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6840 लाख करोड़ रुपये का सवाल? लॉकडाउन के बाद आखिर कैसे शुरू होगी दुनिया की इकोनॉमी

6840 लाख करोड़ रुपये का सवाल? लॉकडाउन के बाद आखिर कैसे शुरू होगी दुनिया की इकोनॉमी

कोरोना वायरस के तीन विभिन्न रूप सामने आए हैं.  (प्रतीकात्मक तस्वीर)

कोरोना वायरस के तीन विभिन्न रूप सामने आए हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) की वजह पूरी दुनिया की आबादी का एक बड़ा हिस्सा लॉकडाउन में है. इस बीच अब सभी सरकारों के लिए सबसे बड़ी चिंता अर्थव्यवस्था को रिस्टार्ट करने को लेकर है.

    नई दिल्ली. कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) के बीच अब दुनियाभर के देशों को मंदी का डर सता रहा है. IMF चीफ ने तो यह भी कह दिया है कि मंदी आ चुकी है. COVID-19 संक्रमण को रोकने के लिए कई देशों ने लॉकडाउन लगाया हुआ है. अब इटली के रोम से लेकर अमेरिका के वॉशिंगटन स्थिति अधिकारी इस बात पर गहन विचार कर रहे हैं कि आखिर कैसे इस लॉकडाउन से बाहर निकलकर अर्थव्यवस्था को फिर से स्टार्ट किया जाए. सभी देशों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह भी है कि इकोनॉमिक रिस्टार्ट कि लिए यह उनके पास कोई मास्टर प्लान नहीं है.

    दूसरी वेव की शुरुआत का डर
    माना जा रहा कि बिना किसी एहतियात के ही लॉकडाउन खत्म किया जाता है तो कोरोना वायरस संक्रमण के दूसरे वेव की शुरुआत हो सकती है. अगर ऐसा होता है घरेलू व वैश्विक स्तर पर अर्थव्यवस्था को और भी तगड़ा झटका लग सकता है. साल 1918 में स्पैनिश फ्लू महामारी के वक्त कुछ ऐसा ही हुआ था. इस महामारी को पूरी तरफ से समाप्त होने में पूरी दुनिया को 3 वेव का सामना करना पड़ा था.

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    वुहान पर होगी सभी की नजर
    चीन के वुहान शहर को 76 दिनों के लॉकडाउन के बाद फिर से खोल दिया गया है. अब दुनिया भर के लिए यह एक टेस्ट केस बन सकता है. वुहान के बाद ऑस्ट्रिया, डेनमार्क और नॉर्वे पर लॉकडाउन को खत्म करने की तैयारी में है. इटली और अमेरिका भी अब एग्जिट प्लान पर काम कर रहा है.

    6840 लाख करोड़ रुपये का सवाल? 
    कोरोनावायरस के दूसरे चरण से निपटने के लिए तैयारियों के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद निर्णायक फैसले लिये जाने हैं. वर्तमान में विमान खड़े हैं, सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित है और फैक्ट्रियां ठप पड़ी हैं. ग्रेट डिप्रेशन (Great Depression) के बाद कोरोनावायरस 6840 लाख करोड़ रुपये ( 90 ट्रिलियन डॉलर) की वैश्विक अर्थव्यवस्था को सबसे बड़ी समस्या खड़ी कर चुका है.

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    पूरी कोशिश में केंद्रीय बैंक और सरकारें
    वैश्विक इमरजेंसी के इस दौर में सरकारों ने खर्च से लेकर ब्याज दरों में कटौती कर कुल 5 ट्रिलियन डॉलर मार्केट में पंप करने की कोशिश की है. सभी केंद्रीय बैंकों ने अपनी अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए नीतियों के मोर्चे पर बड़े फैसले लिये हैं. मॉर्गन स्टेनी ने अनुमान लगाया है कि फेडरल रिजर्व, यूरोपियन सेंट्रल बैंक, बैंक आफ जापान और बैंक आफ इंग्लैंड ने अपने बैलेंसशीट में 6.8 ​ट्रिलियन डॉलर का इजाफा कर सकते हैं.

    जल्द रिकवरी कर सकते हैं कुछ देश
    इसके बावजूद भी विशेषज्ञाों को कहना है कि आर्थिक गतिविधियों को अचानक शुरू नहीं किया जा सकता है. ऐसे में कुछ तिमाहियों तक अर्थव्यवस्था की हालत नाजुक ही रहेगी. कुछ देश दूसरे के मुकाबले तेजी से रिकवरी करेंगे.

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    Tags: Business news in hindi, Coronavirus, Indian economy, International Monetary Fund

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