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नई विदेश व्यापार नीति से क्या हैं उम्मीदें!

नई विदेश व्यापार नीति से क्या हैं उम्मीदें!

आखिरकार 1 साल लटकने के बाद 1 अप्रैल से नई विदेश व्यापार नीति आ जाएगी। इस मुद्दे पर एफआईईओ के डीजी अजय सहाय ने सीएनबीसी आवाज के साथ खास बातचीत की।

आखिरकार 1 साल लटकने के बाद 1 अप्रैल से नई विदेश व्यापार नीति आ जाएगी। इस मुद्दे पर एफआईईओ के डीजी अजय सहाय ने सीएनबीसी आवाज के साथ खास बातचीत की।

आखिरकार 1 साल लटकने के बाद 1 अप्रैल से नई विदेश व्यापार नीति आ जाएगी। इस मुद्दे पर एफआईईओ के डीजी अजय सहाय ने सीएनबीसी आवाज के साथ खास बातचीत की।

    नई दिल्ली। आखिरकार 1 साल लटकने के बाद 1 अप्रैल से नई विदेश व्यापार नीति आ जाएगी। लेकिन इस नई पॉलिसी से क्या एक्सपोर्टरों को बड़ी राहत मिलेगी, क्या मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिलेगा, क्या नई पॉलिसी से मेक इन इंडिया को बूस्ट मिलेगा, इन सब पर डीटेल पर एफआईईओ के डीजी अजय सहाय ने सीएनबीसी आवाज के साथ खास बातचीत की।

    अजय सहाय ने बताया कि नई विदेश व्यापार नीति वित्त वर्ष 2015-20 तक 5 साल के लिए होगी। इस नई पॉलिसी में मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने पर खास जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि भागीदार देशों की तुलना में भारत में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का इस्तेमाल सबसे कम होता है। जिसको देखते हुए सरकार की नई निति के तहत फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल की कोशिश की जाएगी। अजय सहाय ने ये भी कहा कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट में चमड़ा और हस्तशिल्प जैसे लेबर इंसेंटिव सेक्टरों को बढ़ावा दिया जाएगा।

    अजय सहाय ने बताया कि सरकार अपनी नई विदेश व्यापार नीति के तहत मैन्युफैक्चरिंग में इंजीनियरिंग प्रोडक्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक गुड्स को बढ़ावा देगी और टेक्सटाइनल एक्सपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण सेक्टरों पर खास फोकस करेगी।

    अजय सहाय के मुताबिक नई पॉलिसी में मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया जैसी योजनाओं को बढ़ावा देने के लिए व्यापार आसान करने की कोशिश की गई है। अप्रैल 2014 से फरवरी 2015 तक भारत से 286.58 अरब डॉलर का एक्सपोर्ट किया गया। जबकि वित्त वर्ष 2013-14 में 314.40 बिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट किया गया है।

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