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इंटरनेशनल लेफ्ट हैंडर्स डे: बच्चों को मारपीट कर ना बनाएं राइट हैंडर्स 

इंटरनेशनल लेफ्ट हैंडर्स डे: बच्चों को मारपीट कर ना बनाएं राइट हैंडर्स 

इंटरनेश्नल लेफ्ट हैंडर्स डे: दुनिया के ख़ास लोगों का दिन

इंटरनेश्नल लेफ्ट हैंडर्स डे: दुनिया के ख़ास लोगों का दिन

International Left Handers Day 2022: दुनिया के तमाम बड़े और मश्हूर लोग लेफ्ट हैंडर्स हैं. कहा जाता है कि बाएं हाथ से काम करने वाले लोगों में कुछ ख़ास क्वालिटीज़ होती हैं. हम यहां उन क्वालिटीज़ की बात को करेंगे ही लेकिन बाएं हाथ से काम करने वाले लोगों को बचपन से जिन दिक्कतों का सामना करना पड़ता है उसका जिक्र भी करेंगे.

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आज हमारा दिन है, यानि बाएं हाथ से काम करने वाले, बाएं हाथ से लिखने वालों का दिन. बचपन में जहां तक मेरी याद्दाश्त जाती है याद आता है कि उल्टे हाथ से काम करने की वजह से मुझे बहुत डांट पड़ी है. यहां तक की उल्टे हाथ से खाना खाने की वजह से मुझे मौसी ने पीटा भी है. लेकिन कुछ नहीं बदला मैं आज भी उल्टे हाथ से बहुत से काम करती हूं और लिखती भी उल्टे ही हाथ से हूं.

आज हमारा ही दिन है, यानि इंटरनेश्नल लेफ्ट हैंडर्स डे. इंटरनेशनल लेफ्ट हैंडर्स डे यानी उन लोगों के लिए एक खास दिन जो बाएं हाथ से लिखते हैं और जिनका सारा काम बाएं हाथ से ही होता है. साल 1991 में इस दिन की शुरुआत हुई थी और हर वर्ष 13 अगस्‍त को यह दिन मनाया जाता है. दुनिया के तमाम बड़े और मश्हूर लोग लेफ्ट हैंडर्स हैं. कहा जाता है कि बाएं हाथ से काम करने वाले लोगों में कुछ ख़ास क्वालिटीज़ होती हैं. हम यहां उन क्वालिटीज़ की बात को करेंगे ही लेकिन बाएं हाथ से काम करने वाले लोगों को बचपन से जिन दिक्कतों का सामना करना पड़ता है उसका जि‍क्र भी करेंगे.

मैंने अपने बचपन का जिक्र इसलिए भी किया क्योंकि ये आम धारणा है कि सीधे हाथ से काम करना अच्छा होता है. इसलिए बचपन से मारपीट करके, डांट के बच्चों को सीधे काम करने को कहा जाता है. हालांकि, आजकल माता-पिता और लोगों का नज़रिया लेफ्ट हैंडर्स को लेकर बदला है. आजकल के माता-पिता इतने सख़्त नहीं हैं इस बात को लेकर कि उनकी औलाद सीधे हाथ से ही काम करे. दरअसल, मैंने भी बहुत कोशिश की लेकिन मैं सीधे हाथ से खाना खाने के अलावा सारे काम बाएं हाथ से करती हूं.

कहा जाता है कि बाएं हाथ वाले लोग बेहद ख़ास होते हैं. वो अपनी अपनी फील्ड के मास्टर बनते हैं, बाएं हाथ वालों की राइटिंग की अच्छी होती है. बराक ओबामा, सचिन तेंदुलकर, अमिताभ बच्‍चन, न्‍यूटन, रोनाल्‍ड रीगन, बिल क्लिंटन जैसे अपनी अपनी फील्ड के मास्टर लोग हैं. इनकी ख़ासियत है कि ये तमाम लोग लेफ्ट हैंडर्स हैं. यहां तक की अमेरिका के पांच पूर्व राष्ट्रपति लेफ्ट हैंडर्स हैं.

क्यों मनाते हैं लेफ्ट हैंडर्स डे?
लेफ्ट हैंडर्स डे मनाने के पीछे का मकसद है उन लोगों को खास महसूस कराना है जो बाएं हाथ से लिखते हैं. जिसकी वजह से वो बचपन से मज़ाक, डांट डपट का शिकार होते रहते हैं. बहुत से लोग ऐसे भी होते हैं जो लोगों के सामने को सीधे हाथ से काम करते हैं लेकिन अकेले में वो बाएं हाथ से ही काम करते हैं. सीधे हाथ से काम करने को लेकर लोगों में खासा दबाव रहता है. लेफ्ट हैंडर्स डे का एक मकसद यह भी है कि लोग लेफ्ट हैंडर्स को लेकर अपना नज़रिया बदलें. लेफ्ट हैडर्स को अलग तरीके से ट्रीट ना करें, उनका मज़ाक ना बनाएं, या माता पिता जबरन अपने बच्चे को इस बात के लिए ना डांटे कि वो उल्टे हाथ से काम करता है.

कुछ तो बात होती है लेफ्ट हैंडर्स में
लेफ्ट हैंडर्स की खासियत होती है कि वो पढ़ने में काफी तेज होते हैं. लेफ्ट हैंडर्स में हर क्षेत्र में बेस्ट देने की क्षमता होती है. संगीत और कला के क्षेत्र में अपनी कल्पना शक्ति का अधिक उपयोग करते हैं. ये भी देखा गया है कि अक्सर लेफ्टी रचनात्मक विचार वाले होते हैं, स्पोर्ट्स में इनकी बहुत रुचि होती है. लेफ्ट हैंडर्स किभी भी काम को पूरे परफेक्शन के साथ करने में यक़ीन रखते हैं. ये महज़ कहा नहीं जा रहा है बल्कि अपने अपने क्षेत्र के धुरंधरों ने ये बात साबित की है. उन्होंने साबित किया है कि लेफ्ट हैंडर्स होना कोई कमी नहीं है बल्कि उनकी खासियत है. वो अपने अपने क्षेत्र में बुंलदी पर पहुंचे. अमिताभ बच्चन, सचिन तेंदुलकर, बराक ओबामा, स्टीव जॉब्स, बिल गेट्स, मार्क जुकरबर्ग, मेसी, जूलिया रॉबर्ड, ओफ्रा विफ्रे, चार्ली चैप्लिन, लियोनार्ड द विंची ये वो नाम हैं जिनकी बादशाहत उनकी फील्ड में रही है.

लेफ्ट हैंडर्स को लेकर बदल रही है सोच
लेफ्ट हैंडर्स को लेकर अब लोगों का नजरिया काफी बदल गया है. अब इसे इतना खराब नहीं माना जाता है. हालांकि अब भी लोग बाएं हाथ से खाना खाने वाले या बाकि काम करने वाले को थोड़ा अलग मानते हैं. जबकि हमें उन्हें राइट हैंडर्स की तरह की सहज वातावरण देना चाहिए. माता –पिता की सोच भी बहुत हद तक बदली है. हमारे माता पिता की तरह अब बच्चों पर सीधे हाथ से काम करने का बहुत दवाब नहीं डाला जाता है. हालांकि मध्‍य काल में अगर कोई इंसान अपने बाएं हाथ से काम करता तो उसे जादू-टोना करने वाला करार देकर समाज से निकाल दिया जाता था.

20वीं सदी में अमेरिका के कई शिक्षाविदों ने लेफ्ट हैंडर्स को राइट हैंडर्स बनाने के लिए उन पर इतना दबाव डाला कि उन्‍होंने अपनी शिक्षा को ही नजरअंदाज करना शुरू कर दिया था. वैज्ञानिकों की मानें तो बच्‍चे का मस्तिष्‍क जब शुरुआती विकास की अवस्‍था में होता है तो उसमें हल्‍के से नुकसान की वजह से बच्‍चा लेफ्ट हैंडर बन जाता है.

कई रिसर्च में ये बात साबित हो चुकी है कि बाएं हाथ से काम करने वाले लोग बहुत ही बुद्धिमान और अपना काम करीने से करने के आदी होते हैं. साल 2015 में न्‍यूरोसाइंस एंड बिहेवियरल रिव्‍यूज की तरफ से हुई स्‍टडीज में 5 बिंदुओं पर लेफ्ट हैंडर्स को परखा गया था. 16,000 लोगों पर हुई इस स्‍टडी में आईक्‍यू में तो अंतर था ही साथ ही साथ लेफ्ट हैंडर्स की बौद्धिक क्षमता कहीं ज्‍यादा देखी गई थी

लेफ्ट हैंडर्स को उल्टे दिमाग़ वाला कहकर चिढ़ाया भी जाता है. लेकिन अब लेफ्ट हैडर्स ने असहज होना छोड़ दिया है. बदलते वक्त के साथ लोगों की,पेरेंट्स की सोच भी बदल रही है. और इस सोच को बदलना बेहद जरूरी है क्योंकि लेफ्ट हैंड से काम कोई भी बच्चा जानबूझकर नहीं करता है, वो उनके नेचर में होता है. इसलिए डांटना और मारपीट करना बिल्कुल भी गलत है बल्कि आपको खुश होना चाहिए कि आपके घर में शायद कोई जीनियस पैदा हुआ है. दुनिया के तमाम लेफ्ट हैंडर्स को उनका दिन मुबारक. आप दुनिया के मानचित्र पर छाएं रहें यही कामना.

Tags: Blog, Life style, Lifestyle

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