सरकारी पैनल की बड़ी सिफारिश- 5 से 10 लाख तक 10% और 20 लाख तक 20% लगे टैक्स

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार इनकम टैक्स (Income Tax Slabs) में बड़ी राहत दे सकती है. News18 के मुताबिक, डायरेक्ट टैक्स कोड पर बनी समिति ने मध्यम वर्ग (Middle Class) से इनकम टैक्स का बोझ कम करने की सिफारिश की है और सरकार इस पर जल्द विचार कर सकती है.

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Updated: August 29, 2019, 5:59 AM IST
सरकारी पैनल की बड़ी सिफारिश- 5 से 10 लाख तक 10% और 20 लाख तक 20% लगे टैक्स
आम आदमी को बड़ी राहत की तैयारी! इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव की सिफारिश
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Updated: August 29, 2019, 5:59 AM IST
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार इनकम टैक्स (Income Tax Slabs) में बड़ी राहत दे सकती है. News18 के मुताबिक, डायरेक्ट टैक्स कोड पर बनी समिति ने मध्यम वर्ग (Middle Class) से इनकम टैक्स का बोझ कम करने की सिफारिश की है. अगर ये सिफारिशें लागू होती हैं तो मध्यम वर्ग पर टैक्स का बोझ घटकर आधा हो सकता है.

आपको बता दें कि डायरेक्ट टैक्स कोड (DTC) पर बनी समिति ने पर्सनल इनकम टैक्स (Income Tax) की दरों में भी बदलाव का सुझाव दिया है ताकि टैक्स चोरी में कमी लाई जा सके. पर्सनल इनकम टैक्स की दरों के मामले में समिति ने 5, 10 और 20 फीसदी के तीन स्लैब की सिफारिश की है, जबकि अभी 5, 20 और 30 प्रतिशत की दर से इनकम टैक्स वसूला जाता है.

कितना हो जाएगा टैक्स स्लैब?
इस सिफारिश के मुताबिक 2.5 लाख तक कोई टैक्स नहीं जबकि 10 लाख तक सिर्फ 10% इनकम टैक्स की सिफारिश की गई है. इसके अनुसार 10 से 20 लाख सालाना कमाई तक 20% जबकि 20 से 2 करोड़ तक 30% इनकम टैक्स की सिफारिश की गई है. 2 करोड़ सालाना कमाई से ऊपर 35% इनकम टैक्स की सिफारिश की गई है.

आपको बता दें कि  डायरेक्ट टैक्स (Direct Tax) में सुधार के लिए बनी टास्क फोर्स ने पिछले हफ्ते वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) को अपनी रिपोर्ट सौंप दी. टास्क फोर्स ने आम आदमी के लिए इनकम टैक्स की दरों और स्लैब में बड़े बदलाव की सिफारिश की है.



मिडिल क्लास को राहत देने की तैयारी पूरी- CNBC आवाज़ को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इनकम टैक्स पर टास्क फोर्स की सिफारिश में मीडिय क्लास पर खास फोकस रखा गया है. इसमें इनकम टैक्स में रीबेट की सीमा बढ़ाकर 6.25 लाख रुपये कर दिया गया है. अभी इनकम टैक्स में रीबेट की सीमा 5 लाख रुपये है. इनकम टैक्स छूट की सीमा अभी के स्तर ढाई लाख रु तक बनी रहे.
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समिति ने कॉर्पोरेट के लिए डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (डीडीटी) और मिनिमम अल्टरनेटिव टैक्स (मैट) को भी पूरी तरह से हटाने की सिफारिश की है. टास्क फोर्स का मानना है कि मौजूदा इनकम टैक्स छूट, इसकी दरें और स्लैब मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है. सालाना 55 लाख से कम आमदनी वाले टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत दी जा सकती है.

आम आदमी को मिल सकती है बड़ी राहत

अभी ये है इनकम टैक्स स्लैब
इनकम टैक्स की मौजूदा स्लैब में ढाई से पांच लाख तक 5 फीसदी, 5 से 10 लाख रुपये सालाना आय पर 20 फीसदी और उससे ज्यादा कमाई पर 30 फीसदी इनकम टैक्स लगता है.



>> News18  के मुताबिक, समिति ने पांच से 20 लाख रुपये की आय पर कर 20 से घटाकर दस फीसदी करने और अमीरों पर भी टैक्स 30 से घटाकर 20 फीसदी करने की सिफारिश की है.

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>> समिति का कहना है कि टैक्स स्लैब में बदलाव से कुछ साल के लिए सरकार की आमदनी पर असर होगा. लेकिन लंबे समय में इसका फायदा देखने को मिलेगा. समिति ने डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स भी खत्म करने का सुझाव सरकार को दिया है.

इन टैक्स को बनाए रखने की सिफारिश-  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को सौंपी गई रिपोर्ट में डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (DDT) को खत्म करने और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स (LTCG) और सिक्यॉरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को बनाए रखने का भी सुझाव दिया है.

>> भारतीय कंपनियों को किसी वित्त वर्ष में घोषित या चुकाए गए कुल डिविडेंड पर 15 प्रतिशत का डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स देना पड़ता है. इस पर 12 प्रतिशत का सरचार्ज और 3 प्रतिशत का एजुकेशन सेस भी लगता है.

डायरेक्ट टैक्स कोड पर बनी इस टास्क फोर्स के प्रमुख सीबीडीटी के सदस्य अखिलेश रंजन हैं. 21 महीने में कुल 89 बैठकों के बाद टास्क फोर्स ने यह रिपोर्ट तैयार की है. रिपोर्ट को जल्द ही सार्वजनिक किया जाएगा.

इसके बाद आम लोगों के साथ एक्सपर्ट से भी राय ली जाएगी. राय के आधार पर इसको अंतिम रूप दिया जाएगा. सूत्रों के अनुसार, सहमति बनने के बाद इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार बजट में डायरेक्ट टैक्स में बड़े बदलाव की घोषणा कर सकती है. यह ड्राफ्ट कानून, मौजूदा आयकर कानून का स्थान लेगा.

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First published: August 29, 2019, 5:08 AM IST
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