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विप्रो और टेक महिंद्रा अपने 52 सप्ताह के हाई से 40 फीसदी लुढ़के, क्या अब कर सकते हैं खरीदारी?

विप्रो और टेक महिंद्रा में भारी करेक्शन हुआ है.

विप्रो और टेक महिंद्रा में भारी करेक्शन हुआ है.

शेयर मार्केट की वोलैटिलिटी के बीच देश की प्रमुख आईटी कंपनियों में शामिल विप्रो और टेक महिंद्रा के शेयर अपने 52 सप्ताह के उच्च स्तर से करीब 38-40 फीसदी लुढ़क चुके हैं. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इतना करेक्शन के बाद ये शेयर अब खरीदारी के लिए आकर्षक हो गए हैं.

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नई दिल्ली . शेयर मार्केट में अस्थिरता यानी वोलैटिलिटी अपने चरम पर है. इसका असर निफ्टी के शेयरों पर भी पड़ा है. स्थिति यह है कि निफ्टी में शामिल आईटी सेक्टर की दो दिग्गज कंपनियों के शेयर अपने 52 सप्ताह हाई से 38-40 फीसदी लुढ़क गए हैं. आपको बता दें कि निफ्टी पैक में विप्रो का स्टॉक सबसे खराब प्रदर्शन करने वालों में से एक रहा है. यह स्टॉक अपने 52 सप्ताह हाई से करीब 38 फीसदी नीचे है. वहीं, इसमें दूसरा शेयर टेक महिंद्रा है. इसमें भी विप्रो की तरह गिरावट आई है.

विशेषज्ञों के अनुसार, जो निवेशक इनमें से कोई भी शेयर खरीदना चाहते हैं, उन्हें कम संख्या में ही इन्हें खरीदना चाहिए. 29 दिसंबर, 1945 में स्थापित विप्रो के मामले में दो बातों से निवेशक चिंतित रहते हैं. इनमें पहली कंपनी की ग्रोथ का मसला है, जबकि दूसरी भविष्य में आईटी इंडस्ट्री के सामने आने वाली समस्याएं हैं. जहां तक पहले मुद्दे का सवाल है, तो निवेशकों को यह चिंता सता रही है कि अमेरिका में ब्याज दरों में अपेक्षा से अधिक तेजी से वृद्धि मंदी की ओर ले जाएगी. इससे खर्च पर प्रभाव कर पड़ सकता है.

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क्या विप्रो के शेयर खरीदने चाहिए?
सवाल उठता है कि ऐसी स्थिति में क्या विप्रो के शेयर खरीदने चाहिए? निश्चित तौर पर यह अपने 52 सप्ताह की हाई से करीब 38 फीसदी गिर चुकी है. इसमें बावजूद इसमें कोई शक नहीं है कि इस शेयर में कुछ मूल्य है. इसके लिए, आइए पहले कंपनी की चौथी तिमाही रिजल्ट पर चर्चा करते हैं. देश की प्रमुख आईटी कंपनी विप्रो ने मार्च में समाप्त होने वाली तिमाही में लिए 4 फीसदी की वृद्धि के साथ 3,092.5 करोड़ रुपये नेट प्रॉफिट दर्ज किया.

कंपनी ने एक साल पहले की समान तिमाही में 2,974.1 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था. यही नहीं, विप्रो का ऑपरेशंस से रेवेन्यू करीब 28.4 फीसदी बढ़कर 20,860 करोड़ रुपये हो गया. एक साल पहले की समान अवधि में यह 16,245.4 करोड़ रुपये था. बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, कीमत में गिरावट के बाद विप्रो के शेयर आकर्षक हैं. निवेशक इसे खरीद सकते हैं.

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भारी गिरावट नहीं चौंकाती
टेक महिंद्रा के शेयर में गिरावट विप्रो की तरह ही है. हालांकि, फंडामेंटल रूप से देखें, तो यह स्टॉक 52 सप्ताह की हाई बनाने लायक नहीं था. ऐसे में इसमें भारी गिरावट कोई चौंकाने वाली बात नहीं है. हालांकि, शेयर में गिरावट ने इसे खरीदने के लिए आकर्षक बना दिया है. विशेषज्ञ कंपनी का बिजनेस आलटलुक अच्छा मान रहे हैं. बाजार विशेषज्ञों ने गुडरिटर्न्स को बताया कि वे आने वाली तिमाहियों में सप्लाई साइड के मुद्दों के कारण मार्जिन दबाव कम होने की उम्मीद कर रहे हैं.

(Disclaimer: यहां बताए गए स्‍टॉक्‍स ब्रोकरेज हाउसेज की सलाह पर आधारित हैं. यदि आप इनमें से किसी में भी पैसा लगाना चाहते हैं तो पहले सर्टिफाइड इनवेस्‍टमेंट एडवायजर से परामर्श कर लें. आपके किसी भी तरह के लाभ या हानि के लिए News18 जिम्मेदार नहीं होगा.)

Tags: Share market, Tech mahindra, Wipro

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