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4-डे वर्किंग से बढ़ जाएगी कंपनियों की कमाई! कर्मचारी भी भूल जाएंगे वर्क फ्रॉम होम, रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा

4-डे वर्क वीक को लेकर शोध अभी जारी रहेंगे. (फोटो- न्यूज18)

4-डे वर्क वीक को लेकर शोध अभी जारी रहेंगे. (फोटो- न्यूज18)

हफ्ते में 4 दिन काम को लेकर हुए ट्रायल के शुरुआती नतीजों में कंपनी और कर्मचारी दोनों के लिए जबरदस्त नतीजे देखने को मिले ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

कंपनियों ने इस ट्रायल को औसतन 10 में से 7.5 अंक दिए हैं.
इससे लोगों की कार्यक्षमता और कंपनियों का रेवेन्यू बढ़ा है.
नए वर्क वीक ट्रायल के दौरान लोगों ने छुट्टियां लेना भी कम कर दिया.

नई दिल्ली. हफ्ते में 4 दिन काम और 3 दिन छुट्टी के फॉर्मूले पर पूरी दुनिया में बहस शुरू हो चुकी है. 4-डे वर्किंग पर किए गए एक बड़े शोध के नतीजे हाल ही में आए हैं और इसने सबको चौंका दिया है. इसमें बताया गया है कि कंपनियां सप्‍ताह में 4 वर्किंग डेज रखें तो उनकी कमाई बढ़ जाएगी. इससे कर्मचारियों की उत्‍पादका बढ़ेगी और वे ज्‍यादा मन लगाकर काम कर सकेंगे. शोध में वर्क फ्रॉम होम के बाद कर्मचारियों को वापस ऑफिस बुलाने की उलझन का भी हल बताया गया है.

यह 4-डे वर्किंग वीक को लेकर पहली इतने बड़े स्तर का शोध था. इसमें 33 कंपनियों ने हिस्सा लिया और इसके नतीजे मंगलवार को सामने आए थे. शोध के नतीजों में पाया गया कि नए वर्क वीक में कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ी, अवकाश घटा, और कंपनियों का टर्नओवर बढ़ गया है. साथ ही जो कर्मचारी इस नहीं रिजीम के तहत काम कर रहे थे उन्होंने घर से काम की बजाय ऑफिस से काम में ज्यादा दिलचस्पी दिखाई. कंपनियों मे इस नए प्रयोग को 10 में से 9 अंक दिए.

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2-डे वीकेंड हुआ पुराना
इस शोध की मुख्य शोधकर्ता जूलियट शोर ने कहा है कि अब 2-डे वीकेंड से लोगों का काम नहीं चल पा रहा है. उन्होंने कहा, “कई देशों में 1938 में बना वर्क वीक ही चल रहा है और ये मौजूदा समय की जीवनशैली से मेल नहीं खाता है. जो लोग नौकरीपेशा हैं उनकी सेहत को ध्यान में रखते हुए यह बहुत जरूरी है कि वर्क वीक के पुराने स्ट्रक्चर में बदलाव किए जाएं.” जूलियट शोर बॉस्टन कॉलेज में अर्थशास्त्री और समाजशास्त्री हैं.

कहां-कहां हुआ ट्रायल
इस दिशा में अभी कई शोध होने हैं और ताजा डाटा इस शोध श्रृंखला के शुरुआती नतीजों के आधार पर तैयार किया गया है. इसे न्यूजीलैंड एक एजेंसी द्वारा संचालित किया जा रहा है. यह 6 महीने का पायलट प्रोजेक्ट है. यूएस और कनाडा में ट्रायल पिछले महीने शुरू हुआ था. वहीं, दक्षिण अफ्रीकी और यूरोपीयन कंपनियों में ट्रायल आगामी फरवरी से शुरू होगा. जैसे-जैसे शोध आगे बढ़ेगा शोधकर्ता अपने डाटा को उसके अनुरूप ढालते जाएंगे और देखेंगे कि यह कंपनियों के लिए कितना कारगर है. शुरुआती डाटा अमेरिका, आयरलैंड और ऑस्ट्रेलिया में लिया गया. इसमें 969 कमर्चारी शामिल थे. 10 महीने तक उनके काम करने के दिन को घटाया गया और वेतन में कोई कटौती नहीं कई गई.

कंपनियों की प्रतिक्रिया
कर्मचारियों के लिए नया वर्क वीक बेहतर दिखता है लेकिन क्या कंपनियां भी इससे राजी हैं. इसका जवाब भी शोध में मिला है. कंपनियों का राजस्व ट्रायल के दौरान 8 फीसदी बढ़ा. वहीं, पिछले साल के समान समय के मुकाबले इसमें 38 फीसदी की बढ़त देखने को मिली. कंपनियों ने इस ट्रायल को 10 में से औसतन 7.5 अंक दिए जो इस ट्रायल के कंपनियों पर प्रभाव को सकारात्मक दिखााता है. कर्मचारियों की अनुपस्थिति में भी गिरावट देखने को मिली. इसके अलावा इस्तीफों की संख्या हल्की घटी जबकि नई भर्तियां थोड़ी बढ़ीं. क्राउडफंडिंग कंपनी किक स्टार्टअर के सीटीओ जॉन लीलेंड ने कहा कि कर्मचारियों की काम के प्रति प्रतिबद्धता इतनी अधिक पहले कभी नहीं देखी गई. उन्होंने कहा कि कंपनी ने सितंबर में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था और अब स्थाई रूप से 4-डे वर्किंग वीक को अपना लिया है.

Tags: Business news, Jobs, Research, Weekend

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