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कचरे से गैस बनाने के लिए 2 लाख करोड़ रुपये होगा खर्च, किसानों को मिलेगा सबसे बड़ा फायदा

इस प्लांट में कई तरह के कचरे से गैस ​तैयार किया जाएगा.
इस प्लांट में कई तरह के कचरे से गैस ​तैयार किया जाएगा.

कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) को बढ़ावा देने के लिए सरकार एक खास पहल पर काम कर रही है. इसके तहत करीब 2 लाख करोड़ रुपये खर्च कर 5000 CBG प्लांट्स लगाए जाएंगे. इन प्लांट्स में कृषि, जंगल, पशुपालन, समुद्र और नगरपालिका से निकलने वाले कचरे की मदद से गैस तैयार किया जाएगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 23, 2020, 12:45 PM IST
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नई दिल्ली. अब देश में किफायती एवं स्वच्छ ईंधन मुहैया कराने के लिए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (Ministry of Petroleum and Natural Gas) एक खास पहल पर काम कर रही है. इस पहल के तहत 2 लाख करोड़ रुपये खर्च कर देशभर में 5,000 कम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट्स (CBG Plants) लगाने की तैयारी है. इन प्लांट्स में साल 2023-24 तक फसलों के कचरे की मदद से ईंधन तैयार किया जाएगा. पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) ने इस बारे में जानकारी दी है. देश में किफायती एवं स्वच्छ परिवहन ईंधन के लिए अडानी गैस (Adani Gas) और टोरेंट गैस (Torrent Gas) के साथ करार हुआ है. ये कंपनियां 900 कम्प्रेस्ड बायो गैस प्लांट्स लगाएंगी.

केंद्र सरकार की सतत वैकल्पिक किफायती परिवहन (SATAT) पहल के तहत 2023-24 तक देशभर में 5,000 CBG प्लांट्स लागए जाएंगे. एक आधिकारिक बयान में जानकारी दी गई है कि इसके जरिए कुल उत्पादन का लक्ष्य 15 मिलियन टन का रखा गया है.

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1500 सीबीजी प्लांट्स पर काम चल रहा
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, 'SATAT के लिए हमने एक स्पष्ट रोडमैप तैयार कर लिया है. 600 CBG प्लांट्स के लिए लेटर ऑफ इंटेंट पहले ही जारी हो चुका है. साथ ही 900 गैस प्लांट्स के लिए सह​मति पत्र पर हस्ताक्षर हो गए हैं. वर्तमान में कुल 1,500 CBG प्लांट्स विभिन्न चरण में हैं.' उन्होंने आगे कहा कि इन 900 CBG प्लांट्स में कुल 30,000 करोड़ रुपये के निवेश की तैयारी है. साथ ही, कुल 5,000 CBG प्लांट्स पर करीब 2 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.

कचरे से तैयार होगा गैस
इन CBG प्लांट्स में तैयार होने वाले गैस का इस्तेमाल ऑटोमोबाइल्स में ईंधन के रूप में किया जाएगा. बायो ईंधन में क्षमता है कि देश में ईंधन आयात बिल को 1 लाख करोड़ रुपये तक कम कर सकें. SATAT पहल के जरिए नगरपालिका के साथ-साथ जंगल और कृषि क्षेत्र से निकलने वाले कचरे की मदद से गैस तैयार किया जाएगा. इसमें पशुपालन एवं समुद्री कचरे का इस्तेमाल भी गैस बनाने के लिए किया जाएगा.

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दरअसल, भारत सरकार की ओर से 1 अक्टूबर 2018 को परिवहन क्षेत्र के लिए एक वैकल्पिक और स्वच्छ ईंधन के उत्पादन और CBG की उपलब्धता को बढ़ाने के लिए SATAT की पहल शुरू की गई थी. यह योजना 2023-24 तक 5 हजार सीबीजी संयंत्रों की स्थापना का लक्ष्य है. सहमति पत्र पर हस्ताक्षर होने से सरकार की स्वच्छ ऊर्जा पहल को एक बड़ी उपलब्धि मिलेगी.
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