सावधान ! फिर दस्तक दे रहा है कोरोना

महामारी ने सबकी कमर तोड़ी है, फिर वो बिमारी से हो, अपनों के खोने का गम हो, नौकरियां जाने का दुःख हो, गरीबी के कष्ट हो, अकेलेपन की बेड़ियां हो, घरों में कैद कई सपने हो, या महंगाई की बेढब मार हो. हर किसी ने इस कठिन समय के जल्दी बीत जाने की दुआ की है, क्यूंकि कोरोना काल की परिस्थितियां नई, विषम और भयावह हैं.

  • Share this:
हते हैं 'Life goes on' अर्थात जीवन तो चलता रहेगा, ये ना किसी के लिए थमेगा और ना ही किसी के लिए रुकेगा. लेकिन, कोरोना महामारी ने तो मानो जन -जीवन की डोर अपने हाथ में ले ली है. जैसे ही डोर कसती है, सारी उथल-पुथल पर रोक लग जाती और हम एक-एक सांस के शुक्रगुज़ार हो जाते हैं. मगर जैसे ही डोर थोड़ी ढीली पड़ती हैं, हम रोज़मर्रा की क़वायतों में मशगूल हो यह भूल जाते हैं कि महामारी अब भी घात लगाये हुए है और हमारी बेफ़िक्री का फायदा कभी भी उठा सकती है.

जीवन तो अब भी चल ही रहा है, पर उसके साथ-साथ कोरोना भी अपने पैर पसारे हमारी लापरवाहियों के इंतज़ार में डटा हुआ है. हमारा देश अभी कोरोना की दूसरी लहर के विध्वंस से उभर ही रहा था, तभी तीसरी लहर दस्तक देने लगी है. पिछले डेढ़ साल किसी के लिए भी आसान नहीं रहे हैं. महामारी ने सबकी कमर तोड़ी है, फिर वो बिमारी से हो, अपनों के खोने का गम हो, नौकरियां जाने का दुःख हो, गरीबी के कष्ट हो, अकेलेपन की बेड़ियां हो, घरों में कैद कई सपने हो, या महंगाई की बेढब मार हो.

हमारी लापरवाही कोरोना को फिर दे रही है बुलावा
हर किसी ने इस कठिन समय के जल्दी बीत जाने की दुआ की है, क्यूंकि कोरोना काल की परिस्थितियां नई, विषम और भयावह हैं. मगर हम बार बार वही गलती दोहराते रहे. जैसे ही लॉकडाउन खत्म होता नज़र आता है, लोगों की भीड़ बाज़ारों, पर्यटन स्थलों, और सामाजिक कार्यों में उमड़ आती है. इन आयोजनों में बिना मास्क पहने, बिना सामाजिक दूरी बनाए, लोग इस प्रकार जमा होते हैं, मानो कोरोना कभी था ही नहीं. हाल ही में देश में अति संक्रामक डेल्टा वैरिएंट का पता चला है और उसके साथ साथ डेल्टा प्लस और लैम्ब्डा वैरियंट्स भी धीरे-धीरे लोगों को अपनी चपेट में ले रहे हैं.

विश्व स्वास्थ संघटन (WHO) ने यह चेतावनी दी है कि डेल्टा और डेल्टा प्लस, कोरोना के अन्य सभी वैरिएंट्स से कहीं ज्यादा संक्रामक है और जिन लोगों में जिन लोगों में यह पाया गया है उनका वायरल लोड वूहान वायरस से भी हज़ार गुना ज्यादा है. WHO ने यह भी स्पष्ट किया है कि डेल्टा स्ट्रेन कई देशों में तीसरी लहर का कारण बन गया है इसलिए सभी को इससे सतर्क रहने की जरूरत है. स्वास्थ और परिवार कल्याण विभाग ने भारत में डेल्टा प्लस को 'वैरिएंट ऑफ़ कंसर्न' बताया है, यानि पिछले वैरियंट्स के मुकाबले यह वैरिएंट अत्याधिक तेज़ी से लोगों के बीच फ़ैल सकता है.


कोरोना वायरस लगातार अपने नए-नए रूप बदल रहा है और यह चिंताजनक है, मगर उससे भी ज्यादा चिंताजनक है हमारा गलतियां दोहराना. कोरोना से बचाव का सीधा उपाय है एक बढ़िया मास्क, हाथों की सफाई, सामाजिक दूरी और टीकाकरण. देश में टीकाकरण अभियान भी जोरो-शोरों से शुरू है, मगर इन केन्द्रों में भी अब सोशल-डिस्टन्सिंग की धज्जियां उड़ती दिखाई देती हैं. पहले और दूसरे डोज़ वाले लोगों के एक साथ आजाने से टीकाकरण में भी मारा मारी की स्थिति निर्मित होती नज़र आने लगी है.

सिर्फ 8 फीसदी लोग ही हैं पूरी तरह से वैक्सिनेटेड
देश में अभी कुल 8 प्रतिशत लोग पूरी तरह से वैक्सीनेटेड हैं और करीब 25 प्रतिशत लोगों को टीके की पहली खुराक दी जा चुकी है. पर, वैक्सीन लेने के बाद भी कोरोना का संक्रमण हो सकता है, इसलिए मास्क और सामाजिक दूरी है बहुत जरूरी. कुछ लोग पूरी तरह वैक्सीनेट होने के बाद मास्क पहनना जरूरी नहीं समझ रहे, मगर इस से उनको और उनके करीबियों को कोरोना फैलने का खतरा बहुत बढ़ जाता है.

देश की अर्थव्यवस्था के मापदंडों से देखें तो लॉकडाउन एक बहुत बड़ा झटका है, जिसके कारण कई व्यापारों और वितरण में गहरा असर पड़ता है. इस चरमराई अर्थव्यवस्था के फलस्वरूप महंगाई भी आसमान छूती नज़र आ रही है. मगर कोरोना को कमज़ोर समझ अगर हमने ऐसे ही असावधानियाँ बरती तो हमें फिर लॉकडाउन में जाना पड़ सकता है. धीरे-धीरे फिर से कई राज्यों में कोरोना केस बढ़ते जा रहे हैं, और भीड़ का यही आलम रहा तो तीसरी लहर अब ज्यादा दूर नहीं. (डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)

पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.