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कोरोना : कुछ नैतिक जिम्मेवारी हमारी भी

News18Hindi
Updated: March 24, 2020, 11:21 AM IST
कोरोना : कुछ नैतिक जिम्मेवारी हमारी भी
(News18 क्रिएटिव)

"आंकड़ों को पेश करने का एकमात्र मकसद यह बताना है कि कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ तो रहा है, पर इससे जीतने वालों की संख्या भी भारत में बढ़ रही है."

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  • Last Updated: March 24, 2020, 11:21 AM IST
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फिलहाल दुनिया भर में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 378842 पहुंच चुकी है. भारत में 480 मामले सामने आए हैं. भारत में इस वायरस ने कुल 9 लोगों की जान ली है जबकि 24 लोगों ने इस वायरस को हराकर हमारे सामने नजीर पेश की है. राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र में अब तक 89 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 2 मरीजों की मौत हुई है. केरल में 63 लोग संक्रमित पाए गए हैं जिनमें से 3 ने कोरोना को पराजित कर दिखाया है. यहां अबतक किसी की जान नहीं गई है. उत्तर प्रदेश में कुल 30 मामले सामने आए जिनमें से 9 लोगों ने कोरोना पर जीत हासिल की. राजस्थाना में कोरोना से संक्रमण के कुल 26 मामले सामने आए. यहां भी किसी की जान नहीं गई बल्कि 3 मरीजों ने इस बीमारी पर फतह हासिल की. दिल्ली में सामने आए 28 मामलों में 5 मरीज ऐसे रहे जिन्होंने कोरोना से चली जंग में जीत दर्ज की है. वे बिलकुल स्वस्थ हो चुके हैं. दिल्ली में अबतक इस बीमारी से महज एक की जान गई है. कर्नाटक के 33 मामलों में 2 मरीज रोगमुक्त हो चुके हैं. यहां भी अबतक इस बीमारी से एक मौत हुई है. पंजाब में संक्रमण के 21 मामले सामने आए हैं, यहां एक शख्स की जान इस बीमारी ने ली है. यही हाल गुजरात का है, यहां 29 लोग संक्रमित पाए गए, इनमें से एक की मौत हुई है, शेष स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं. बिहार में दो संक्रमित मरीजों में एक की मौत हुई है, दूसरा स्वस्थ होने की दिशा में है.

इन आंकड़ों को पेश करने का एकमात्र मकसद यह बताना है कि कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ तो रहा है, पर इससे जीतने वालों की संख्या भी भारत में बढ़ रही है. इस बीमारी से डरने की नहीं, सतर्क रहने की जरूरत है. केंद्र और राज्य सरकारें अपनी पूरी क्षमता के साथ लगी हैं. कोरोना का संक्रमण न फैले इसके लिए देश के कई राज्यों को लॉक डाउन किया जा चुका है.


जनता कर्फ्यू की कामयाबी हम सबने देखी. पर उस शाम जिस तरह की लापरवाही कई इलाकों में देखने को मिली, हमें उससे बचने की जरूरत है. इस वायरस को हल्के में नहीं लिया जा सकता. हल्के में लेने का मतलब अपने और दूसरों के लिए आफत का आमंत्रित करने जैसा होगा. लॉक डाउन का मतलब लॉक डाउन होता है. हमें पूरे संयम और धीरज के साथ इसका पालन करना होगा. इस वायरस को मारने का फिलहाल यही एकमात्र कारगर तरीका हमारे पास है. अति उत्साह हो या अति लापरवाही - दोनों ही स्थितियां खतरनाक हैं, यह बात हमें समझनी होगी.

एक खबर के मुताबिक, भारत के पास इमरजेंसी या आपदा राहत के लिए काफी कम रकम है. प्रधानमंत्री राहत कोष में 3800 करोड़ रुपए हैं. ऐसे समय में उन निजी कंपनियों को सामने आना चाहिए जिनके पास कॉरपोरेट सोशल रेस्पॉन्सब्लिटी (सीएसआर) फंड होता है. सीएसआर के नियम के मुताबिक, इस दायरे में वे कंपनियां आती हैं, जिनमें कम से कम 500 करोड़ रुपए निवेश हुआ हो या जिन्हें एक साल में कम-से-कम पांच करोड़ रुपए का शुद्ध मुनाफा हुआ हो या जो कम से कम 1000 करोड़ रुपए का कारोबार करती हों. इन सभी कंपनियों को अपनी कमाई का 2% हिस्सा सीएसआर गतिविधियों में खर्च करना है. जाहिर है ऐसे आपदा भरे समय में इन निजी कंपनियों को खुद से सामने आकर राज्यों की मदद में अपना योगदान करना चाहिए.



इसके अतिरिक्त कुछ नैतिक जिम्मेवारियां हमारी भी बनती हैं. हम मंदिरों में धर्म के नाम पर अपनी सामर्थ्य से ज्यादा दान करते हैं. इस वक्त हमें यह ध्यान देना चाहिए कि आपदा के इस वक्त कितने मंदिर के ट्रस्ट सामने आए अपने भक्तों की मदद को? दरअसल, यही वक्त है थोड़ा थीर होकर सोचने का कि हम अपनी श्रद्धा कहां दिखाएं. अपनी मेहनत की कमाई हम मंदिरों को दान करें या अस्पतालों की बेहतरी के लिए अस्पताल प्रबंधन के लिए. ध्यान रखें कि मेडिकल जर्नल 'लैंसेट' के एक अध्ययन के मुताबिक, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और लोगों तक उनकी पहुंच के मामले में भारत विश्व के 195 देशों में 145वें पायदान पर है. अगर हमें अपने देश को स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में आगे बढ़ाना है तो अपनी मेहनत की कमाई इसी क्षेत्र में दान करने की जरूरत है.

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First published: March 24, 2020, 11:20 AM IST
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