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393 इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की लागत 4.65 लाख करोड़ रुपये बढ़ी, 42 महीने की है औसत देरी

647 प्रोजेक्ट्स देरी से चल रही हैं.

647 प्रोजेक्ट्स देरी से चल रही हैं.

सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (Ministry of Statistics and Programme Implementation) 150 करोड़ रुपये या इस ...अधिक पढ़ें

नई दिल्ली. इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की 150 करोड़ रुपये या इससे अधिक के खर्च वाली 393 प्रोजेक्ट्स की लागत तय अनुमान से 4.65 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा बढ़ गई है.सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (Ministry of Statistics and Programme Implementation) की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है. देरी और अन्य कारणों की वजह से इन प्रोजेक्ट्स की लागत बढ़ी है.

सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय 150 करोड़ रुपये या इससे अधिक की लागत वाली इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की निगरानी करता है. मंत्रालय की अगस्त, 2022 की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह की 1,526 प्रोजेक्ट्स में से 393 की लागत बढ़ गई है, जबकि 647 प्रोजेक्ट्स देरी से चल रही हैं.

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रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘इन 1,526 प्रोजेक्ट्स के क्रियान्वयन की मूल लागत 21,26,460.93 करोड़ रुपये थी, लेकिन अब इसके बढ़कर 25,91,823.45 करोड़ रुपये हो जाने का अनुमान है. इससे पता चलता है कि इन प्रोजेक्ट्स की लागत 21.88 फीसदी यानी 4,65,362.52 करोड़ रुपये बढ़ गई है.’’

 अगस्त, 2022 तक खर्च हो चुके हैं 13.60 लाख करोड़ 
रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त, 2022 तक इन प्रोजेक्ट्स पर 13,60,645.94 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, जो कुल अनुमानित लागत का 52.49 फीसदी है. हालांकि, मंत्रालय ने कहा है कि यदि प्रोजेक्ट्स के पूरा होने की हालिया समय सीमा के हिसाब से देखें तो देरी से चल रही प्रोजेक्ट्स की संख्या कम होकर 500 पर आ जाएगी.

647 प्रोजेक्ट्स में हो रहे विलंब का औसत 41.64 महीने
वैसे रिपोर्ट में 607 प्रोजेक्ट्स के चालू होने के साल के बारे में जानकारी नहीं दी गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि देरी से चल रही 647 प्रोजेक्ट्स में से 132 प्रोजेक्ट्स एक महीने से 12 महीने, 118 परियोजनाएं 13 से 24 महीने की, 273 प्रोजेक्ट्स 25 से 60 महीने की और 124 प्रोजेक्ट्स 61 महीने या अधिक की देरी से चल रही हैं. इन 647 प्रोजेक्ट्स में हो रहे विलंब का औसत 41.64 महीने है.

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भूमि अधिग्रहण में देरी भी है वजह
इन प्रोजेक्ट्स में देरी के कारणों में भूमि अधिग्रहण में विलंब, पर्यावरण और वन विभाग की मंजूरियां मिलने में देरी और बुनियादी संरचना की कमी प्रमुख है. इनके अलावा प्रोजेक्ट्स का वित्तपोषण, विस्तृत अभियांत्रिकी को मूर्त रूप दिये जाने में विलंब, प्रोजेक्ट की संभावनाओं में बदलाव, निविदा प्रक्रिया में देरी, ठेके देने व उपकरण मंगाने में देरी, कानूनी व अन्य दिक्कतें, अप्रत्याशित भू-परिवर्तन आदि की वजह से भी इन प्रोजेक्ट्स में विलंब हुआ है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कोविड-19 की वजह से विभिन्न राज्यों में लगाए गए लॉकडाउन से भी प्रोजेक्ट्स में देरी हुई है.

Tags: Business news in hindi, Infrastructure Projects

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