लाइव टीवी

तिनका तिनका जेल: देश की सबसे पुरानी जेल और उसका अपना रेडियो

News18Hindi
Updated: October 18, 2019, 6:19 PM IST
तिनका तिनका जेल: देश की सबसे पुरानी जेल और उसका अपना रेडियो
आगरा जेल में शुरू हुआ जेल रेडियो.

31 जुलाई को आगरा (Agra) जेल रेडियो (Jail radio) का उद्घाटन किया गया. यह खबर बड़े अखबारों की सुर्खियां भले ही न बनीं लेकिन इसने बंदियों के जीवन में जबरदस्त खुशी भर दी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 18, 2019, 6:19 PM IST
  • Share this:
यह आगरा की जिला जेल है. देश की सबसे पुरानी जेल. इसकी स्थापना 1741 में हुई थी. जेल के बाहर लगी हुई पत्थर की तख्ती हर रोज इस बात को याद दिलाती है कि यह जेल ऐतिहासिक है. वैसे तो आगरा की पहचान ताजमहल से है और उस जिक्र में जेल कहीं दूर-दूर तक शामिल नहीं होती लेकिन उससे इस जेल का इतिहाल धूमिल नहीं होता. आगरा की पुरानी कहानियों में भी जेल के किस्से गायब हैं लेकिन जेल के ऊपरी हिस्से में मौजूद कमरे में रखे कुछ रजिस्टर इतिहास के उन पन्नों को आज भी समेटे हैं, जिन्हें देखने में आधुनिक समाज की शायद कोई दिलचस्पी न हो. इस सबके बीच आगरा की इस जेल में हाल में एक इतिहास रचा.

कुछ समय पहले जब मैं इस जेल में दौरे के लिए पहुंची तो काफी विचार-मंथन के बाद यह समझ में आया कि इस जेल की जरूरत रेडियो भी है. तलाश करते हुए दो ऐसे बंदी मिले जो जेल में रेडियो को चलाने के लिए एकदम उपयुक्त थे.


इनमें से एक एमए दर्शनशास्त्र कर चुका है और दूसरी आईआईएम बैंगलोर से पढ़ाई कर चुकी है. इस तलाश के पूरे होने के बाद एक कमरे की तलाश की गई जिसे रेडियो स्टेशन बनाया गया. यह कमरा जेल के मुख्य द्वार के सामने चुना गया ताकि यह बंदियों के आवाजाही के दौरान उनके सपनों का साक्षी भी बने. कमरा छोटा था लेकिन उसमें तब भी रेडियो स्टेशन बनने की पूरी गुंजाइश थी. इसके बाद उन कलाकारों की तलाश हुई जो इस रेडियो स्टेशन में रंग भर सकें.

इस काम को करने के लिए दो बंदी सामने आये-अरबाज और सतीश. उनको तिनका तिनका मॉडल के तहत ही एक डिजाइन दिया गया जो इससे पहले देश की कुछ और जेलों की दीवार पर बनाया गया है. इन दोनों ने रेडियो के लिए चुने गए कमरे की दीवार को सपनों से भर दिया. दीवार को खूबसूरत बनाने के लिए कोई महंगे रंग तो नहीं थे पर जुनून जबरदस्त था. इसी का नतीजा रहा कि दीवार जब तैयार हुई तो रोशनी से भरपूर थी.

इसके बाद रेडियो स्टेशन की तैयारी शुरू हो गई. इस स्टेशन का नाम आगरा जेल रेडियो रखा गया. एक व्यावसायिक रेडियो स्टेशन की तरह रन-आर्डर पर काम हुआ. सुबह की एडिटोरियल मीटिंग का समय तय किया गया. जेल के नियमों के मुताबिक समय और जरूरतों को ढाला गया. कमरे में एक मामूली माइक्रोफोन, जेल का एक साधरारण टेवल और लकड़ी के दो स्टूल रेडियो स्टेशन के साधन बने. रेडियो स्टेशन के नाम पर सिर्फ इतना ही था लेकिन संसाधनों का होना ही सबसे बड़ी शर्त नहीं हो सकती.

31 जुलाई को आगरा जेल रेडियो का उद्घाटन आगरा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बबलू कुमार, जेल के सुपरिटेंडेंट शशिकांत मिश्रा और मैंने किया. यह खबर बड़े अखबारों की सुर्खियां भले ही न बनीं लेकिन इसने बंदियों के जीवन में जबरदस्त खुशी भर दी.


वैसे यहां यह भी जोड़ा जाना चाहिए कि बाहर की दुनिया के ज्यादातर लोगों की दिलचस्पी इस बात में थी कि इस रेडियो से जुड़़े किस बंदी ने कौन सा अपराध किया है. वे बड़ी आसानी से भूल गए कि इस रेडियो की शुरुआत करने का मकसद ही इन बंदियो को अपनी एक नई पहचान बनाने में मदद कर करना है, उनसे जुड़े अपराध की चर्चा और उसका उछाल पूरी तरह से बेमानी और बेबुनियादी है.
Loading...

जेल रेडियो के शुरू होते ही जेल के बंदियों ने अपनी जिंदगी की कहानियां और अनुभव लिखने शुरु कर दिए हैं. यहां हर रोज शाम एक घंटे का प्रसारण होता है. बाहरी दुनिया के किसी दखल से परे यहां जेल का अपना रचा संसार बन रहा है. यह कुछ ऐसी तिनका तिनका कोशिशें हैं जो समय की किताब में दर्ज हो रही हैं. मेरे अपने हिस्से के बहुत सारे सुखों के कटने के बाद जेलों के कुछ नये अध्याय खुले हैं. यह मॉडल तिनका तिनका का एक नया प्रयोग है. आगरा जेल का रेडियो आने वाले समय में यकीनन शोध और दिलचस्पी का बड़ा केन्द्र बनेगा.

(वर्तिका नन्दा देश की स्थापित जेल सुधारक हैं. तिनका तिनका जेलों के लिए उनकी मुहिम का नाम है. तिनका तिनका मध्य प्रदेश हाल में प्रकाशित दुनिया की अपनी तरह की पहली काफीटेबल बुक है, जिसमें 12 पुरुष, 2 महिला बंदियों और जेल के 4 बच्चों ने जेल की जिंदगी को रंगों में उतारा)

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए आगरा से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: October 18, 2019, 12:12 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...