मोदी सरकार की इस योजना से इस सेक्टर में पैदा होंगी 35 लाख नौकरियां, दिया 15000 करोड़ रुपये का फंड

मोदी सरकार की इस योजना से इस सेक्टर में पैदा होंगी 35 लाख नौकरियां, दिया 15000 करोड़ रुपये का फंड
मोदी सरकार की इस योजना से इस सेक्टर में पैदा होंगी 35 लाख नौकरियां, जानें कहां

कैबिनेट मीटिंग में ब्याज सब्सिडी योजना के साथ 15,000 करोड़ रुपये के बुनियादी ढांचा विकास कोष की घोषणा की है. जिसका उद्देश्य डेयरी, मांस प्रसंस्करण और पशु चारा संयंत्रों में निजी कारोबारियों और MSME के निवेश को प्रोत्साहित करना है. इस पहल से 35 लाख नए रोजगार के मौके युवाओं के लिए बनेंगे.

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नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने बुधवार को हुई कैबिनेट मीटिंग में ब्याज सब्सिडी योजना के साथ 15,000 करोड़ रुपये के बुनियादी ढांचा विकास कोष की घोषणा की है. जिसका उद्देश्य डेयरी, मांस प्रसंस्करण और पशु चारा संयंत्रों में निजी कारोबारियों और MSME के निवेश को प्रोत्साहित करना है. इस पहल से 35 लाख नए रोजगार के मौके युवाओं के लिए बनेंगे. बता दें कि यह फंड, लॉकडाउन से प्रभावित लोगों की मदद करने के लिए मई में घोषित 20 लाख करोड़ रुपये के प्रोत्साहन पैकेज का हिस्सा है.

प्राइवेंट कंपनियों को मिलेगी ब्याज में 3 फीसदी की छूट
पशुपालन मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि नया इंफ्रास्ट्र्क्चर फंड 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज का हिस्सा है, जो लॉकडाउन के कारण प्रभावित लोगों की मदद करने के लिए घोषित किया गया है ताकि COVID-19 के प्रसार को रोका जा सके. उन्होंने कहा, पहली बार हम डेयरी, पोल्ट्री और मांस के लिए प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना के लिए प्राइवेट कंपनियों को 3 प्रतिशत तक इंटरेस्ट सबवेंशन देंगे. उन्होंने कहा, इस सेक्टर में प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर लगाने वालों को अपनी तरफ से सिर्फ 10 फीसदी पूंजी लगानी होगी. बाकी 90 फीसदी लोन सरकार देगी. इससे इस सेक्टर में 35 लाख नए रोजगार पैदा होंगे.

पहली बार ऐसा कर रही है सरकार
उन्होंने कहा कि पहली बार, हम डेयरी, पोल्ट्री और मांस प्रसंस्करण के बुनियादी ढांचे की स्थापना के लिए निजी कारोबारियों को तीन प्रतिशत तक ब्याज सहायता देंगे. एक सरकारी बयान में, सरकार ने कहा कि गैर-आकांक्षात्मक जिलों से पात्र लाभार्थियों को तीन प्रतिशत ब्याज सहायता दी जायेगी जबकि आकांक्षात्मक जिलों के लाभार्थियों को लगभग चार प्रतिशत की ब्याज सहायता दी जाएगी. देश में लगभग 115 आकांक्षी जिले हैं जो खराब सामाजिक-आर्थिक संकेतकों से प्रभावित हैं.
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