वेटलैंड: खतरे में जल और जीवन के स्रोत 

वेटलैंड्स के माध्यम से हमारे पास भरपूर जैवविविधता बची हुई है.

वेटलैंड्स के माध्यम से हमारे पास भरपूर जैवविविधता बची हुई है.

वेटलैंड्स के माध्यम से आज भी हमारे पास भरपूर जैवविविधता बची हुई है. इसको संरक्षित करने की आवश्यकता है. आज जब पारिस्थितिक तंत्र हर तरह से किसी ना किसी मानवीय अतिक्रमण का शिकार है, ऐसे में इन वेटलैंड्स को बचाने का मतलब है आने वाले समय को बचाना.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 24, 2021, 11:26 PM IST
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पारिस्थितिक तंत्र (इकोलॉजी सिस्टम) का संतुलन किसी भी देश या शहर क़े वातावरण के लिए काफ़ी ज़रूरी है. यह विडंबना है कि इसकी अनदेखी की जाती रही है. दुनिया के पारिस्थितिक तंत्र में वेटलैंड्स का बहुत बड़ा योगदान है. ख़ास तौर से उष्ण कटिबंध सदाबहार वन वाले जीव मंडल में वेटलैंड्स बहुत अहम स्थान रखते हैं. पर्यावरण शुद्धि करण, प्रोटीन उत्पादन, चारा की उपलब्धता क़े अलावा बाढ़ के पानी को एकत्रित करने में भी यह सहायक है. इसकी महत्ता को देखते हुए सरकार इसपर समुचित ध्यान देने की कोशिश कर रही है.

प्रदूषण और कीटनाशक खादों की उपयोग की वजह से दशकों से इन जलाशयों को घटिया स्वरूप में धकेल दिया है. एक तरफ़ जहां आने वाले समय में खेती की वजह से पानी की आवश्यकता बढ़ने वाली है, वहीं वेटलैंड्स सूखे की मार झेल रहे हैं. हमारे छोटे छोटे तालाब कई खरपतवार से घिर चुके हैं जिसके कारण वेटलैंड्स लगभग समाप्ति के कगार पर हैं. जलकुंभी व साल्वनिया जैसे प्रजातियां इन वेटलैंड्स का गला घोट रही हैं. हमारे देश भारत में 1550 बड़े जलाशय हैं जो क़रीब 15000000 हेक्टेयर स्थान को जोड़ते हैं, और क़रीब 100000 छोटे दर्जे के जलभंडार हैं जो लगभग 11000000 हेक्टेयर के बराबर हैं.

सिर्फ देश की राजधानी दिल्ली को देखें तो 20 साल पहले दिल्ली में लगभग 900 से अधिक वेटलैंड्स हुआ करते थे लेकिन तेज़ी से हो रहे विकास कार्यों, अवैध निर्माण, अतिक्रमण की वजह से ये धीरे धीरे लुप्त हो गए. अब लगभग 400 वेटलैंड्स ही बचे हैं. वेटलैंड्स सुरक्षित करने के लिए केंद्र सरकार ने वेटलैंड कॉन्जर्वेशन एंड मैनजमेंट रूल्स 2017 तैयार किया. NGT के आदेश पर राजधानी में वेटलैंड को बचाने की लिए दिल्ली सरकार ने अप्रैल 2019 में 23 सदस्यों वाला दिल्ली स्टेट वेटलैंड अथॉरिटी का गठन किया. यह इन वेटलैंड को बचाने वह पुनर्जीवित करने के प्रयास करेगी. दिल्ली सरकार ने यमुना खादर में छोटे छोटे तालाब की योजना बनाई थी, जिसे तेज़ी से क्रियान्वित किया जाना चाहिए.

वेटलैंड्स के माध्यम से आज भी हमारे पास भरपूर जैवविविधता बची हुई है. इसको संरक्षित करने की आवश्यकता है. आज जब पारिस्थितिक तंत्र हर तरह से किसी ना किसी मानवीय अतिक्रमण का शिकार है, ऐसे में इन वेटलैंड्स को बचाने का मतलब है आने वाले समय को बचाना. जितनी भी वर्षाजनित नदियां, कुएं और छोटे तालाब है वो सभी वेटलैंड्स से ही सिंचित होते है. अतः केंद्र व राज्य सरकारों को इन्हें बचाने के लिए गंभीरता बरतनी ही पड़ेगी. उन तमाम नगर पालिकाओं पर नकेल कसनी पड़ेगी जिन्होंने इसे कूड़ा का भंडारण बना दिया है. अगर ऐसा ही चलता रहा तो हम इन्हें ही नहीं, बल्कि पानी के तमाम आधारों को धीरे धीरे गंवा देंगे. ये एक बड़ा पारीस्थितिकीय परिवर्तन होगा. दुनिया में बदलते तापक्रम और जलवायु परिवर्तन के नियंत्रण के लिए इनको संरक्षित करने की ज़रूरत है. अतः दुनिया के तमाम देशों को इन्हें गम्भीरता से लेना ही होगा. (डिस्क्लेमर: यह लेखक के निजी विचार हैं.)
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