नोटबंदी: 15 केस जहां ज्‍वैलर्स, डॉक्‍टर, ट्रेडर्स ने किए करोड़ों के घपले


Updated: November 15, 2017, 5:50 PM IST
नोटबंदी: 15 केस जहां ज्‍वैलर्स, डॉक्‍टर, ट्रेडर्स ने किए करोड़ों के घपले

Updated: November 15, 2017, 5:50 PM IST
गौरव चौधरी, मनीकंट्रोलडॉटकॉम 

नोटबंदी के दौरान किस तरह लोगों ने टैक्‍स डिपार्टमेंट को चकमा देते हुए बड़ी मात्रा में रकम बैंक अकाउंट्स में जमा किए, मनीकंट्रोल के पास इस संबंध में एक्‍सक्‍लूसिव जानकारियां हैं. उसके पास बैंकों में जमा की गई इस रकम से जुड़े ‘ऑपरेशन क्‍लीन मनी’ पर आधारित आईटी डिपार्टमेंट की स्‍टेटस रिपोर्ट की डीटेल्‍स हैं, जिनमें 15 चौंकाने वाले मामले हम यहां पाठकों के लिए ला रहे हैं-

केस 1: हैदराबाद का ज्‍वैलर
हैदराबाद के एक ज्‍वैलर ने उस दौरान 97 करोड़ रुपए के पुराने नोट बैंक अकाउंट्स में जमा किए. जांच के दौरान उन्‍होंने 8 नवंबर, 2016 की रात 9 बजे के बाद 5200 कस्‍टमर्स से गोल्‍ड के बदले ये कैश लेने की बात बताई. हालांकि इस दावे में आईटी विभाग को कई अनियमितताएं भी मिलीं, क्‍योंकि ज्‍वैलर सिर्फ 65 लोगों के ही डिक्‍लरेशन लेटर्स जमा कर पाया.

इसके अलावा, एडवांस सेल की कैश रसीद और सेल इन्‍वॉयस भी 2 लाख रुपए से कम के थे और इनमें पैन की डीटेल्‍स नहीं थीं. वहां तैनात सिक्‍युरिटी गार्ड ने आईटी विभाग से कहा कि 8 नवंबर की रात 8 बजे के बाद कोई भी वहां नहीं आया. सीसीटीवी में भी लोगों के आने का फुटेज नहीं मिला. आईटी विभाग की जानकारी के अनुसार, दो कंपनियों ने पुराने नोट के बदले सोना खरीदने के इस खेल में मदद की. यह मामला ईडी और सीबीआई को रेफर कर दिया गया है.

केस 2: भोपाल के ज्‍वैलर्स
आईटी विभाग के पास 8 नवंबर, 2016 की उस रात के बाद तीन ज्‍वैलर्स की सेल में अचानक आई बड़ी तेजी के बारे में खास खुफिया रिपोर्ट है. लगभग 8 करोड़ टर्नओवर वाले एक ज्‍वैलर्स ने नवंबर के पहले सप्‍ताह में ही 17 करोड़ रुपए से अधिक की सेल कर ली. इनमें 10.7 करोड़ रुपए तो फ्यूचर सेल के बदले दिए गए थे. जांच में पता चला कि बड़ी रकम के बिल को 2 लाख रुपए से कम के कई बिल में बांट दिया गया. यहां तक कि इन बिल पर कस्‍टमर्स के नाम भी आंशिक या अपूर्ण ही पाए गए. इनके अलावा भी धोखाधड़ी के कई मामले सामने आए. उदाहरण के लिए, बिल नंबर 1000 को बिल नंबर 1001 से पहले जारी कर दिया गया. ज्‍वैलर्स ने 15 करोड़ से अधिक की ब्‍लैकमनी की बात स्‍वीकार भी की है.

केस 3: पटियाला का ज्‍वैलर
11 नवंबर, 2016 को पटियाला के एक ज्‍वैलर के बैंक खाते में 11 करोड़ रुपए जमा किए गए. फॉरेंसिक विश्‍लेषण में कुछ डिलीट की गई और कुछ बदली गई फाइलें मिलीं. साफ है कि ज्‍वैलर ने सेल्‍स इन्‍वॉयस के साथ छेड़छाड़ की और उसे 1 अक्‍टूबर, 2016 और 8 नवंबर 2016 के बीच का दिखाया.

केस 4: राजकोट के पेट्रोल पंपराजकोट के 110 से अधिक पेट्रोल पंपों में 9 नवंबर, 2016 और 30 दिसंबर 2016 के बीच 190 करोड़ रुपए जमा किए थे. इन आंकड़ों की 2015 की औसत मासिक सेल से तुलना की गई.

केस 5: दिल्‍ली के बिटुमेन ट्रेडर
8 नवंबर, 2016 के बाद दिल्‍ली के एक बिटुमेन और ज्‍वैलरी ट्रेडर ने कई सारे बैंक खातों में 150 करोड़ रुपए से अधिक जमा किए. सभी कैश डिपॉजिट 199500 रुपए के ही मिले.

केस 6: बेंगलुरु के कॉन्‍ट्रैक्‍टर्स को जमीन आदि की खरीद में अपने खर्च और निवेश को काफी बढ़ा चढ़ाकर दिखाते हुए पकड़ा गया.

इसी तरह का मामला हैदराबाद के एक डॉक्‍टर का है. उसने तीन बैंक अकाउंट्स में 11 करोड़ रुपए से अधिक रकम जमा की. भुवनेश्‍वर के एक सरकारी कर्मचारी और ऑफिस की जांच में पाया गया कि उसने खुद और अपने परिवार के सदस्‍यों के नाम से कई बैंक खातों में आय से काफी अधिक रकम जमा की. उसके पास से कुल मिलाकर 2.28 करोड़ रुपए की कैश जब्‍त की गई.

इसी तरह अलवर के कॉपरेटिव बैंक का मामला भी दिलचस्‍प है. उसके तीन डायरेक्‍टर्स को ले जा रहे एक वाहन से 1.3 करोड़ से अधिक रुपए जब्‍त किए गए. इसी तरह दिल्‍ली के एक कॉपरेटिव बैंक में 8 नवंबर 2016 के बाद 1200 नए अकाउंट् खोले गए और 600 लगभग डॉरमेंट अकाउंट्स अचानक तेज दौड़ने लगे. इसके खातों में 120 करोड़ से अधिक रुपए जमा किए गए.

इस दौरान अमृतसर की एक कंपनी के कर्मचारियों के 700 अकाउंट्स में से हर एक में 2.5 लाख रुपए जमा किए गए. चेन्‍नई के एक ट्रस्‍ट के चेयरमैन को अपने कर्मियों को पुराने नोट बांटते हुए पाया गया, ताकि वे इन्‍हें नए नोटों में तब्‍दील कर दें.

ऐसे ही मामले कोलकाता के एंट्री ऑपरेटर और दिल्‍ली की शेल कंपनी से जुड़े हैं. उत्‍तर-पूर्वी जनजातीय राज्‍यों को इनकम टैक्‍स एक्‍ट के सेक्‍शन 10 (26) से मिली छूट का बेजा फायदा उठाते हुए पाया गया. इन राज्‍यों के लोगों को दिल्‍ली से हेलीकॉप्‍टर के जरिए पुराने नोटों को दीमापुर ले जाते हुए पकड़ा गया था.
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