कोरोना काल में हर 4 में से 1 व्यक्ति ने जरुरतों को पूरा करने के लिए लिया कर्ज, मुंबई भोपाल सबसे आगे

वेतन कटौती या वेतन में देरी कर्ज की दूसरी वजह
वेतन कटौती या वेतन में देरी कर्ज की दूसरी वजह

अध्ययन में सामने आया कि 46 फीसद लोगों ने प्राथमिक तौर पर घर की जरूरतें पूरी करने के लिए कर्ज लिया. वेतन कटौती या वेतन में देरी कर्ज लेने की दूसरी सबसे बड़ी वजह रही.

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  • Last Updated: November 3, 2020, 10:08 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना (COVID-19) महामारी ने समाज के सभी वर्ग के लोगों के जीवन और अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव डाला है. विभिन्न उद्योगों में नौकरी जाने और वेतन में कटौती के कारण निम्न मध्यम आय वर्ग के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं. महामारी ने लोन एवं कर्ज से जुड़ी प्राथमिकताओं को बदल दिया है. यूरोप और एशिया में सक्रिय अंतरराष्ट्रीय कंज्यूमर फाइनेंस सेवा प्रदाता कंपनी होम क्रेडिट की स्थानीय इकाई होम क्रेडिट इंडिया ने लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान लोगों के बीच कर्ज के पैटर्न को समझने के लिए 7 शहरों में अध्ययन किया.

घर की जरूरतें पूरी करने के लिए लिया कर्ज
अध्ययन में सामने आया कि 46 फीसद लोगों ने प्राथमिक तौर पर घर की जरूरतें पूरी करने के लिए कर्ज लिया. वेतन कटौती या वेतन में देरी कर्ज लेने की दूसरी सबसे बड़ी वजह रही. 27 फीसद लोगों ने माना कि इस कारण से पुराने लोन की ईएमआई चुकाने के लिए उन्हें कर्ज लेना पड़ा. 14 प्रतिशत लोगों को नौकरी जाने के कारण कर्ज लेना पड़ा.

होम क्रेडिट इंडिया ने 2019 में भी ऐसा ही एक अध्ययन कराया था, जिसमें सामने आया था कि परिजनों की जरूरतों को पूरा करना कर्ज लेने की सबसे बड़ी वजह है. ऐसा मानने वाले 46 प्रतिशत लोग हैं. कर्ज लेने की दूसरी बड़ी वजह अपनी लाइफस्टाइल को बेहतर करना है. 33 प्रतिशत लोगों ने माना कि इस कारण से कर्ज लिया जा सकता है. लाइफस्टाइल को बेहतर करने में नया स्मार्टफोन / टीवी / फ्रीज या गाड़ी आदि खरीदना शामिल है.
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दोस्तों या परिवार के लोगों से लिया कर्ज
अध्ययन में एक अन्य बात यह भी सामने आई कि सामान्य दिनों से इतर कोविड के दौरान लोगों ने अपने दोस्तों या परिवार के लोगों से कर्ज लेने को प्राथमिकता में रखा, क्योंकि ऐसे मामले में उन्हें कर्ज चुकाने में सहूलियत मिल जाती है और स्थिति सामान्य होने, नौकरी मिलने और वेतन का क्रम सही हो जाने के बाद आसानी से ऐसे कर्ज को चुकाया जा सकता है. अध्ययन में यह भी सामने आया कि 50 प्रतिशत प्रतिभागियों ने माना कि उन्होंने स्थिति सामान्य होने और नौकरी मिलने के बाद उधार चुकाया. 13 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे लोन की राशि भरने के बाद अपनी उधारी चुकाएंगे.

कर्ज के मामले में मुंबई और भोपाल सबसे आगे
दोस्तों एवं परिजनों से कर्ज के मामले में मुंबई और भोपाल सबसे आगे रहे. यहां 27 प्रतिशत लोगों ने ऐसे माध्यमों से कर्ज लिया. दिल्ली में 26 प्रतिशत और पटना में 25 प्रतिशत लोगों ने दोस्तों और परिवार वालों से कर्ज लिया. अध्ययन में यह भी सामने आया कि दोस्तों या परिवार वालों से कर्ज लेने का फैसला परिवार के पुरुष सदस्यों ने किया. 23 फीसद मामलों में ऐसा हुआ. सर्वेक्षण में शामिल महिलाएं कर्ज नहीं लेने या किसी वित्तीय संस्थान से कर्ज लेने के पक्ष में रहीं. उन्होंने दोस्तों या परिजनों से कर्ज लेने को प्राथमिकता में नहीं रखा.

होम क्रेडिट इंडिया 350 शहरों में अपने करीब 31,500 पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) के मजबूत नेटवर्क के साथ सुकूनभरे वित्तीय विकल्पों के जरिये 1.13 करोड़ ग्राहकों को सेवा उपलब्ध करा रही है. कंपनी जिम्मेदारी के साथ कर्ज उपलब्ध कराते हुए देश में कर्ज की पहुंच बढ़ाने एवं वित्तीय समावेशन को विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध है.

हर साल किया जाता है अध्ययन
इस अध्ययन को लेकर चीफ मार्केटिंग एवं कस्टमर एक्सपीरियंस ऑफिसर मार्को केयरविक ने कहा; 'हम अपने ग्राहकों और उनकी प्राथमिकताओं को समझने के लिए हर साल अध्ययन करते हैं. महामारी का असर धीरे-धीरे सामने आ रहा है और लोगों को बहुत मुश्किल वक्त से गुजरना पड़ रहा है. भारत में लोगों के कर्ज लेने के तरीके को लेकर हमारे अध्ययन में कुछ रोचक तथ्य सामने आए हैं, जो कोविड से पहले के समय की तुलना में काफी अलग हैं. लॉकडाउन के दौरान लोगों ने दोस्तों और परिवार के लोगों से कर्ज लेने को अपनी प्राथमिकता में रखा, क्योंकि महामारी ने परिस्थितियों को अनिश्चित कर दिया है और दोस्तों या परिजनों से लिए गए कर्ज को चुकाने में सहूलियत रहती है. आय कम हो गई है, जिस कारण से लोगों को घर की जरूरतें पूरी करने के लिए कर्ज लेना पड़ा है.'



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होम क्रेडिट इंडिया के बारे में
होम क्रेडिट इंडिया फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड यूरोप और एशिया के देशों में परिचालन कर रही अंतरराष्ट्रीय कंज्यूमर फाइनेंस प्रदाता होम क्रेडिट की स्थानीय शाखा है, जो भारत में वित्तीय समावेशन बढ़ाने की प्रतिबद्धता के साथ संचालित हो रही है. आसान, पारदर्शी और सबकी पहुंच में आने वाले वित्तीय समाधानों के जरिये क्रेडिट की पहुंच बढ़ाने और वित्तीय समावेशन बढ़ाने के लिए कंपनी प्रतिबद्ध है. होम क्रेडिट इंडिया के पास करीब 14,000 कर्मचारियों की टीम है और 2012 में शुरुआत के समय से ही कंपनी लगातार अपने परिचालन में विस्तार कर रही है. इस समय भारत के 22 राज्यों के 350 से ज्यादा शहरों में कंपनी परिचालन कर रही है. कंपनी के पास करीब 31,500 पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) का मजबूत नेटवर्क है और इसका ग्राहक आधार करीब 1.13 करोड़ तक पहुंच चुका है. अहम बाजारों में देशभर में विस्तार, शानदार ग्राहक अनुभव के साथ विविधिकृत व इनोवेटिव प्रोडक्ट के जरिये कंपनी ने यह ग्राहक आधार बनाने में सफलता हासिल की है.
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