उत्तर भारत में बिजली कटौती पर मचा कोहराम

News18India
Updated: April 10, 2015, 9:50 AM IST
उत्तर भारत में बिजली कटौती पर मचा कोहराम
अभी आधी मई भी खत्म नहीं हुई है कि उत्तर भारत के अधिकतर हिस्सों से बिजली को लेकर मारामारी की खबरें आने लगी हैं।
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Updated: April 10, 2015, 9:50 AM IST
नई दिल्ली। अभी आधी मई भी खत्म नहीं हुई है कि उत्तर भारत के अधिकतर हिस्सों से बिजली को लेकर मारामारी की खबरें आने लगी हैं।

पारे की तरहे ही लोगों का गुस्सा भी तेजी से ऊपर चढ़ रहा है। बीते 2 दिनों में बिजली कि किल्लत के कारण दिल्ली, हरियाणा और उत्तर भारत के कई हिस्सों में स्थानीय लोगों ने विद्युत केंद्रों पर हमले किए हैं।


कानपुर में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल भी अपने निर्वाचन क्षेत्र में हो रही बिजली की परेशानी के विरोध में धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि कानपुर में हर रोज करीब 16 घंटे बिजली की कटौती हो रही है। जिसके विरोध में वे प्रदर्शन कर रहे हैं।



उ.प्र. में बिजली-पानी की कमी से लोग बेहाल

कानपुर के लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर क्यों विद्युत आपूर्ती कंपनी के प्रबंध निदेशक के घर की बत्ती रात भर जलती रही जबकि वे पूरी रात अंधेरे में रात गुजारने को मजबूर थे।


कांग्रेसी नेता शैलेंद्र दीक्षित ने कहा कि जब तक समस्या का हल नहीं किया जाता तब तक हम उन्हें सोने नहीं देंगे।


मालूम हो कि यह हालात उत्तर भारत के कई हिस्सों में देखे जा सकते हैं। मंगलवार को हरियाणा के गुड़गांव जिले में और राष्ट्रीय राजधानी में स्थानीय लोगों ने विद्युत संस्थानों पर हमले किए। दुकानदार और छात्र भी इस गर्मी में उबल रहे हैं।



उत्तर प्रदेश में बिजली का बुरा हाल


वाराणसी की छात्रा दिव्या मिश्रा ने कहा कि बिजली न होने की वजह से उन्हें लैंप की रोशनी में पढ़ना पढ़ रहा है। इससे उनकी आखों में तकलीफ हो रही है।


लखनऊ के एक दुकानदार ने कहा कि लगातार बिजली कटौती के चलते खासतौर के शाम के उनके ब्यापार को नुकसान हो रहा है।


उधर उत्तर प्रदेश विद्युत बोर्ड के चेयरमैन विजय कुमार ने कहा कि अगले 2 महीनों तक कुछ नहीं किया जा सकता है। हमारे पास बिजली की कमी है। बिजली कटौती ही एकमात्र उपाय है।


गौरतलब है कि इस क्षेत्र के लगभग सभी इलाकों में बिजली की कमी बनी हुई है। अकेले उत्तर प्रदेश में ही 4 हजार 3 सौ मेगावॉट बिजली की कमी है।


जब कभी बिजली केंद्र पर हमला होता है कि बिजली कंपनियां बिजली की आपूर्ती भी बंद कर देती हैं जिससे बाकी हिस्से भी अंधकार में डूब जाते हैं।
First published: May 7, 2008
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