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Bihar Panchayat Elections: फिजिकल से डिजिटल हुआ हाईटेक बिहार का पंचायत चुनाव

आजकल ज्यादातर हाथों में स्मार्टफोन है. गांवों में भी शहर की तरह अधिकतर लोग सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं. चुनावी एजेंसियां इसका लाभ लेकर विरोधियों की कमियां उजागर करने और संबंधित प्रत्याशी का प्रमोशन कर रहे हैं. यही कारण है कि 2021 का पंचायत चुनाव भी फिजिकल से डिजिटल की तरफ बढ़ रहा है.

  • News18Hindi
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पटना. बिहार पंचायत चुनाव हाईटेक हो गया है. संभावित प्रत्याशी एक दूसरे पर सोशल मीडिया से वार कर रहे हैं. लोकसभा और विधानसभा चुनावों की तर्ज पर प्रत्याशी सोशल मीडिया पर अपना प्रचार-प्रसार और इमेज बिल्डिंग का काम कर रहे हैं. दिल्ली और उत्तर प्रदेश की चुनाव मैनेजमेंट एजेंसियां इसे देख रही है. इसके लिए वे संबंधित प्रत्याशियों से उनका प्रमोशन करने के लिए 1.75 लाख रुपए तक का पैकेज ले रही हैं. इनकी हर दिन मांग बढ़ती जा रही है. यही कारण है कि इन एजेंसियों ने पूरे बिहार में अपनी टीम और नेटवर्क को तैयार कर लिया है.

क्यों बढ़ रही है मांग
आजकल ज्यादातर हाथों में स्मार्टफोन है. गांवों में भी शहर की तरह अधिकतर लोग सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं. चुनावी एजेंसियां इसका लाभ लेकर विरोधियों की कमियां उजागर करने और संबंधित प्रत्याशी का प्रमोशन कर रहे हैं. यही कारण है कि 2021 का पंचायत चुनाव भी फिजिकल से डिजिटल की तरफ बढ़ रहा है. कोरोना काल में प्रत्याशी भी मतदाताओं से सीधे मिलने के बजाय सोशल मीडिया ग्रुप बनाकर मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचा रहे हैं.

इसके कारण बिहार में हो रहे पंचायत चुनाव में इनकी मांगे ज्यादा बढ़ गई है. पटना के सदिशोपुर में अपने प्रत्याशी के लिए काम करने वाले एक प्राइवेट एजेंसी के शंकर भूषण ने बताया कि उनकी कंपनी ने मार्केट से करीब 18 प्रतिशत काम उठाया है. इसमें कम बजट वाले लोग भी हैं. हम लोग उनको उनके बजट के हिसाब से पैकेज और प्रमोशन दे रहे हैं.

1 लाख से 2 लाख तक के हैं पैकेज
चुनाव मैनेजमेंट एजेंसियों का कहना है कि हम लोग कम बजट वालों को ध्यान में रखकर अपना पैकेज तैयार किया है. उनसे 1 लाख ले रहे हैं. जबकि जो सामर्थ हैं उनको 1.75 लाख रुपए के पैकेज दे रहे हैं. इसमें हम लोग प्रत्याशियों के विरोधियों के खेमे में अपना आदमी लगाते हैं. वह विरोधियों की कमी पता करता है. इसके बाद इन कमियों को पंचायत क्षेत्र में उजागर करते हैं. इसके साथ प्रमोशन और इलेक्शन का हर तरह का मैनेजमेंट इस पैकेज में होता है.

2 लाख रुपए का पैकेज अधिकतर पंचायतों में पसंद किया जा रहा है, क्योंकि इसमें पूरा चुनाव मैनेजमेंट और प्रमोशन देखने के साथ-साथ विरोधियों की कमियां भी उजागर किया जा रहा है. ज्यादातर प्रत्याशी इसी पैकेज को चुन रहे हैं. कुछ प्रत्याशियों ने इसमें प्रमोशन का पैकेज अलग से एड कराया है.

चुनाव के लिए जमीन बेच रहे प्रत्याशी
बिहार में पंचायत चुनाव का क्रेज हाल के दिनों में बढ़ गया है. इसके कारण चुनाव का खर्च में भी बढ़ गया है. पूर्व मुखिया रघुवीर राय का कहना है कि पहले जहां बात चाय पर बन जाती थी, वहां अब 50 लाख रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं. यही कारण है कि लोग अपना जमीन बेचकर भी चुनाव लड़ रहे हैं. पिछले बार भी जो चुनाव लड़े थे उन्होंने भी जमीन बेचा था.

इसबार उनको मात देने के लिए जो प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं उन्होंने भी चुनाव के जमीन बेच दिया है. पटना से सटे बिहटा प्रखंड के मुसेपुर पंचायत की  बात करते हुए वे कहते हैं कि यहां पर वोटरों के मजे हैं. चुनाव की घोषणा के साथ संभावित प्रत्याशी हर दिन के भोज से उनके बल्ले-बल्ले हो गए हैं. मुर्गा-भात से लेकर शराब तक की व्यवस्था हो रही है.

(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)

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