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यूपी में चुनाव को लेकर बिहार की राजनीति में उथल पुथल, मुकेश सहनी ने भाजपा को तरेरी आंखें

यूपी में चुनाव को लेकर बिहार की राजनीति में उथल पुथल, मुकेश सहनी ने भाजपा को तरेरी आंखें

विपक्ष को भरोसा है कि अगर सरकार बनाने के लिए हम जब दावा पेश करेंगे, तब इनका भी हमें समर्थन प्राप्त हो जाएगा.. हालांकि नीतीश कुमार लोजपा और बसपा के एक-एक विधायकों को अपने साथ मिलाकर ऑक्सीजन पर चल रही सरकार को वार्ड में जरुर ले लाए हैं. फिर भी अगर मुकेश सहनी ने अगर सरकार से अपना समर्थन वापस लिया तो यह पक्का है कि बिहार में एक बार फिर से राजनीतिक संकट तो जरुर उत्पन्न हो जाएगा..

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ड़ोसी राज्य यूपी में चुनाव को लेकर बिहार की राजनीति में उथल-पुथल शुरु हो गई है. सरकार में साथ रहने के बाद भी भाजपा और वीआईपी एक दूसरे पर आंखें तरेर रही हैं. इसकी बानगी भाजपा सांसद का मुकेश सहनी को अनुकंपा वाला मंत्री बताना है. हालांकि मुकेश सहनी ने इसपर पलटवार का अवसर नहीं छोड़ा. उन्होंने कहा हम कमजोर हैं, लेकिन मजबूर नहीं है. सरकार जिन चार कंधों के सहारे (हम, वीआईपी, जेडीयू और बीजेपी) चल रही है, उसमें एक कंधा वीआईपी पार्टी का भी है, इसलिए भाजपा भ्रम में नहीं रहे. बिहार में सरकार चलाने के लिए जितनी 74 सीट वाले की जरुरत है, उतनी ही चार सीटों वालों की भी जरुरत है.

वे यहीं नहीं रुके. उन्होंने इसके साथ ही स्पष्ट कहा कि भाजपा को यह समझना होगा और हमसे डरना भी होगा. दरअसल, यह खटपट तो बहुत पहले से दोनों के बीच में है. लेकिन यूपी चुनाव में सीटों को लेकर दोनों आमने सामने हो गए हैं. बात नहीं बनने पर वीआईपी (विकासशील इंसान पार्टी) प्रमुख मुकेश सहनी ने उत्तर प्रदेश के 165 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है.  इधर, भाजपा ने यूपी के 15 प्रतिशत निषाद वोटरों को साधने के लिए संजय निषाद की निषाद पार्टी से गठबंधन कर लिया है. इस पर मुकेश सहनी भड़क गए हैं. वे यूपी का गुस्सा बिहार में दिखाने लगे हैं.

विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार सरकार में पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री मुकेश सहनी ने तो यहां तक कह दिया कि बिहार हो या यूपी वीआईपी पार्टी अपने दम पर अपनी पहचान बनाई है. यूपी में अकेले चुनाव लड़कर हम इसे एक बार फिर प्रमाणित करेंगे. किसी को यह भ्रम में नहीं रहना चाहिए कि वो बहुत मजूबत हैं. बिहार में हम हैं तो सरकार है, यूपी में भी वीआईपी की भूमिका भी यही रहेगी. जो लोग अभी हमें गाली दे रहे हैं, वे यूपी चुनाव के बाद समर्थन के लिए हमारे पास आएंगे. भाजपा सांसद अजय निषाद ने मुकेश सहनी को अनुकंपा वाला नेता करार देकर एक और विवाद खड़ा कर दिया है.

कल तक पर्दे की लड़ाई अब सड़क पर आ गई. मुकेश सहनी ने इसपर पलटवार करते हुए कहा कि अजय निषाद जो बोल रहे हैं वो नहीं बोल रहे. भाजपा उनसे ऐसा बोलने के लिए दबाव बना रही है. लेकिन, हम इससे डरने वाले नहीं है. मुकेश सहनी के इस बयान को लेकर राजनीतिक पंडितों का कहना है कि सहनी जिस प्रकार से भाजपा को आंख दिखा रहे हैं उससे साफ है कि उन्हें किसी न किसी का समर्थन प्राप्त है.

भाजपा को गुरेरा, कांग्रेस को कहा धन्यवाद
बिहार के गठबंधन की सरकार में मंत्री रहने के बाद भी मुकेश सहनी जिस प्रकार से भाजपा के साथ दो-दो हाथ करते दिख रहे हैं और कांग्रेस के प्रति उनकी नरमी से साफ है कि बिहार में खरमास की खिचड़ी पकनी शुरु हो गई है. यूपी में निषाद समाज के लिए काम करने और उनकी आवाज उठाने के लिए मुकेश सहनी कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को धन्यवाद देकर बिहार में पक रही खिचड़ी की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित कराया है. सीनियर पत्रकार लव कुमार मिश्रा कहते हैं कि चुनाव से पहले कोई ऐसे ही कोई किसी पर हमला या तारीफ नहीं करता. हर किसी के अपने संकेत होते हैं.

मुकेश और मांझी के पास है सरकार की चाभी 
243 सीटों वाली बिहार विधान सभा में 122 विधायकों के समर्थन से बिहार में नीतीश कुमार की सरकार चल रही है. इसमें मुकेश सहनी की पार्टी के चार विधायक हैं और जीतन राम मांझी की पार्टी के चार विधायक शामिल हैं. विपक्ष के पास 110 विधायक है. सरकार बनाने के लिए विपक्ष को 12 विधायकों की जरुरत है. ऑल इंडिया मजलिस- ए- इत्तेहादुल मुस्लिमीन पार्टी के भी पांच विधायक है. विपक्ष को भरोसा है कि अगर सरकार बनाने के लिए हम जब दावा पेश करेंगे, तब इनका भी हमें समर्थन प्राप्त हो जाएगा.

हालांकि, नीतीश कुमार लोजपा और बसपा के एक-एक विधायकों को अपने साथ मिलाकर ऑक्सीजन पर चल रही सरकार को वार्ड में जरुर ले लाए हैं. फिर भी अगर मुकेश सहनी ने अगर सरकार से अपना समर्थन वापस लिया तो यह पक्का है कि बिहार में एक बार फिर से राजनीतिक संकट तो जरुर उत्पन्न हो जाएगा..

Tags: Bihar Government, BJP, BJP Allies, BLOGS, Uttar Pradesh Elections

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