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नोटबंदी के 3 साल: टैक्सपेयर्स की संख्या से लेकर​ डिजिटल पेमेंट तक बढ़ा, लेकिन अर्थव्यवस्था को झटका भी लगा

News18Hindi
Updated: November 8, 2019, 10:10 PM IST
नोटबंदी के 3 साल: टैक्सपेयर्स की संख्या से लेकर​ डिजिटल पेमेंट तक बढ़ा, लेकिन अर्थव्यवस्था को झटका भी लगा
नोटबंदी के 3 साल

8 नवंबर 2016 को केंद्र सरकार द्वारा किए गए नोटबंदी (Demonetisation) के बाद देश में डिजिटल पेमेंट (Digital Payment) से लेकर टैक्सपेयर्स (Taxpayers) की संख्या में भी इजाफा हुआ है. लेकिन, इस बीच अर्थव्यवस्था को भी झटके भी लगे हैं.

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  • Last Updated: November 8, 2019, 10:10 PM IST
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नई दिल्ली. आज से ठीक तीन साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने राष्ट्र के नाम संबोधन में ऐलान किया था कि चलन में 500 और 1,000 रुपये के नोट बंद हो जाएंगे. अब तीन साल पूर होने के बाद नोटबंदी (Demonetisation) को लेकर कई तरह के आंकड़े पेश किए जा रहे हैं. कई अथॉरिटीज ने अपने आंकड़ों में कहा कि नोटबंदी के बाद टैक्सपयेर्स की संख्या (Number of Taxpayers) में इजाफा हुआ है, डिजिटल पेमेंट (Digital Payment) का चलन बढ़ा है और कई अवैध कंपनियां बंद हुईं हैं. याद दिला दें कि पीएम मोदी के इस ऐलान के बाद आम लोगों को 50 दिन का समय दिया गया था कि वे बैंकों व पोस्ट ऑफिस (Post Office) में जाकर 500 और 1,000 रुपये के नोटों को बदलवा लें. सरकार ने यह कदम देश की अर्थव्यवस्था (Indian Economy) को दीमक की तरह चाट रहे सामानान्तर अर्थव्यव्सथा को जड़ से खत्म करने के उद्देश्य से उठाया था.

कम नकदी वाली अर्थव्यवस्था बनाना भी था लक्ष्य
हालांकि, बड़े स्तर पर देखें तो 500 और 1000 रुपये ककी पुरानी करंसी को पूरी तरह से अवैध करार देने के बाद अर्थव्यस्था को झटके भी लगे, जिसमें आम लोगों से लेकर कॉरपोरेट इन्वेस्टमेंट (Corporate Investment) तक को झटका लगा था. आलोचकों ने कहा कि देश में अभी भी नोटबंदी का असर देखने को मिल रहा है. सरकार ने यह कदम इसलिए भी उठाया था ताकि देश की अर्थव्यवस्था को धीरे-धीरे कम से कम नकदी के इस्तेमाल वाली अर्थव्यवस्था बनाया जाए.

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डेबिट कार्ड के इस्तेमाल हुआ इजाफा
8 नवंबर 2016 को हुए नोटबंदी के बाद प्वाइंट ऑफ सेल्स (Point of Sales) पर डेबिट कार्ड (Debit Card Users) की संख्या में 83 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) द्वारा हाल ही में जारी किए गए आंकड़े के मुताबिक, नवंबर 2016 में डेबिट कार्ड से लेनदेन की संख्या 234.7 मिलियन से बढ़कर अगस्त 2019 में 428.7 मिलियन हो गया है. इसी प्रकार, NEFT के जरिए ऑनलाइन बैंकिंग (Online Banking) बिजनेस में भी इजाफा हुआ है. यह नवंबर 2016 के मुकाबले 80 फीसदी बढ़कर 221.1 मिलियन हो गया है. IMPS जो कि इलेक्ट्रॉनिक माध्यम है, इसमें भी इजाफा देखने को मिला है.
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बैंकों में संदेहात्मक लेनदेन की संख्या में इजाफा
मनीकंट्रोल ने अपनी एक रिपोर्ट में सरकारी सूत्रों के हवाले से लिखा है कि नोटबंदी के बाद 8 नवंबर से लेकर 30 दिसंबर 2016 तक कुल 25 लाख रुपये की नकदी 4.62 लाख बैंक अकाउंट्स में जमा किए गए थे. 50 दिनों के अंदर 23.87 लाख खातों में 5 लाख रुपये की नकदी जमा की गई थी. बैंकों ने भी वित्त वर्ष 2016-17 और 2017-18 के बीच कुछ खातों में पहले की तुलना में संदेहात्मक लेनदेन को नोटिस किया था.

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टैक्सपेयर्स का संख्या में बढ़ोतरी
फाइनेन्शियल इंटेलीजेंस यूनिट (Financial Intelligence Unit) के मुताबिक, नोटबंदी के ठीक बाद वाले वित्त वर्ष में बैंक और वित्तीय संस्थानों (Financial Institutions) ने 14.36 लाख संदेहात्मक लेनदेन को रिपोर्ट किया था. वित्त वर्ष 2016-17 में यह 4.73 लाख और वित्त वर्ष 2015-16 में यह 1.05 लाख था. सबसे अधिक इजाफा बैंकों में होने वाले लेनदेन में देखने को मिला. इसके बाद टैक्स में गड़बड़ी करने वाले अधिकतर लोगों को टैक्स जमा करने के लिए बाध्य होना पड़ा. इससे बीते तीन साल में देश के टैक्स आधार बढ़ाने में मदद मिली है.

देशभर में व्यक्गित, फर्म्स और अन्या ईकाईयां शामिल द्वारा टैक्स जमा करने की संख्या में इजाफा हुआ है. आंकड़े के मुताबिक, वित्त वर्ष 2015-16 में इसकी संख्या 57.9 मिलियन थी जो कि वित्त वर्ष 2018-19 में बढ़कर 80.4 मिलियन हो गई है यानी 38 फीसदी का इजाफा हुआ है.

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First published: November 8, 2019, 10:06 PM IST
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