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डेलॉइट ग्लोबल के सीईओ की 5 बातें, जिसका लोहा पूरी दुनिया ने माना, यहां देखें

पुनीत रंजन का कहना है कि उच्च शिक्षा के माध्यम से महिलाओं का सशक्तीकरण बेहतर तरीके से होगा.
पुनीत रंजन का कहना है कि उच्च शिक्षा के माध्यम से महिलाओं का सशक्तीकरण बेहतर तरीके से होगा.

डेलॉइट ग्लोबल (Deloitte Global) की शुरुआत महिला सशक्तिकरण (women empowerment) और युवाओं को बेहतर भविष्य देने के लिए की है. डेलॉइट ग्लोबल ने 2030 तक 50 मिलियन लोगों को अवसरों से भरी दुनिया के लिए तैयार करने का रखा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 27, 2020, 4:10 PM IST
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नई दिल्ली. हरियाणा के एक छोटे कस्बे से निकल डेलॉइट ग्लोबल के सीईओ बनने वाले पुनीत रंजन की सोच का लोहा पूरी दुनिया मानती है.  अमेरिका के पश्चिमी तट पर पोर्टलैंड शहर से उन्होंने पूरी दुनिया की 250 से अधिक महिलाओं से ऑनलाइन बात करते हुए ‘इम्पैक्ट डे’ में डेलॉइट के सत्र की शुरुआत की. इम्पैक्ट डे वर्ल्ड क्लास की शुरुआत वर्ष 2017 में पुनीत रंजन ने की थी. जिसका मकसद भारत की 10 मिलियन महिलाओं सहित पूरे विश्व के 50 मिलियन लोगों को वर्ष 2030 तक अवसरों से भरी दुनिया के लिए तैयार करना है.

 शिक्षा और कौशल-निर्माण से होगा महिलाओं का विकास- पुनीत रंजन का कहना है कि उच्च शिक्षा के माध्यम से महिलाओं का सशक्तिकरण बेहतर तरीके से होगा. हम अपने वर्ल्ड क्लास कार्यक्रम के माध्यम से इन प्रयासों का समर्थन करते हैं. यह हमारी प्रतिबद्धता है, जिसे हमने शिक्षा और कौशल-निर्माण के माध्यम से जीवन को बेहतर बनाने के लिए तय किया है.

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 5 बातें जिनका लोहा सबने माना- रंजन पांच सुनहरे नियम प्रदान करते हैं जो डेलॉइट के साथ तीन दशकों से अधिक के करियर के दौरान उनकी मदद करते रहे हैं. सबसे पहले, कड़ी मेहनत करो. आप हमेशा कमरे में सबसे अधिक जानने वाले व्यक्ति नहीं हो सकते हैं, लेकिन आप हमेशा वही हो सकते हैं. जो सबसे कठिन काम करते हैं. दूसरा, गलतियां करने से न डरें. उनसे सीखे और अगली बार बेहतर करें. तीसरा, अपने आप को उन लोगों से घेरे रखें जो आपको प्रेरित करते हैं, जिन लोगों से आप सीख सकते हैं.
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चैथा, अपनी आवाज को महत्व देना सीखें. उपयुक्त बनने की चिंता न करें या किसी और की तरह बनने की कोशिश भी न करें. अपने मूल्यों को पकड़ें और उन चीजों के लिए बोलें, जिन पर आप विश्वास करते हैं. अंत में, उन अवसरों को आगे बढ़ाएं जो आपके रास्ते में आते हैं. इसका मतलब है कि जैसे-जैसे आप जीवन के माध्यम से आगे बढ़ते हैं, आप हमेशा दूसरों के उत्थान के तरीकों की तलाश करते हैं. इसी तरह से वास्तविक परिवर्तन होता है.
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