मुफ्त अनाज बांटने में भी ये बड़े राज्य पिछड़े, फजीहत से बचने के लिए बचे हैं मात्र इतने दिन

कुछ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने अनाज का वितरण 50 प्रतिशत से भी कम किया था.

खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों की मानें तो 8 करोड़ प्रवासी मजदूरों (Migrant Workers) और अन्य जरूरतमंदों के लिए आत्मनिर्भर भारत पैकेज (Aatm Nirbhar Bharat Package) के तहत मई, जून में 5 किलो अनाज प्रति व्यक्ति मुफ्त दिया जाना था, लेकिन 26 राज्यों ने वितरण पूरा नहीं किया.

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नई दिल्ली. पिछले महीने मोदी सरकार (Modi Government) ने लॉकडाउन के दौरान 8 करोड़ से ज्यादा प्रवासी मजदूरों (Migrant Workers) को आत्मनिर्भर पैकेज (Aatm Nirbhar Bharat Package) के तहत मिलने वाली मुफ्त राशन स्कीम (Free Ration Scheme) की समय-सीमा एक महीने के लिए बढ़ा दी थी. सरकार ने यह समय सीमा इसलिए बढ़ाई थी क्योंकि कुछ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने अनाज का वितरण 50 प्रतिशत से भी कम किया था. मोदी सरकार ने यह समय सीमा 31 अगस्त तक बढाई थी. अब उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने इन 26 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश को हर हालत में अनाज वितरण का लक्ष्य पूरा करने को कहा है. अनाज का वितरण पूरा करने के लिए इन राज्यों के पास अब मात्र 30 दिन बचे हैं.

26 राज्यों को 31 अगस्त तक अनाज वितरण का लक्ष्य पूरा करना होगा
बता दें कि 8 करोड़ प्रवासी मजदूरों और अन्य जरूरतमंदों के लिए आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत मई, जून में 5 किलो अनाज प्रति व्यक्ति मुफ्त दिया जाना था, लेकिन 26 राज्यों ने वितरण पूरा नहीं किया. खाद्य एवं उपभोक्ता मंत्रालय का दावा है कि देश में नवंबर महीने तक खाद्यान्न वितरण में कुल 203 लाख मैट्रिक टन आनाज खर्च होना है लेकिन, देश के 7 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश ऐसे हैं जो अभी तक प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत 90 प्रतिशत से भी कम अनाज का वितरण किया है. मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और सिक्किम जैसे राज्यों ने तो 75 प्रतिशत से भी कम खाद्यान्न वितरण किया है.



एफसीआई गोदामों में अनाज का पर्याप्त भंडार
पिछले दिनों उपभोक्ता मामले के मंत्री रामविलास पासवान ने सभी राज्यों से पीएमजीकेएवाई के दूसरे चरण के तहत मुफ्त अनाज वितरण समय सुनिश्चित करने के लिए भारतीय खाद्य निगम (FCI) के गोदामों से अनाज का उठाव करने का भी आग्रह किया है. पासवान ने कहा कि एफसीआई गोदामों में अनाज का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है. नवंबर महीने त इस योजना के तहत अनाज की कमी नहीं होने देंगे.

सरकार इस योजना का शत प्रतिशत वित्तीय भार वहन कर रही है
भारत सरकार इस योजना का शत प्रतिशत वित्तीय भार वहन कर रही है जो लगभग 46, 000 करोड़ रुपये है. PMGKAY के तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को उनकी मांग के मुताबिक गेहूं अथवा चावल दिए जाने का निर्णय खाद्य एवं वितरण विभाग द्वारा लिया जा रहा है. अप्रैल, मई और जून महीने में देश के 7 राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों ने PMGKAY के तहत 90% से कम अनाज का वितरण किया है. दादर नगर हवेली तथा दमण-दीव ने 87 प्रतिशत, महाराष्ट्र ने 87% झारखंड ने 87% बिहार ने 86% मध्य प्रदेश ने 74% सिक्किम ने 68% और पश्चिम बंगाल ने 66 प्रतिशत अनाज का वितरण किया है.

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कोरोना के बाद स्कीम की घोषणा हुई थी
देश में कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी को देखते 25 मार्च 2020 को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना की घोषणा की गई थी. इसके तहत देश के 80 करोड़ से अधिक राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) लाभुकों को उनके मासिक पात्रता के अलावा प्रति व्यक्ति 5 किलो गेहूं अथवा चावल तथा प्रत्येक परिवार को 1 किलो दाल मुफ्त में उपलब्ध कराया जाना शरू हुआ था. 30 जून को एक बार फिर से पीएम मोदी (PM Modi) ने देश के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के जरिए देश के गरीबों को नवंबर महीने तक मुफ्त में अनाज देने का ऐलान किया था.

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