गोवा सहित इन 5 राज्यों ने हासिल की बड़ी उपलब्धि, ओपन मार्केट से जुटा पाएंगे अतिरिक्त फंड

ईज ऑफ डुइंग बिजनेस सुधार प्रक्रिया को पूरा करने वाले राज्यों को ओपन मार्किट से अतिरिक्त कर्ज लेने की अनुमति मिलती है.

ईज ऑफ डुइंग बिजनेस सुधार प्रक्रिया को पूरा करने वाले राज्यों को ओपन मार्किट से अतिरिक्त कर्ज लेने की अनुमति मिलती है.

छत्तीसगढ़, अरूणाचल प्रदेश, गोवा, मेघालय और त्रिपुरा भी ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease Of Doing Business) रिफॉर्म करने वाले राज्यों की कतार में खड़े हो चुके हैं.

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  • Last Updated: March 20, 2021, 4:45 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना काल में राज्यों की वित्तीय मांग और जरूरतें पूरी करने में काफी मशक्कत का सामना करना पड़ा. राज्यों को वित्तीय मांगों और उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए केंद्र की मोदी सरकार (Modi Government) ने कई असरदार कदम उठाए. इस वैश्विक महामारी काल में केंद्र सरकार ने घोषणा की थी कि जो भी राज्य नागरिकों के हितों में 4 मापदंडों पर सुधार करेगा उन्हें ओपन मार्केट से अतिरिक्त फंड जुटाने की अनुमति दी जाएगी. इसी आधार पर केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) के व्यय विभाग ने ऐलान किया है कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease Of Doing Business) मापदंड में उल्लेखनीय सुधार करने पर 5 और राज्य छत्तीसगढ़, अरूणाचल प्रदेश, गोवा, मेघालय और त्रिपुरा भी ओपन मार्केट से अतिरिक्त फंड जुटा पाएंगे.

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रिफॉर्म करने करने वाले ये हैं 20 राज्य

राज्य अपने वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए अधिक फंड जुटा पाएं, इसके लिए वे लगातार निर्धारित मापदंड़ों पर सुधार करने की कोशिश कर रहे हैं. अब छत्तीसगढ़, अरूणाचल प्रदेश, गोवा, मेघालय और त्रिपुरा भी ईज ऑफ डूइंग बिजनेस मापदंड में सुधार करने वाले राज्यों की कतार में खड़े हो चुके हैं. इन पांच राज्यों के अलावा असम, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड और तेलंगाना ही वे राज्य है जिसने इस उपलब्धि को हासिल किया है. ईज ऑफ डुइंग बिजनेस मापदंड में सुधार करने की वजह से ही इन राज्यों को 39,521 करोड़ रुपये अतिरिक्त कर्ज लेने की अनुमति दी गई है।

राज्य                 मंंजूर कर्ज राशि
आंध्र प्रदेश           2,525 करोड़ रुपये

असम                  934 करोड़ रुपये

हरियाणा              2,146 करोड़ रुपये



हिमाचल प्रदेश     438 करोड़ रुपये

कर्नाटक              4,509 करोड़ रुपये

केरल                  2,261 करोड़ रुपये

मध्य प्रदेश           2,373 करोड़ रुपये

ओडिसा              1,429 करोड़ रुपये

पंजाब                 1,516 करोड़ रुपये

राजस्थान             2,731 करोड़ रुपये

तमिलनाडु           4,813 करोड़ रुपये

तेलंगाना              2,508 करोड़ रुपये

गुजरात               4,352 करोड़ रुपये

उत्तर प्रदेश          4,851 करोड़ रुपये

उत्तराखंड            702 करोड़ रुपये

अरुणाचल प्रदेश   71 करोड़ रुपये

गोवा                    223 करोड़ रुपये

छत्तीसगढ़            895 करोड़ रुपये

मेघालय               96 करोड़ रुपये

त्रिपुरा                 148 करोड़ रुपये

कोरोना काल में मोदी सरकार ने इस व्यवस्था की शुरूआत की थी

कोविड 19 और लॉक डाउन की वजह से चालू वित्त वर्ष के शुरूआती महीनों में देश के सभी राज्यों के पास अपने प्रशासनिक खर्च तक उठाने के लिए वित्त की कमी पड़ गई थी. इन परिस्थितियों को देखते हुए मोदी सरकार ने 17 मई 2020 को इस व्यवस्था की शुरूआत की थी. जिसके तहत ईज ऑफ डुइंग बिज़नेस सुधार प्रक्रिया को पूरा करने वाले राज्यों को ओपन मार्किट से अतिरिक्त कर्ज लेने की अनुमति होगी. प्रावधान किया गया था कि राज्यों को अपने जीएसटी का 2 फीसदी तक कर्ज लेने की अनुमति होगी. ईज ऑफ डुइंग बिजनेस रिफॉर्म के अलावा वन नेशन वन राशन कार्ड को लागू करना, अर्बन लोकल बॉडी या यूटिलिटी रिफॉर्म और ऊर्जा क्षेत्र में रिफॉर्म करने के लिए राज्यों को प्रोत्साहित किया गया.

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इन मापदंडों पर राज्यों को आंका जा रहा है

केंद्र सरकार द्वारा दी गई इस व्यवस्था के तहत राज्यों के लिए कुछ मापदंड तय किए गए हैं. राज्यों को सबसे पहले जिला स्तर पर बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान को पूरा करना होगा. विभिन्न एक्ट के तहत कारोबार करने के लिए जरूरी लाइसेंस, मंजूरी, पंजीकरण प्रमाण-पत्र का रिन्यूएबल जैसे व्यवस्था को समाप्त करना होगा. कानून के तहत कंप्यूटराइज्ड सेंट्रल रेंडम इंस्पेक्शन सिस्टम को लागू करना होगा. साल में एक ही इंस्पेक्टर को जांच के लिए बार-बार एसाईन नहीं किया जाएगा. इंस्पेक्शन से पहले कारोबारियों को इंस्पेक्शन नोटिस दिया जाएगा. 48 घंटों के भीतर इंस्पेक्शन रिपोर्ट्स को अपलोड करना होगा.
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