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केंद्र सरकार के इस फैसले से 3 लाख व्यापारियों को मिली राहत, जाने पूरा मामला

सरकार ने नेशनल कैपिटल टेरिटरी कानून को तीन साल तक के लिए बढा़ने का ऐलान किया.

सरकार (Govt) ने नेशनल कैपिटल टेरिटरी कानून (Capital Territory Law) को तीन साल तक के लिए बढा़ने का ऐलान किया है. इस कदम से दिल्ली के व्यापारियों को सीलिंग (sealing) और तोड़-फोड़ से बचाया जा सकेगा.

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नई दिल्ली. नए वर्ष पर केंद्र की मोदी सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के व्यापारियों को बड़ी सौगात दी है. सरकार ने नेशनल कैपिटल टेरिटरी कानून को तीन साल तक के लिए बढा़ने का ऐलान किया है. इस कदम से दिल्ली के व्यापारियों को सीलिंग और तोड़-फोड़ से बचाया जा सकेगा. व्यापारी संगठन कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्ज़ (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि व्यापारी इसकी मांग लगातार कर रहे थे और केंद्र सरकार ने इसके मद्देनजर नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. नोटिफिकेशन आने के बाद यह कानून अब 31 दिसंबर 2023 तक लागू रहेगा. आपको बता दे कि साल 2011 से प्रभावी नेशनल कैपिटल टेरिटरी ऑफ दिल्ली लॉ (स्पेशल प्रोविजन) एक्ट 31 दिसंबर 2020 को समाप्त हो रहा था, जिसे तीन साल के लिए बढ़ा दिया गया है.

व्यापारियों ने जताया आभार - कैट की मांग को पूरा करने पर व्यापारियों ने शहरी विकास व आवासन मंत्री हरदीप सिंह पुरी का आभार जताया है. इस कानून के जारी रहने से दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे करीब 3 लाख से अधिक व्यापारियों को सीलिंग और तोड़-फोड़ से बड़ी राहत मिलेगी. यहीं नहीं इन व्यापारियों से जुड़े करीब 10 लाख से अधिक कर्मचारी भी बेरोजगार होने से बच पायेंगे. कैट ने इसके लिए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी से गत अक्टूबर में कानून को जारी रखने का अनुरोध किया था. और तब केंद्रीय मंत्री ने दिल्ली के व्यापारियों को उचित समय पर कदम उठाने का आश्वासन दिया था.

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व्यापारियों ने केंद्र सरकार के सामने यह मांग भी रखी- सीलिंग और तोड़-फोड़ से मिली राहत के बाद दिल्ली के व्यापारियों ने एक एमनेस्टी स्कीम की घोषणा किए जाने की मांग की है. ताकि व्यापारियों को इन समस्याओं से स्थायी समाधान मिल सके. गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली कानून (विशेष प्रावधान) अधिनियम को पहली बार साल 2011 में लागू किया गया था.

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आपको बता दें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा साल 2014 में दिल्ली की गद्दी संभालते ही इस कानून को 2017 तक के लिए बढ़ा दिया था. जिसके बाद 31 दिसंबर 2020 तक इसकी मियाद खत्म हो रही थी. यह अधिनियम अतिक्रमण के चलते सिलिंग के कहर से झुग्गी-झोपड़ियों, अनाधिकृत कॉलोनियों, गांव आबादी क्षेत्र (शहरी गांव सहित), फार्म हाउस और उनके द्वारा किया गया निर्माण कार्य, स्कूल, औषधालय (डिस्पेंसरी), धार्मिक संस्थाएं, सांस्कृतिक संस्थाएं, कृषि भूमि पर बने भंड़ारण का सीलिंग से सीधे राहत देता है.
Published by:Kanhaiya Pachauri
First published: