18Hindi
Updated: January 22, 2020, 11:06 PM IST
देश के नाम जिन्होंने न्यौछावर किए प्राण, उनकी वीरांगनाओं का किया सम्मान
वीरांगनाओं का सम्मान करते बिहार के राज्यपाल.

1967 से लेकर 2003 के बीच देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले सपूतों की वीरांगनाओं को सम्मानित किया गया.

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  • Last Updated: January 22, 2020, 11:06 PM IST
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पटना. सैनिक कल्याण निदेशालय और बिहार राजभवन सचिवालय के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को बिहार (Bihar) राजभवन में वीरांगनाओं का सम्मान समारोह आयोजित किया गया. राजेन्द्र मंडप में आयोजित कार्यक्रम में बिहार के राज्यपाल फागू चौहान ने वीरांगनाओं के साथ ही शहीदों के परिजन का भी सम्मान किया. राज्यपाल ने वीरांगनाओं को शॉल और सम्मानपत्र देकर आभार जताया. इस दौरान 1967 से लेकर 2003 के बीच देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले सपूतों की वीरांगनाओं को सम्मानित किया गया.

यह नैतिक जवाबदेही
इस मौके पर बिहार के राज्यपाल फागू चौहान ने कहा कि देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहूति देने वाले अमर जवानों की पत्नियों का सम्मान करने और उनके कल्याण के लिए कदम उठाकर वे कोई अहसान नहीं बल्कि अपनी नैतिक जबाबदेही को ही पूरा कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि देश के लिए अनुपम बलिदान देने वाले वीर जवानों की इन वीरांगनाओं को योग्यता के अनुसार रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार संकल्पित है. इस दौरान गृह विभाग के विशेष सचिव सुनील कुमार ने कहा कि बिहार के पांच जिलों में सैनिक कल्याण कार्यालय खोले जा चुके हैं और 8 अन्य जिलों में इस तरह के कार्यालय खोलने की प्रक्रिया चल रही है.

भारत में सबसे ज्यादा वीरांगनाएं

दुनिया भर के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो भारत मे सबसे ज्यादा वीरांगनाएं हैं और हर साल इनकी संख्या बढ़ती जा रही है. युद्ध नही होने की ‌स्थिति में भी पड़ोसी देश पाकिस्तान द्वारा सीज फायर के उल्लंघन के कारण इस संख्या में बढ़त देखी जा रही है. जानकारी के अनुसार वीरांगनाओं को अपने जीवन व्यापान के लिए कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है. वहीं कुछ तो केवल पेंशन पर अपना गुजारा करती हैं. इसका असर यह होता है कि वे अवसाद से घिर जाती हैं.



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First published: January 22, 2020, 11:06 PM IST
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