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अभी सस्ते कर्ज के लिए करना होगा थोड़ा इंतजार

hindi.moneycontrol.com
Updated: December 18, 2012, 2:52 PM IST
अभी सस्ते कर्ज के लिए करना होगा थोड़ा इंतजार
क्रेडिट पॉलिसी में आरबीआई ने रेपो रेट और सीआरआर में कोई कटौती नहीं की है। रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने से आम आदमी के कर्ज पर ईएमआई कम नहीं होगी।

क्रेडिट पॉलिसी में आरबीआई ने रेपो रेट और सीआरआर में कोई कटौती नहीं की है। रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने से आम आदमी के कर्ज पर ईएमआई कम नहीं होगी।

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मुंबई। क्रेडिट पॉलिसी में आरबीआई ने रेपो रेट और सीआरआर में कोई कटौती नहीं की है। रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने से आम आदमी के कर्ज पर ईएमआई कम नहीं होगी। जिससे लोगों को सस्ते कर्ज के लिए थोड़ा और इंतजार करना पडेंगा।

आरबीआई के कदम के बाद देश के 3 बड़े बैंकों स्टेट बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक ने साफ संकेत दिए हैं कि अभी वो कर्ज सस्ता नहीं करेंगे। बैंकों का कहना है कि अभी कॉस्ट ऑफ फंड काफी ज्यादा है। साथ ही बैंकों को नहीं लगता कि लोन ग्रोथ आने वाले समय में जोरदार रहेगी।

स्टेट बैंक के चेयरमैन प्रतीप चौधरी का कहना है कि डिपॉजिट और लेंडिंग रेट में कटौती नहीं करेंगे। बेस रेट में कटौती आरबीआई के कदम पर निर्भर करेगी। एसेट लायबिलिटी कमिटी दरों पर फैसला लेगी।

आईसीआईसीआई बैंक की एमडी एंड सीईओ चंदा कोचर का कहना है कि ब्याज दरों में कटौती कई सारे कदमों पर निर्भर करेगी। बैंकों का कॉस्ट ऑफ फंड अभी काफी ज्यादा है। जनवरी में आरबीआई के कदम का इंतजार होगा। अगली तिमाही से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद है।

एचडीएफसी बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर आदित्य पुरी का कहना है कि बैंकों की लिक्विडिटी की स्थिति अभी ठीक नहीं है। सिस्टम में 20,000-30,000 करोड़ रुपये के नकदी की जरूरत है। कॉस्ट ऑफ फंड घटा तो बेस रेट जरूर घटाएंगे।

बैंकों की मानें तो इंडस्ट्री और बैंकिंग सेक्टर को इस वक्त दरों में कटौती की सख्त जरूरत है। ऐसे में रिजर्व बैंक को तुरंत दरों में कटौती शुरू करनी चाहिए। एसबीआई के मैनेजिंग डायरेक्टर दिवाकर गुप्ता का कहना है कि ऊंची ब्याज दरों से इंडस्ट्री और बैंक परेशान हैं जिस कारण दरों में कटौती जरूरी है।

ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स के सीएमडी एस एल बंसल का मानना है कि आरबीआई ने भले ही दरों में कोई कटौती नहीं की है, लेकिन पिछले 9 महीनों में थोड़ी स्थिरता आई है, ऐसे में बैंक अपनी ओर से ही दरों में कटौती की पहल कर सकते हैं। उनका मानना है कि सरकार सुधार की दिशा में आगे बढ़ रही है और बैंकों की भी इसमें भागीदारी होनी चाहिए।

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First published: December 18, 2012, 2:52 PM IST
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