बढ़ती हुई महंगाई में ‘म्यूचुअल फंड’ जरूरी!

बढ़ती हुई महंगाई में ‘म्यूचुअल फंड’ जरूरी!
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स ऑफ इंडिया (एएमएफआई) इन दिनों टीवी पर विज्ञापन देकर म्यूचुअल फंड की ओर निवेशकों को आकर्षित करने में जुटे हैं।

एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स ऑफ इंडिया (एएमएफआई) इन दिनों टीवी पर विज्ञापन देकर म्यूचुअल फंड की ओर निवेशकों को आकर्षित करने में जुटे हैं।

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नई दिल्ली। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स ऑफ इंडिया (एएमएफआई) इन दिनों टीवी पर विज्ञापन देकर म्यूचुअल फंड की ओर निवेशकों को आकर्षित करने में जुटे हैं। विज्ञापन में म्यूचुअल फंड को बचत के नए तरीके के रूप में पेश किया जाता है। साथ ही महंगाई से लड़ने का विकल्प बताया गया है और निवेशकों को बाजार के उतार-चढ़ाव न डरने की सलाह दी गई है। म्यूचुअल फंड निवेश का अच्छा विकल्प है। लेकिन, क्या ये हमेशा सफल होता है?

इसको समझने के लिए कुछ म्यूचुअल फंड के पिछले 5 साल के प्रदर्शन को देखना होगा। म्यूचुअल फंड के लिए निवेशकों को रिटर्न देने के लिए 5 साल का वक्त काफी है। एस्कॉर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, जेएम बेसिक, एलएंडटी इंफ्रास्ट्रक्चर, एस्कॉर्ट्स टैक्स प्लान, सुंदरम कैपेक्स ऑपूर्च्यूनिटी रेगुलर ने 5 साल में -15.5 फीसदी से -9 फीसदी का रिटर्न दिया है। एसबीआई म्यूचुअल फंड का भी एसबीआई इंफ्रास्ट्रक्चर फंड ने भी नेगेटिव रिटर्न दिया है।

इन फंड के प्रदर्शन को देखते हुए म्यूचुअल फंड को महंगाई का इंजेक्शन कहना गलत होगा। बिना वित्तीय सलाहकार से राय लिए म्यूचुअल फंड में पैसा लगाकर निवेशक निवेश गंवा बैठ सकते हैं। यही परेशानी म्यूचुअल फंड निवेशकों को सता रही है। इसकी वजह से म्यूचुअल फंड के इक्विटी स्कीम से निवेशक पैसा निकाल रहे हैं। म्यूचुअल फंड का प्रदर्शन न सिर्फ बाजार के हालात पर, बल्कि फंड मैनेजर की काबिलयत भी निर्भर करता है। म्यूचुअल फंड का चुनाव करते वक्त सावधानी बरतना ही समझदारी है।

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