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अभिजीत बनर्जी ने कहा- आर्थिक सुस्ती चिंता का विषय, नीतियां बनाने से पहले उनका मूल्यांकन करे सरकार

News18Hindi
Updated: October 14, 2019, 8:11 PM IST
अभिजीत बनर्जी ने कहा- आर्थिक सुस्ती चिंता का विषय, नीतियां बनाने से पहले उनका मूल्यांकन करे सरकार
इकोनॉमिक्स में नोबेल पुरस्कार विजेता ​अभिजीत बनर्जी

इकोनॉमिक्स में नोबल पुरस्कार (Nobel Prize in Economics 2019) जीतने वाले अभिजीत बनर्जी (Nobel Laureate Abhijit Banerjee) ने कहा कि सरकार को नीतियां बनाने से पहले उनका मूल्यांकन करना चाहिए. उन्होंने सरकार की कई स्कीम्स की तारीफ भी की.

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  • Last Updated: October 14, 2019, 8:11 PM IST
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नई दिल्ली. भारतीय मूल के अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी (Nobel Laureate Abhijit Banerjee) को साल 2019 के लिए इकोनॉमिक्स में नोबल पुरस्कार (Noble Prize in Economics 2019) के​ लिए चुना गया है. अभिजीत बनर्जी के साथ इस पुरस्कार के लिए उनकी पत्नी एस्थर डुफ्लो (Esther Duflo) और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर माइकल क्रेमर (Michael Kremer) को भी चुना गया है. मैसेचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में प्रोफेसर अभिजीत ने CNBC-TV18 से इस मौके पर खास बात की. इस दौरान उन्होंने भारतीय ​अर्थव्यवस्था (Indian Economy) की सुस्ती पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि सरकार को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जो कम करें. उन्हें ऐसी नीतियां नहीं बनानी चाहिए जो वो सोचते हैं कि काम करेगा.

नीतियां लागू करने से पहले उनका मूल्यांकन करे सरकार
बनर्जी ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था डगमगाई हुई है और सरकार को किसी भी नीतियों को सावधानीपूर्वक लाना चाहिए. उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है भारत में नीतियां लाने की थोड़ी चाहत हमेशा होती है क्योंकि उन्हें ये अच्छा लगता है या इसकी राजनीतिक पृष्ठभूमि होती है. अमतौर पर होना यह चाहिए कि नीतियां लागू करने से पहले उनका मूल्यांकन होना चाहिए, समझना चाहिए कि ये सही से काम कर पाएगी या नहीं और फिर उन्हें लागू करने का अंतिम फैसला ​लेना चाहिए. वर्तमान में भी मुझे लगता है कि नीतियों को सही पैमाने पर परखा नहीं जाता और इसे एक विकल्प के तौर पर ही देखा जाता है. प्रधानमंत्री कहते हैं कि ऐसा होता है. सोचने के तरीके को हम थोड़ा विरोध कर रहे हैं.'

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GST को लेकर वित्त मंत्री ने दिया था ये बयान
ध्यान देने वाली बात है कि अभिजीत बनर्जी की तरफ से यह बयान एक ऐसे मौके पर आया है जब कुछ दिन पहले ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने माना था कि वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी में कुछ खामियां हैं. वित्त मंत्री ने कहा, 'जीएसटी से परेशानियां हो रही होंगी लेकिन, मुझ माफ कीजिए यह अब देश का काूनन है.' बनर्जी ने साल 2017 में News18.com से एक इंटरव्यू में नोटबंदी की अलोचना करते हुए कहा था कि उन्हें इसके पीछे कोई तर्क नहीं दिखाई देता.


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सरकारी की तारीफ की
जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर चुके 58 वर्षीय बनर्जी ने कुछ मोर्चे पर सरकार की तारीफ करते हुए कहा, 'NREGA से होने वाला ​अधिकतर इनकम केवल नरेगा से ही नहीं होता बल्कि इस बात पर निर्भर करता है कि लोगों को कम कीमत पर शिफ्ट में काम नहीं करना पड़तो जो कि गरीबी का एक बड़ा हिस्सा है.' उन्होंने आगे कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में सड़कों की योजना का बेहतर असर हुआ है. इससे लोगों के लिए एक से दूसरे जगह जाना आसान हो गया है. वो आसानी से नौकरी के लिए कहीं भी जा सकते हैं.




पीएम-किसान स्कीम का आइडिया समझदारी भरा
पीएम किसान स्कीम के आइडिया की भी तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि सपोर्ट प्राइस से आगे बढ़कर इनकम ट्रांसफर का आइडिया समझदारी भरा था, लेकिन इसके तहत दी जाने वाली रकम अधिक नहीं है. बता दें कि प्रधानमंत्री किसान स्कीम के तहत किसानों को एक साल में 6,000 रुपये दिए जाने का प्रावधान है.

ग्रामीण क्षेत्रों का ग्रोथ रेट घटा
अर्थव्यवस्था के लिए नासूर बनी चीजों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि आंकड़ों से पता चलता है कि ग्रामीण क्षेत्रों का ग्रोथ रेट में साल 2014 के बाद भारी गिरावट आई है. भारत अ​नस्किल्ड कामों का एक बड़ा हिस्सा रियल एस्टेट में है. कंस्ट्रक्शन घटने से ग्रामीण क्षेत्रों का ग्रोथ घटा है.

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First published: October 14, 2019, 7:39 PM IST
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