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सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किये Aadhaar एक्ट के सेक्शन 47 और 57, जानिए क्या है इसका मतलब

सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया Aadhaar का सेक्शन 47 और 57 एक्ट, जानिए क्या है इसका मतलब

सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया Aadhaar का सेक्शन 47 और 57 एक्ट, जानिए क्या है इसका मतलब

सुप्रीम कोर्ट ने आधार एक्ट से जुड़े तीन प्रावधानों सेक्शन 33(2), सेक्शन 47 और और सेक्शन 57 को खारिज कर दिया है. आइए जानते हैं इनके बारे में

  • News18Hindi
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    सुप्रीम कोर्ट ने आधार पर बड़ा फैसला देते हुए कहा कि आधार कार्ड संवैधानिक तौर पर वैध है. 5 में से 3 जजों ने आधार के पक्ष में फैसला दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने आधार एक्ट से जुड़े तीन प्रावधानों सेक्शन 33(2), सेक्शन 47 और और सेक्शन 57 को खारिज कर दिया है. आइए जानते हैं इनके बारे में...

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    रद्द हुआ सेक्शन 57- सेक्शन 57 के तहत किसी शख्स की पहचान को सत्यापित करने के लिए आधार की जानकारी को इस्तेमाल करने की इजाजत थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब ये अवैधानिक हो चुका है. जजों ने कहा कि किसी शख्स के सत्यापन के लिए पहले से ही तमाम व्यवस्थाएं मौजूद हैं. ऐसे में आप इस तरह के सेक्शन के जरिए लोगों की निजता में दखल नहीं दे सकते हैं. (ये भी पढ़ें-Aadhaar को PAN कार्ड के साथ लिंक करना जरूरी: सुप्रीम कोर्ट ने कहा)

    सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि प्राइवेट कंपनियों को आधार के आंकड़े एकत्र करने की अनुमति देने वाले आधार कानून के प्रावधान 57 को रद्द कर दिया है. यानी, प्राइवेट कंपनियां अब आधार नहीं मांग सकती हैं.

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    सेक्शन 33(2) के तहत आधार ऐक्ट में ये प्रावधान था कि किसी भी शख्स की जानकारी के बारे में खुलासा किया जा सकता है. हालांकि, इसमें ये व्यवस्था थी कि केंद्र सरकार की तरफ से ज्वाइंट सेक्रेटरी स्तर के अधिकारी से नीचे का अधिकारी किसी शख्स के बारे में आधार के जरिए जानकारी हासिल नहीं कर सकता है. लेकिन अब उस सेक्शन को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है. (ये भी पढ़ें-Aadhaar नंबर पता लगने पर क्या बैंक खाते से पैसे निकाले जा सकते हैं? UIDAI ने दिया जवाब)

    रद्द हुआ सेक्शन 47 एक्ट -सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में सेक्शन-47 को भी अवैधानिक करार दिया है. इसके तहत डेटा ब्रीच के लिए आपराधिक मुकदमे को सिर्फ यूआईडीएआई ही दायर कर सकती थी. इस मामले में किसी शख्स को आपराधिक मुकदमे को दर्ज कराने की इजाजत नहीं थी. लेकिन अब कोई भी शख्स अगर उसे लगता है कि उसके डेटा को गलत इस्तेमाल किया जा रहा है तो वो आपराधिक मुकदमा दर्ज करा सकता है.

     

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