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इन 7 वजहों से युवा करते हैं ज्यादा खर्च, ऐसे बचें

News18Hindi
Updated: October 26, 2017, 9:22 AM IST
इन 7 वजहों से युवा करते हैं ज्यादा खर्च, ऐसे बचें
युवा मौज-मस्‍ती के चक्‍कर में अक्‍सर बजट से अधिक खर्च कर देते हैं.

युवा मौज-मस्‍ती के चक्‍कर में अक्‍सर बजट से अधिक खर्च कर देते हैं.

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  • Last Updated: October 26, 2017, 9:22 AM IST
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युवा मौज-मस्‍ती के चक्‍कर में अक्‍सर बजट से अधिक खर्च कर देते हैं. नौकरी की शुरुआत और जेब में क्रेडिट कार्ड आने के बाद तो उनके शौक परवान चढ़ने लगते हैं. महंगी और शौकिया खरीदारी के कारण उन पर कर्ज में जाने का संकट भी मंडराने लगता है. ऐसे में आज हम युवाओं को खरीदारी के लिए बाध्‍य करने वाले कारणों के साथ ही उनसे बचने के उपाय भी बता रहे हैं-

लोगों की फिक्र- युवाओं को अक्‍सर दूसरे उनके बारे में क्‍या सोचते हैं, इसकी अधिक फिक्र रहती है. वे उन लोगों को भी इम्‍प्रेस करने में जुट जाते हैं, जिन्‍हें वे जानते तक नहीं. ऐसे में वे चमचमाती कारें, मोटरसाइकिलें, महंगे गैजेट्स, कपड़े, सजावटी चीजें आदि पर अधिक खर्च करने लगते हैं. वास्‍तव में यह प्रवृति अधिकांश युवाओं में पाई जाती है. इससे बचने के लिए अपनी जरूरतों को समझना और खुद से यह सवाल करना कि क्‍या दूसरे लोग भी आपकी तरह ही नोटिस करते हैं? जरूरी है.

पसंद की अधिक परवाह- अपनी च्‍वाइस के नाम पर युवा उन चीजों की खरीद को भी सही ठहराते हैं, जिनके सस्‍ते विकल्‍प उपलब्‍ध होते हैं. इससे बचने के लिए जरूरी है कि वे अन्‍य विकल्‍पों को खारिज नहीं करें और खरीद का निर्णय क्‍वालिटी और कीमत के तुलनात्‍मक अध्‍ययन के बाद ही लें.

टॉप से थोड़ा नीचे की क्‍वालिटी पसंद करना- रिटेलर्स इस ट्रिक का खूब यूज करते हैं. मान लें कि अगर किसी चीज के दो मॉडल की कीमत क्रमश: 200 और 400 है तो अधिकांश युवा कम कीमत वाले मॉडल की तरफ रुख करते हैं, ऐसे में रिटेलर्स बीच के एक-दो और मॉडल भी रख लेते हैं और इस तरह युवा बीच के मॉडलों की तरफ बढ़ते हुए अधिक रकम खर्च कर देते हैं. इससे बचने के लिए आपको अपनी जरूरत और बजट दोनों का ध्‍यान रखते हुए मॉडल्‍स्‍ से कन्‍फ्यूज्‍ड नहीं होना चाहिए.

एंकरिंग इफेक्‍ट- इसका मतलब है कि अगर घड़ी खरीदने के लिए आपका बजट 5000 रुपए है, लेकिन कोई 7000 हजार की घड़ी आपको पसंद आती है तो पहले आप उसे नहीं खरीदने से बचेंगे. लेकिन अगर वह दुकानदार उस पर 10 फीसदी छूट देता है तो अक्‍सर आप उसे खरीद लेते हैं. ऐसे में आप यह जरूर देखें कि क्‍या वह घड़ी डिस्‍काउंट के बाद की रकम के लायक है.

पूर्व धारणा या आदत- पुरानी धारणाएं या आदत भी शॉपिंग पैटर्न को प्रभावित करती है. इससे आप नई चीजों की तरफ कम ही रुक करते हैं. ऐसे में आप बेहतर प्रोडक्‍ट की उपलब्‍धता के बावजूद अधिक कीमत पर पुराने ब्रांड खरीदते रहते हैं, भले ही उससे बेहतर क्‍वालिटी वाली चीज कम कीमत पर उपलबध हो. इससे बचने के लिए नए प्रोडक्‍ट्स और उनकी कीमतों की जानकारियां जरूर लें.

वर्तमान जरूरतों को महत्‍व- युवा अक्‍सर वर्तमान जरूरतों को अधिक महत्‍व देते हुए महंगी चीज खरीद लेते हैं. इसी कारण से वे सेल्‍स, डिस्‍काउंट ऑफर्स और बाय नाउ पे लेटर जैसे लुभावने पेशकश के शिकार हो जाते हैं. इससे बचने का सबसे अच्‍छा तरीका चंद घंटे या दिनों का इंतजार है. आपको समझ में आ जाएगा कि वास्‍तव में इसे लेना चाहिए या नहीं.
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दूसरों की चीजें देखकर खरीदना- अक्‍सर लोग फैशन में बहते हुए कपड़े, ज्‍वैलरी आदि खरीद लेते हैं, भले ही उनकी जरूरत नहीं हो. इस स्थिति में अपने बजट का जरूर ख्‍याल रखें. युवाओं को इन इम्‍पल्‍स बाइंग से बचने के लिए अपनी जेब में क्रेडिट कार्ड के बदले कैश रखने में भलाई है.

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First published: October 26, 2017, 7:37 AM IST
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