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क्या हवा में घुलता जहर कर रहा है औरत पर असर?

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Updated: January 18, 2020, 3:21 PM IST
क्या हवा में घुलता जहर कर रहा है औरत पर असर?
वायु प्रदूषण की वजह से महिलाओं के अंडाशय में बनने वाले हॉर्मोन एएमएच के स्तर में भारी गिरावट देखी गई है.

वातावरण का असर जितना धरती को नुकसान पहुंचा रहा है उसका वैसा ही असर औरतों पर भी पड़ रहा है.

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  • Last Updated: January 18, 2020, 3:21 PM IST
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बधाई हो फिल्म मे जब नीना गुप्ता का ढलती उम्र मे मां बनने का पता चलता है तो उस पर तमाम लांछने लगाई जाती है. उसे परिवार के बाहर और भीतर एक शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है. लेकिन वो तमाम शर्मिंदगियों के बावजूद भ्रूणहत्या से इंकार कर देती है. वहीं उसके पति भी शर्मसार हैं लेकिन उस पर पारिवारिक दबाव इतना नहीं है. यहां तक कि उनका बड़ा लड़का भी अपनी मां को दोषी के तौर पर ही देख रहा होता है. मजेदार बात तो तब होती है जब बुढ़ा रहे बाप को एक रिश्तेदार शादी में अपने बेटे को सलाह देने के लिए बोलता है क्योंकि उसका बेटा बाप नहीं बन रहा है.

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मर्द तो दोषहीन रहता है
बातचीत में वो आदमी नीना गुप्ता के पति से बोलता भी है कि अब तुम नहीं बताओगे तो कौन बताएगा. इस बातचीत के बाद पति में एक गजब का आत्मविश्वास देखने को मिलता है वो आइने में खुद को निहारता है अपने अंदर के मर्द को शबाशी देता है और बैकग्राउंड में चल रहे राजेश खन्ना के गाने की धुन पर इतराता है. दूसरी तरफ साठ और सत्तर के दशक में कई ऐसी फिल्में आई हैं, जहां जब औरत मां नहीं बन पाती है तो उसे बांझ बताकर धिक्कारा जाता था. यहां तक कि अगर कभी वो अपने मर्द की तरफ नज़र घुमा कर देखती है तो मर्द भी ये मान कर चलता है कि दोष उसमें ही है क्योंकि मर्द तो दोषहीन रहता है.

औरत मां बने या नहीं दोष उसका ही रहता है
कुल मिलाकर औरत मां बने या नहीं बने उसमें दोष उसका ही रहता है. पहले तो औरत इसलिए परेशान रहती थी कि उसका पति या मर्द ये मानने को तैयार नहीं होता था कि उसमें भी दोष हो सकता है. अब फर्ज कीजिए कि कोई लड़की मां नहीं बन पा रही है और उसका पति अपनी जांच के लिए राजी हो जाता है. लेकिन जब उसकी जांच होती है तो पता चलता है कि वो ठीक है दरअसल मां बनने की क्षमता औरत में ही कम है. औरत तमाम तरह के तरीके अपनाती है लेकिन उसे ये बात पल्ले नहीं पड़ती है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है.

वातावरण का असर औरतों परडॉक्टर भी समझ नहीं पाते हैं कि आखिर औरत के अंडाशय में सक्रियता कम क्यों हो रही है. वो भी इसे औरत की ही कोई कमी मान लेता है और औरत भी यही मान कर अपने ऊपर दोष ले लेती है और सारा जीवन एक ग्लानि के साथ जीने को राजी हो जाती है. लेकिन क्या हो जब पता चले की विकास की जिस धारा में हम बहे जा रहे है उस धारा के विपरीत बहाव का असर औरत पर पड़ रहा है. हमने धरती को औरत की संज्ञा दी है और आज दोनों ही एक जैसा परेशानी से गुज़र रही है और वातावरण का असर जितना धरती को नुकसान पहुंचा रहा है उसका वैसा ही असर औरतों पर भी पड़ रहा है. दरअसल एक शोध से पता चला है कि वायु प्रदूषण की वजह से महिलाओं के अंडाशय में बनने वाले हॉर्मोन एएमएच के स्तर में भारी गिरावट देखी गई है.

क्या होता है एएमएच (AMH)
एएमएच (AMH) एक तरह का हॉर्मोन होता है जो अंडाशय के अंदर बनता है. इसके स्तर से ही अंडाणुओं के प्रवाह पर असर पड़ता है यानि अगर इसका स्तर कम होगा तो अंडाणुओं का प्रवाह कम होगा और बांझपन भी हो सकता है. महिलाओं के खून में इस हॉर्मोन का स्तर ओवेरियन रिज़र्व यानि अंडाशय के उचित मात्रा में फर्टिलाइज एग सेल्स उपलब्ध कराने का संकेत होता है. हालांकि इसका कतई मतलब नहीं है कि ओवेरियन रिज़र्व में कमी होने का मतलब ये होता है कि महिला मां नहीं बन सकती है लेकिन 50 फीसदी निसंतानता के मामलों में 10 फीसद में वजह एएमएच के स्तर में कमी ही होती है.

ये हॉर्मोन छोटे विकसित फॉलीक्यूल्स से बनता है. उम्र के साथ खून में एएमएच के स्तर में कमी आती जाती है और आगे चल कर ये ही मेनोपॉज का भी कारण बनता है. इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि एएमएच की बदौलत प्रजनन की उम्र भी बढोतरी होती है यानि अगर एएमएच कम होगा तो जल्दी मेनोपॉज होगा और मां बनने की क्षमता में कमी आएगी

क्या कहता है रिसर्च
यूरोपियन सोसाइटी ऑफ ह्यूमन रिप्रोडक्शन एंड एंब्रियोलॉजी की शोध जो एएमएच हार्मोन पर आधारित है, उसके मुताबिक महिलाओं में प्रजनन क्षमता में कमी का वायु प्रूदषण से सीधा नाता देखा गया है. जिन महिलाओं पर शोध की गई उनके निवास स्थल के आस पास की जगह के पी.एम 2.5, पी.एम 10 और नाइट्रोजन ऑक्साइड के स्तर को रोजाना जांचा गया.

आमतौर पर 25 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में एएमएच हॉर्मोन की खून में मात्रा धीरे धीरे कम होती जाती है लेकिन शोध में पाया गया कि जहां पर वायु प्रदूषण का स्तर ज्यादा था वहां पर रहने वाली महिलाओं में हॉर्मोन का स्तर काफी कम पाया गया था. शोध को जब और गहन किया गया तो पाया गया कि जहां वायु में प्रूदूषण बुरी हाल में था वहां महिलाओं में हॉर्मोन का स्तर दो से तीन गुना कम पाया गया यानि महिलाओं में ओवेरियन रिज़र्व की मात्रा काफी कम पाई गई.

शोध बताती है कि 30 साल से कम उम्र की महिलाओं में एएमएच हॉर्मोन का इतना कम स्तर पर पाया जाना चौंकाने वाली बात है. शोध बताती है कि वातावरण का असर महिलाओं के प्रजनन क्षमता पर पड़ रहा है. एएमएच हार्मोन के स्तर बढ़ा रहने से महिलाओं की प्रजनन क्षमता औऱ उसकी अवधि में बढ़ोतरी हो जाती है.

जन्मजात विकृतियां
ज़ाहिर है इसका सीधा मतलब ये है कि महिलाओ में कम उंम्र में मेनोपॉज की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता है. हालांकि वायु प्रदूषण का असर स्थायी रहता है या वातावरण बदलने पर इसमें बदलाव देखा जा सकता है इसे लेकर अभी शोध होना बाकी है. लेकिन इससे ये साफ होता है कि धरती और इसके वातावरण में किए जा रही ज्यादती का असर महिलाओं में भी देखा जा रहा है. इसे 1984 में हुए भोपाल गैस त्रासदी से भी समझा जा सकता है. एक रिपोर्ट के मुताबिक गैस पीड़ित महिलाओ से पैदा होने वाले बच्चों में से 09 प्रतिशत में जन्मजात विकृतियां पाई गईं.

जहरीली गैस का दुष्प्रभाव गर्भवती महिलाओं पर
दरअसल भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) की एक संस्था नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च ऑन एनवायरमेंटल हेल्थ ने एक शोध में यह पाया था कि जहरीली गैस का दुष्प्रभाव गर्भवती महिलाओं पर भी पड़ा है. इसके कारण बच्चों में जन्मजात बीमारियां हो रही हैं. यह अध्ययन जनवरी 2016 से जून 2017 तक चला. इसे दिसंबर 2014 से लेकर जनवरी 2017 तक हुई तीन साइंटिफिक एडवाइजरी कमेटी (एसएसी) की बैठकों में स्वीकृति दी गई.

गर्भधारण करने के बाद गर्भ गिर गया
इसके अलावा विभिन्न प्रकार की शोधों से ये बात सामने आई है कि भोपाल गैस त्रासदी की वजह से कई महिलाएं दोबारा मां नहीं बन पाईं, कई महिलाओं के तो गर्भधारण करने के बाद गर्भ गिर गया तो कईयों में मां बनने की क्षमता ही नहीं रही. यहां तक कि उनके मासिक धर्म पर भी व्यापक असर देखने को मिला है. ये असर आज 36 साल गुजर जाने के बाद भी देखा जा रहा है. भोपाल गैस त्रासदी ये बात समझा सकती है कि वायु में हुए प्रदूषण का कितना स्थाई असर हो सकता है.

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साफ सुथरा प्राकृतिक माहौल
यानि प्रकृति के साथ खिलवाड़ करके हमने वो स्थितियां पैदा कर दी है कि चाहे धरती हो या औरत दोनों से ही उसके मां बनने के नेमत भी छिन रही है. तो अब भगवान न करे लेकिन कभी अपने इर्द गिर्द ऐसी किसी महिला को पाएं और इस पर इल्जाम लगाएं उससे पहले एक बार वहां पर गहरी सांस लेकर देख लीजिएगा कि वो कितनी जहरीली हवाओं में जी रही है और कोशिश करें की उन्हें सामाजिक माहौल ही नहीं प्राकृतिक माहौल भी साफ सुथरा मिले.

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First published: January 18, 2020, 3:21 PM IST
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