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Opinion : कुशीनगर हवाई अड्डाः पीएम मोदी के तोहफे का व्यापक असर होगा

Opinion : कुशीनगर हवाई अड्डाः पीएम मोदी के तोहफे का व्यापक असर होगा

PM Narendra Modi News: यूपी में विधानसभा चुनाव से पहले कुशीनगर हवाई अड्डे का तोहफा बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.

PM Narendra Modi News: यूपी में विधानसभा चुनाव से पहले कुशीनगर हवाई अड्डे का तोहफा बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.

कहा जाता है कि केन्द्र की सत्ता का रास्ता यूपी होकर जाता है और लखनऊ की गद्दी पर बैठने के लिए पूर्वांचल फतह जरूरी है. पिछले दो लोकसभा चुनावों और 2017 के विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल ने बीजेपी को झोली भरकर सीटें दी. यूपी के 28 जिलों में फैले पूर्वांचल में विधानसभा की 164 सीटें हैं, यानि सूबे की 33 फीसदी.

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सियासी गलियारे में आजकल एक कहावत खूब चलती है- डबल इंजन की सरकार. सत्ता में बैठे लोग इसके फायदे गिनाते हैं तो विपक्षी इसी के जरिये सत्ता पक्ष पर तंज कसता है. इसका आशय वैसे प्रदेशों से है जहां राज्य और केन्द्र की सत्ता एक ही पार्टी से संचालित होती है. सौभाग्यवश उत्तर प्रदेश भी वैसा ही सूबा है, जिसको प्रदेश में योगी और केन्द्र में मोदी की अगुवाई वाली सरकार का नेतृत्व प्राप्त है. जाहिर है मोदी-योगी की जोड़ी यूपी में उन्नति और प्रगति की हर रोज नयी इबादत लिखने के दावे कर सकती है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 अक्टूबर को कुशीनगर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट का लोकार्पण किया. नये एयरपोर्ट पर बौद्ध भिक्षुओं से भरी पहली अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट श्रीलंका की राजधानी कोलंबो से लैंड की. बताने की जरूरत नहीं कि कुशीनगर भगवान बुद्ध की परिनिर्वाण भूमि है और श्रीलंका एक बौद्ध बहुल देश है. इसके अलावा पीएम मोदी ने 478.74 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की भी सौगात दी, जिसमें 116.21 करोड़ से तैयार 11 परियोजनाओं का लोकार्पण और 362.53 की लागत से मेडिकल कॉलेज सहित तीन परियोजनाओं का शिलान्यास शामिल है.

कुशीनगर की एयर कनेक्टिविटी के मायने

पूर्वी उत्तर प्रदेश में कुशीनगर के जरिये प्रगति की उड़ान को पंख देने का काम योगी-मोदी की डबल इंजन सरकार ने कर दिया है. दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर कुशीनगर एक बौद्ध तीर्थक्षेत्र के तौर पर अंकित रहा है. बुद्ध के लगभग 50 हजार विदेशी अनुयायी दुनिया के अनेक देशों से हर साल यहां आते रहते हैं. अब अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बन जाने के बाद कुशीनगर की ग्लोबल मैप पर एयर कनेक्टिविटी वाले शहरों के बतौर नाम दर्ज हो जाएगा. जाहिर है पर्यटकों की आवक बढने से इलाके के विकास में नया अध्याय जुड़ेगा. इस अति पिछड़े क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा और रोजगार के नये अवसर पैदा होंगे. सीएम योगी के मुताबिक करीब पांच करोड़ की आबादी को विमान सेवा का सीधा लाभ मिलेगा, जिसमें कुशीनगर, देवरिया, बस्ती, महाराजगंज से लेकर बिहार और नेपाल के सीमावर्ती इलाके शामिल हैं. फिलहाल, 26 नवंबर से दिल्ली और कुशीनगर के बीच स्पाइसजेट की सीधी फ्लाइट सप्ताह में चार दिन दिन चलेगी. तय योजना के अनुसार 18 दिसम्बर से कुशीनगर कोलकाता और मुम्बई से भी हवाई सेवा से जुड़ गया. आज पहला विमान श्रीलंका से उतरा.

यूपी की एयर कनेक्टिविटी बढ़ी

उद्घाटन के साथ ही कुशीनगर यूपी का तीसरा और सबसे लंबा रनवे वाला इंटरनेशनल एयरपोर्ट बन गया है. संख्या की दृष्टि से यह नौवां एयरपोर्ट है जो चालू हो गया है. सूबे में पहले से लखनऊ और वाराणसी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट हैं. नोएडा के जेवर में चौथा और अयोध्या में पांचवां इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी तेजी से बन रहा है. उड़ान योजना के तहत अलीगढ़, मुरादाबाद, चित्रकूट, म्योरपुर और श्रावस्ती में एयरपोर्ट होगा. यानि आने वाले दिनों में यूपी में 17 एयरपोर्ट बन जाएंगे और इस तरह सूबे का हर भौगोलिक क्षेत्र एयर कनेक्टिविटी को प्राप्त हो जाएगा. पीएम मोदी के सत्ता संभालने के पहले देश में 74 एयरपोर्ट थे. बीते सात साल के अंदर 62 नये एयरपोर्ट बने और अब देश में 128 हवाई अड्डे चालू हो गये हैं. केन्द्र और राज्य सरकार के नेता बड़े गर्व से देश की हवाई क्षेत्र में प्रगति को गिनाते रहते हैं. कुशीनगर के उद्घाटन मंच पर सीएम योगी और नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बड़े गर्व से देश-प्रदेश की प्रगति के आंकड़े गिनाए और अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया.

जानकार बताते हैं कि अंग्रेजी शासन के दौरान देवरिया-कुशीनगर के कसया में हवाई पट्टी का निर्माण हुआ था. यह 1946 की बात है. तब अंग्रेज अधिकारियों ने अपने आवागमन के लिए एयरोड्रम की नींव रखी थी. सौभाग्य से दूसरे साल ही देश को स्वतंत्रता मिल गयी और अंग्रेज इसका उपयोग नहीं कर सके. बताते हैं कि 1954 में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन का आयोजन कुशीनगर में हुआ था, तब दुनिया के कई देशों खासकर चीन, ताइवान, तिब्बत, थाईलैंड, श्रीलंका आदि देशों से आने वाले बौद्ध भिक्षुओं और राष्ट्राध्यक्षों ने पहली बार इस एयरपोर्ट का इस्तेमाल किया था. प्रधानमंत्री आज बुद्ध की उस परिनिर्माण स्थली के नाम से प्रसिद्ध मंदिर भी गये. माना जा रहा है कि प्रतीकों को साधने की कला में माहिर मोदी ने इस यात्रा के जरिये दुनिया की बौद्ध बिरादरी खासकर नवबौद्धों के बीच अपनी साख बढ़ाने का काम किया है.

उपेक्षित रहा है कुशीनगर का क्षेत्र

उत्तर प्रदेश के सबसे पूर्वी क्षेत्र में अवस्थित कुशीनगर आजादी से पहले एयरपोर्ट बनने और चीनी मिलों की बहुलता के बावजूद विकास के पैमाने पर उपेक्षित रहा है. पुराने लोग बताते हैं कि आजादी से पहले देवरिया-कुशीनगर का यह इलाका गन्ने की खेती के लिए प्रसिद्ध था. तब यहां 13 चीनी मिलें स्थापित थीं. आजादी के बाद जैसा होना चाहिए था विकास नहीं हुआ. एयरपोर्ट का रनवे भी सालों साल तक उपेक्षित पड़ा रहा. स्थानीय लोग वाहन चलाना सीखने और खेलने-कूदने के लिए इसका इस्तेमाल करने लगे. अब इसके किस्मत बदले हैं और कुशीनगर सड़क, रेल के बाद हवाई मार्ग से भी दुनिया के देशों से सीधा जुड़ गया है.

पांच दिन के भीतर पीएम मोदी का काशी दौरा

प्रधानमंत्री मोदी 25 अक्टूबर को दोपहर बाद वाराणसी आने वाले हैं. वे बनारस से ही आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना लांच करने के साथ ही वाराणसी को पांच हजार दो सौ करोड़ रुपये की परियोजनाओं की सौगात देंगे, जिसमें रिंग रोड-2 के पैकेज-1 सहित 32 परियोजनाओं का लोकार्पण शामिल है. पीएम की ओर से योजना लांच करने के साथ ही इंटीग्रेडेट हेल्थ इंफार्मेशन पोर्टल भी शुरू कर दिया जाएगा. इस पोर्टल से देश के सभी पब्लिक हेल्थ लैब को जोड़ा जाएगा. पहली बार है कि पीएम किसी योजना का शिलान्यास नहीं करने जा रहे हैं. पार्टी ने मिर्जामुरादा के मेहंदीगंज में उनकी सार्वजनिक जनसभा रखी है. जहां वो 2 लाख से अधिक लोगों को संबोधित करेंगे.

पूर्वांचल की सियासी अहमियत की वजह पीएम मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी है. नरेन्द्र मोदी अपने क्षेत्र वाराणसी को विकास और प्रगति का एक मॉडल के तौर पर पेश करना चाहते हैं. काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से लेकर गंगा की साफ-सफाई, घाटों का सौंदयीकरण, बिजली व्यवस्था में सुधार, एयरपोर्ट से जोड़ने वाली सड़क का आधुनिक तरीके से निर्माण और बीएचयू में अंतराराष्ट्रीय स्तर के अस्पताल की सौगात उनकी बड़ी देन है. काशी विश्वनाथ कॉरिडोर उनका ड्रीम प्रोजेक्ट है. बहुत दिन नहीं हुए जब काशी विश्वनाथ का प्रसिद्ध मंदिर संकरी गलियों, गंदगी और भीड़भाड़ के चलते दुनियाभर के पर्यटकों और घरेलू तीर्थयात्रियों के मन में काशी का बड़ा खराब इंप्रेशन देता था. अब वह दिन दूर नहीं जब विश्वनाथ मंदिर अपनी भव्यता और गौरव के साथ प्रकट होगा और सीधे गंगा नदी के घाट से जुड़ जाएगा.
पूर्वांचल पर फोकस के मायने

बीजेपी के मिशन-2022 के लिए पूर्वांचल एक अहम फैक्टर है. उत्तर प्रदेश में पुरानी कहावत चलती है कि केन्द्र की सत्ता का रास्ता यूपी होकर जाता है और लखनऊ की गद्दी पर बैठने के लिए पूर्वांचल फतह जरूरी है. पिछले दो लोकसभा चुनावों और 2017 के विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल ने बीजेपी को झोली भरकर सीटें दी. यूपी के 28 जिलों में फैले पूर्वांचल में विधानसभा की 164 सीटें हैं यानि सूबे की 33 फीसदी. पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 115 सीट पर विजयश्री हासिल हुई थी, जबकि सपा ने 17 और बसपा ने 14 सीटों पर कब्जा जमाया था. कांग्रेस के खाते में केवल दो सीटें हाथ लगी थी. 16 सीटें अन्य दलों के खाते में गयी थीं. जानकार मानते हैं कि पूर्वांचल बीजेपी के लिए 2022 में भी बेहद अहम होने जा रहा है, क्योंकि पश्चिमी यूपी में किसान आंदोलन और लखीमपुर खीरी के बाद से सरकार के खिलाफ नाराजगी बढ़ी है. लिहाजा बीजेपी पूर्वांचल पर फोकस कर इस बार और अधिक सीटें हासिल करने के प्रयास में है.

पूर्वांचल में बीजेपी का सियासी समीकरण

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी और सीएम योगी का गोरखपुर क्षेत्र पूर्वांचल का ही हिस्सा है. जाहिर है पूर्वांचल में पैठ बढ़ाना और यहां से अधिकाधिक सीटें लाना दोनों के लिए प्राथमिकता में शामिल है. इसीलिए मोदी-शाह और योगी की तिकड़ी पूर्वांचल प्लान पर गंभीरता से लगी है. इस इलाके के सामाजिक और जातीय समीकरण को देखते हुए अभी से गठबंधन की कवायद भी जारी है. अपना दल की अनुप्रिया पटेल और संजय निषाद की निषाद पार्टी से बीजेपी ने चुनावी गठजोड़ कर रखा है. इन दलों के अलावे पूर्व के अपने सहयोगी ओमप्रकाश राजभर को भी पाले में लाने की अंदरखाने से पहल जारी है. बताने की जरूरत नहीं है कि इन छोटे-छोटे दलों के अपने-अपने जातीय वोट बैंक हैं, जो जुड़ जाने पर बीजेपी के परंपरागत वोटबैंक में बड़ी इजाफा कर देते हैं और सीटों की टैली को बढ़ा देते हैं. इति…

Tags: Kushinagar International Airport, Pm narendra modi, UP Election 2022

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