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शिवराज ने मिलने का समय नहीं दिया तो धरने पर बैठे दिग्विजय

शिवराज ने मिलने का समय नहीं दिया तो धरने पर बैठे दिग्विजय

पूर्व मुख्‍यमंत्री दिग्विजय सिंह टेम और सुठालिया परियोजना से प्रभावित होने वाले किसानों का मुद्दा लेकर मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिलने पहुंचे थे.

पूर्व मुख्‍यमंत्री दिग्विजय सिंह टेम और सुठालिया परियोजना से प्रभावित होने वाले किसानों का मुद्दा लेकर मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिलने पहुंचे थे.

मुलाकात की इस राजनीति में टेम और सुठालिया परियोजना से प्रभावित होने वाले किसानों का मुद्दा जरूर पीछे चला गया. मुख्यमंत्री से समय मिलने के बाद दिग्विजय सिंह ने कहा कि वे किसानों को उनका हक दिलाकर रहेंगे. दोनों परियोजनाओं से चार जिलों के किसान प्रभावित हो रहे हैं. ये जिले भोपाल, विदिशा, राजगढ़ और गुना हैं. 383 करोड़ रुपये की लागत वाली टेम सिंचाई परियोजना से दस हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि सिंचित होगी. इसमें भोपाल के बैरसिया के आधा दर्जन गांव की 193 हेक्टेयर भूमि और लगभग आठ सौ कच्चे-पक्के घर डबू में आ रहे हैं.

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मुद्दा किसानों की डूब में आ रही जमीन और उसके मुआवजे का था. लेकिन, चर्चा कांग्रेस की गुटबाजी की होने लगी. मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने डूब प्रभावित किसानों की मांग को रखने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात का समय मांगा था. समय तय होने के बाद निरस्त किए जाने से नाराज दिग्विजय सिंह धरने पर बैठ गए. जिस वक्त दिग्विजय सिंह धरने पर बैठे थे,उसी वक्त मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मुलाकात हवाई पट्टी पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ से हो गई. कमलनाथ के अनुसार मुलाकात महज संयोगवश हुई. चंद मिनट की संयोगवश हुई इस मुलाकात के जरिए भाजपा यह संदेश देने में सफल हो गई कि कांग्रेस में गुटबाजी है.

कमलनाथ-दिग्विजय की राह अलग है?
कांग्रेस में हर नेता अपनी राजनीति की दिशा और रणनीति खुद तय करता है. मध्यप्रदेश में कांग्रेस की राजनीति दो बड़े नेताओं के बीच बंटी हुई दिखाई दे रही है. दिग्विजय सिंह और कमलनाथ. दोनों समान उम्र और समान कद के नेता है. दिग्विजय सिंह दस साल राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं. वर्ष 2003 में कांग्रेस दिग्विजय सिंह के चेहरे के कारण ही चुनाव हारी थी. पंद्रह साल बाद कांग्रेस की सरकार में वापसी के पीछे भी दिग्विजय सिंह की मैदानी रणनीति को श्रेय दिया जाता है. राज्य में दिग्विजय सिंह के समर्थकों की संख्या कांग्रेस के दूसरे नेताओं की तुलना में ज्यादा है. दिग्विजय सिंह और कमलनाथ सार्वजनिक रूप से अपने रिश्तों को छोटे भाई और बड़े भाई के रिश्ते के तौर पर पेश करते हैं.

कांग्रेस का एक वर्ग मार्च 2020 में कमलनाथ के नेतृत्व वाली सरकार गिरने के पीछे दिग्विजय सिंह को ही जिम्मेदार मानता हैं. कारण पर्दे के पीछे सत्ता का संचालन दिग्विजय सिंह के हाथ में देखा जाता था. ज्योतिरादित्य सिंधिया की सरकार में भूमिका दिखाई नहीं देती थी. सिंधिया के नेतृत्व कांग्रेस के 28 विधायकों ने पार्टी छोड़ दी थी. जिसके कारण कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई थी. फलस्वरूप पंद्रह माह में ही शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा की सरकार एक बार फिर बन गई. कांग्रेस की राजनीति में अब तक दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के बीच अब तक कोई सीधा टकराव दिखाई नहीं दिया है. लेकिन, पार्टी संगठन से जुड़ी महत्वपूर्ण बैठकों में दोनों नेता साथ दिखाई नहीं देते हैं. इससे यह अनुमान लगाया जाता है कि दोनों नेताओं अब अलग-अलग राह पर चल रहे हैं.

शिवराज-कमलनाथ की मुलाकात पर विवाद क्यों
दिग्विजय सिंह ने टेम एवं सुठालिया की सिंचाई परियोजना से विस्थापित होने वाले किसान परिवारों की समस्या और मुआवजे को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से समय मांगा था. मुख्यमंत्री कार्यालय ने शुक्रवार सुबह का समय दिया था. लेकिन, बाद में निरस्त कर दिया. परियोजना से प्रभावित कई किसान भी मुलाकात के लिए भोपाल आ गए थे. नाराज दिग्विजय सिंह धरने पर बैठ गए. छिंदवाड़ा से लौटने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि राजकीय हवाई पट्टी(एयर स्ट्रिप)पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात हुई. उन्होंने बताया कि दिग्विजय सिंह धरने पर बैठे हैं. कमलनाथ के इस बयान से यह साफ संदेश गया कि दिग्विजय सिंह ने धरने पर बैठने से पहले उन्हें (कमलनाथ को)विश्वास में नहीं लिया.

एयर स्ट्रिप पर कमलनाथ और शिवराज सिंह चौहान की मुलाकात संयोगवश हुई. मुख्यमंत्री चौहान देवास जिले के दौरे पर जा रहे थे. कमलनाथ छिंदवाड़ा के दौरे से लौट रहे थे. मुख्यमंत्री चौहान को कमलनाथ के आने की जानकारी मिली तो रूककर उनका इंतजार करने लगे. दोनों ने लगभग दस मिनट बात की. राजकीय विमानतल से कमलनाथ सीधे धरना स्थल पर पहुंच गए. दिग्विजय सिंह ने उन्हें किसानों का मुद्दा बताया. मुलाकात के बाद कमलनाथ ने कहा कि डेढ़ माह से दिग्विजय सिंह समय मांग रहे हैं. पूर्व मुख्यमंत्री को समय न मिलना गंभीर बात है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस डूब प्रभावित किसानों के साथ खड़ी है.

कुछ देर बाद ही मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी ने 23 जनवरी का समय तय होने की सूचना दिग्विजय सिंह को दी. लेकिन, इस बीच भाजपा कांग्रेस की कथित गुटबाजी को सड़क पर ला चुकी थी. भाजपा मीडिया प्रभारी लोकेंद्र पाराशर ने अपने ट्वीट में लिखा कि जिन्हें उम्रदराज होकर भी झूठ बोलने से परहेज नहीं हो,उनके लिए कीमती समय बर्बाद नहीं किया जा सकता. सोशल मीडिया पर मुलाकात सुर्खियां बनने के बाद कमलनाथ ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री से मिलने का समय नहीं मांगा था. मुलाकात संयोगवश ही हुई.

राजनीति में पीछे छूटा किसानों का मुद्दा
मुलाकात की इस राजनीति में टेम और सुठालिया परियोजना से प्रभावित होने वाले किसानों का मुद्दा जरूर पीछे चला गया. मुख्यमंत्री से समय मिलने के बाद दिग्विजय सिंह ने कहा कि वे किसानों को उनका हक दिलाकर रहेंगे. दोनों परियोजनाओं से चार जिलों के किसान प्रभावित हो रहे हैं. ये जिले भोपाल, विदिशा, राजगढ़ और गुना हैं. 383 करोड़ रुपये की लागत वाली टेम सिंचाई परियोजना से दस हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि सिंचित होगी. इसमें भोपाल के बैरसिया के आधा दर्जन गांव की 193 हेक्टेयर भूमि और लगभग आठ सौ कच्चे-पक्के घर डबू में आ रहे हैं. इसी तरह विदिशा जिले की 450 हेक्टेयर भूमि और 550 मकान डूब क्षेत्र में आ रहे हैं. गुना का अरेरा बालापुरा गांव के कुछ घर डूबेंगे.

किसानों को चाहिए पुनर्वास नीति का मुआवजा
विदिशा में 2 लाख 15 हजार प्रति हेक्टेयर और बैरसिया में 2 लाख 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से किसानों को मुआवजा दिया जा रहा है. जबकि, खुले बाजार में इन जमीनों की कीमत से 12 से 18 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तक है. इस कारण किसान परियोजना का विरोध कर रहे है. पार्वती नदी पर 14 सौ करोड़ रुपये की सुठालिया परियोजना प्रस्तावित है. इसमें राजगढ़ जिले के नौ, भोपाल जिले के पांच और गुना जिले के दो गांव डूब में आ रहे है. डेढ़ हजार से अधिक परिवारों को विस्थापित होंगे और तीन हजार यहां की करीब चार हजार 300 हेक्टेयर से ज्यादा भूमि डूब रही है. इसमें से अधिकांश भूमि पूर्व से सिंचित है. किसानों को मुआवजा सरकार की नीति के अनुसार नहीं दिया जा रहा. कलेक्टर रेट पर भुगतान किया जा रहा है. जबकि, राजगढ़ जिले में ही मोहनपुरा सिंचाई परियोजना के विस्थापितों को सरकार ने 2016 में दस लाख रुपये हेक्टेयर की दर से मुआवजा दिया था. मकान बनाने के लिए शहरी क्षेत्र में भूखंड भी दिया गया था.

Tags: CM Shivraj Singh Chauhan, Digvijay singh, Farmer Agitation, Kamal nath

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